सलूणी में सजा साहित्य का मंच, हिंदी विमर्श को मिली नई दिशा

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हिंदी की व्यापकता और बदलती भूमिका पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ

एएम नाथ। सलूणी (चम्बा) :  राजकीय महाविद्यालय सलूणी जिला चंबा में “सलूणी साहित्य सम्मेलन–2026” का भव्य शुभारंभ एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक और सांस्कृतिक उपलब्धि के रूप में सामने आया है। आईसीएसएसआर-एनडब्ल्यूआरसी द्वारा प्रायोजित इस दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का मुख्य विषय हिंदी एक आवाज और दृष्टि के रूप में पहचान, इतिहास और उत्तर-औपनिवेशिक परिवर्तनों का अन्वेषण है, जो हिंदी भाषा की व्यापकता और उसकी बदलती भूमिका को समझने का एक गंभीर प्रयास है। यह आयोजन महाविद्यालय के ग्रामीण क्षेत्र में 20 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में विशेष रूप से आयोजित किया जा रहा है, जो इसकी शैक्षणिक यात्रा का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है।
कार्यक्रम का शुभारंभ पारंपरिक दीप प्रज्वलन और सरस्वती वंदना के साथ हुआ, जिसने वातावरण को गरिमामय और आध्यात्मिक बना दिया। उद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथि सेवानिवृत्त प्राचार्य डॉ. शिव दयाल रहे, जबकि मुख्य वक्ता के रूप में डॉ. बृजेंद्र कुमार अग्निहोत्री ने अपने विचार प्रस्तुत किए। कार्यक्रम की संयोजक श्रीमती पिंकी देवी ने अतिथियों का स्वागत करते हुए सम्मेलन की रूपरेखा प्रस्तुत की, वहीं आयोजन सचिव डॉ. सौरभ मिश्रा ने संगोष्ठी के उद्देश्यों और इसकी प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला।
महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. मोहिंदर कुमार सलारिया ने अपने स्वागत भाषण में इस आयोजन के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि ऐसे राष्ट्रीय स्तर के सम्मेलन ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित संस्थानों के लिए अत्यंत प्रेरणादायक होते हैं। उन्होंने महाविद्यालय की 20 वर्षों की गौरवपूर्ण यात्रा का उल्लेख करते हुए बताया कि सीमित संसाधनों के बावजूद यह संस्थान गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान कर रहा है और क्षेत्र के विद्यार्थियों को सशक्त बना रहा है। उनके अनुसार, हिंदी भाषा भारत की सांस्कृतिक आत्मा की अभिव्यक्ति है, जो समाज के विभिन्न वर्गों को जोड़ने का कार्य करती है।
मुख्य वक्ता डॉ. अग्निहोत्री ने हिंदी भाषा की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, वर्तमान प्रासंगिकता और बदलते सामाजिक-सांस्कृतिक संदर्भों में उसकी भूमिका पर गहन विचार प्रस्तुत किए। उन्होंने हिंदी को केवल एक भाषा नहीं, बल्कि एक विचारधारा और सांस्कृतिक पहचान का माध्यम बताया। मुख्य अतिथि डॉ. शिव दयाल ने भी हिंदी के शैक्षणिक और सामाजिक महत्व को रेखांकित करते हुए विद्यार्थियों को इसके अध्ययन और संवर्धन के लिए प्रेरित किया।
उद्घाटन सत्र का समापन धन्यवाद प्रस्ताव के साथ हुआ, जिसके पश्चात तकनीकी सत्रों का आयोजन किया गया। इन सत्रों में देशभर से आए शोधार्थियों और विद्वानों ने हिंदी भाषा, साहित्य, समाज और संस्कृति से जुड़े विभिन्न विषयों पर अपने शोध-पत्र प्रस्तुत किए। इन चर्चाओं ने सम्मेलन को बौद्धिक रूप से समृद्ध बनाया और नए विचारों के आदान-प्रदान का मंच प्रदान किया।
दिन का समापन एक रंगारंग सांस्कृतिक संध्या के साथ हुआ, जिसमें विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत लोक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने सभी उपस्थित लोगों का मन मोह लिया। कुल मिलाकर, “सलूणी साहित्य सम्मेलन–2026” का प्रथम दिवस अत्यंत सफल और प्रेरणादायक रहा, जिसने हिंदी भाषा और साहित्य के प्रति नई ऊर्जा और उत्साह का संचार किया।

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