चंडीगढ़/नई दिल्ली, 27 मार्च : ईरान और इज़राइल-अमेरिका के बीच चल रहे युद्ध के मद्देनज़र देश में उर्वरकों के आयात को लेकर चिंता जताते हुए, चंडीगढ़ से सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री मनीष तिवारी ने केंद्र सरकार से सवाल किया है।
लोकसभा में संबोधित करते हुए, सांसद तिवारी ने कहा कि भारत ने वर्ष 2020-25 के दौरान खाड़ी देशों से लगभग 11 बिलियन डॉलर का उर्वरक आयात किया है। इसी तरह, 49 प्रतिशत नाइट्रोजन आधारित उर्वरक सऊदी अरब, ओमान, कतर और यू एई से आता है। उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात में पिछले चार सप्ताह से हॉर्मुज स्ट्रेट बंद पड़ा है और युद्ध की स्थिति को देखते हुए इसके जल्द खुलने की संभावना भी नजर नहीं आ रही है।
तिवारी ने जोर देते हुए, कहा कि युद्ध की परिस्थितियों के कारण ऊर्जा उत्पादन से जुड़े लगभग 40 संस्थान क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। इसके अलावा, कतर की सबसे बड़ी उर्वरक निर्माता कंपनी कतर फर्टिलाइजर कंपनी को भी बंद कर दिया गया है, जिसके साथ भारत का दीर्घकालिक समझौता है। सांसद ने कहा कि मौजूदा खरीफ सीजन के लिए सरकार के पास उर्वरक का स्टॉक उपलब्ध है, लेकिन अगले रबी सीजन के लिए सरकार की क्या तैयारियां हैं? क्या सरकार कृषि के विकेंद्रीकरण से संबंधित कोई नीति बना रही है? इसके अलावा खाड़ी देशों से होने वाले बाकी आयात को लेकर सरकार की क्या योजना है?
इस पर जवाब देते हुए, केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्री जे पी नड्डा ने कहा कि आने वाले खरीफ सीजन के लिए पर्याप्त उर्वरक उपलब्ध है। हालांकि अगले रबी सीजन के लिए उर्वरकों की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सरकार नए बाजारों की तलाश कर रही है और कच्चे माल की व्यवस्था की जा रही है।
