नई दिल्ली : दिल्ली की राजनीति में बड़ा उलटफेर तब हुआ जब राउज एवेन्यू कोर्ट ने शराब घोटाले मामले में पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया समेत 23 आरोपियों को बरी कर दिया। अदालत ने सीबीआई की चार्जशीट पर संज्ञान लेने से इनकार करते हुए कहा कि जांच में गंभीर खामियां हैं और ठोस सबूतों का अभाव है। इस फैसले के बाद सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। अब पूरे मामले पर भाजपा की प्रतिक्रिया आई है।
भाजपा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि निचली अदालत ने सबूतों के अभाव में बरी किया है और यह एक तकनीकी विषय है। उन्होंने दावा किया कि सैकड़ों मोबाइल फोन और सिम कार्ड नष्ट किए गए, जिसे सबूतों बर्बाद हुए। उनके मुताबिक सीबीआई इस पहलू पर आगे उचित कदम उठाएगी। त्रिवेदी ने सवाल भी उठाया कि अगर आरोप पूरी तरह निराधार थे तो अदालत ने पहले आरोप तय करने की अनुमति कैसे दी। उन्होंने कहा कि पार्टी फैसले का विस्तृत अध्ययन करने के बाद संरचित जवाब देगी।
सुधांशु त्रिवेदी ने कहा, “निचली अदालत ने सबूतों के अभाव में उन्हें बरी किया है। यह एक तकनीकी विषय है, और यह भी सच है कि सैकड़ों मोबाइल फोन और सिम कार्ड नष्ट किए गए थे। सबूतों के नष्ट किए जाने के इस मुद्दे पर सीबीआई उचित कदम उठाएगी। जहां तक पार्टी का सवाल है, वह सभी तथ्यों का विस्तार से अध्ययन करने के बाद संरचित जवाब देगी। अगर सारे आरोप पूरी तरह निराधार थे, तो अदालत ने आरोप तय करने की अनुमति कैसे दी?
कोर्ट ने क्या कहा? विशेष न्यायाधीश जितेंद्र सिंह ने अपने आदेश में साफ कहा कि आरोपपत्र में आंतरिक विरोधाभास हैं और साजिश की थ्योरी को साबित करने वाला कोई ठोस प्रमाण रिकॉर्ड पर नहीं है। उन्होंने जांच एजेंसी को फटकार लगाते हुए कहा कि केजरीवाल के खिलाफ आरोप टिक नहीं सकते और सिसोदिया के खिलाफ प्रथम दृष्टया कोई मामला नहीं बनता।
अदालत ने यह भी कहा कि कानून के शासन के खिलाफ बिना पुख्ता सबूत किसी को फंसाना उचित नहीं। विस्तृत आदेश अभी आना बाकी है। फैसले के बाद केजरीवाल भावुक हो गए और उनकी आंखों में आंसू आ गए। सिसोदिया ने उन्हें गले लगाया। शाम चार बजे केजरीवाल प्रेस कॉन्फ्रेंस करने वाले हैं।
AAP का पलटवार : आप नेता गोपाल राय ने इसे लोकतंत्र की जीत बताया और केंद्र सरकार व भाजपा पर साजिश का आरोप लगाया। वहीं सौरभ भारद्वाज ने कहा कि यह ईमानदार लोगों की जीत है और जांच एजेंसियों के दुरुपयोग पर गंभीर सवाल उठाए।
फिलहाल राजनीतिक लड़ाई अदालत से बाहर बयानबाजी के मैदान में पहुंच चुकी है। एक तरफ भाजपा कानूनी विकल्पों पर विचार कर रही है, तो दूसरी ओर आप इसे नैतिक विजय के रूप में पेश कर रही है। आने वाले दिनों में सीबीआई की अगली चाल और भाजपा की रणनीति इस मामले को फिर से गरमा सकती है।
