नई दिल्ली : पंजाब की शांत वादियों को एक बार फिर आतंकवाद और खूनी गैंगवार की आग में झुलसाने के लिए सरहद पार बैठे आकाओं ने अपनी रणनीति पूरी तरह बदल दी है. महज 24 घंटे के भीतर पंजाब पुलिस द्वारा अमृतसर ग्रामीण और शहरी इलाकों में की गई दो बैक-टू-बैक बड़ी कार्रवाइयों ने देश की सुरक्षा एजेंसियों के कान खड़े कर दिए हैं ।
14 जुलाई को जहां अमृतसर ग्रामीण क्षेत्र से एक जिंदा हथगोला, एक अत्याधुनिक एके-47 राइफल, एक मॉडिफाइड एम4 श्रेणी की .30 बोर स्वचालित बंदूक और पांच मैगजीन के साथ तीन तस्कर दबोचे गए. वहीं ठीक अगले दिन यानी 15 जुलाई को अमृतसर पुलिस ने एक और आतंकी को गिरफ्तार कर उसके पास से एक हैंड ग्रेनेड, 9 एमएम की बेहद घातक ग्लॉक पिस्टल और चार जिंदा कारतूस बरामद किए.
इन दोनों बड़ी घटनाओं की कड़ियों को अगर एक साथ जोड़कर देखा जाए, तो यह भारतीय सुरक्षा तंत्र और पंजाब की कानून-व्यवस्था के लिए बेहद डरावने और गंभीर संकेत दे रहे हैं:
अत्याधुनिक मिलिट्री-ग्रेड हथियारों की बाढ़: सिर्फ ड्रग्स नहीं, अब मकसद तबाही : अब तक पंजाब बॉर्डर पर होने वाली ड्रोन और मानव तस्करी में मुख्य रूप से हेरोइन या साधारण देसी कट्टे बरामद होते थे. लेकिन हालिया बरामदगी में एके-47 और मॉडिफाइड एम4 श्रेणी की ऑटोमैटिक बंदूकों का मिलना यह साफ करता है कि सीमा पार बैठे आईएसआई (ISI) हैंडलर अब पंजाब में सिर्फ नशे का जाल नहीं फैलाना चाहते, बल्कि वे बड़े पैमाने पर संगठित हिंसा और तबाही मचाने का सामान भेज रहे हैं. एम4 जैसी मिलिट्री-ग्रेड राइफलों का इस्तेमाल आमतौर पर घाटी में सक्रिय आतंकी करते हैं, इनका पंजाब में पाया जाना एक बड़े खतरे की घंटी है।
पाकिस्तानी ISI का नया पैंतरेबाज़ी: अब ‘इंस्टाग्राम’ से हो रही है भर्ती : 15 जुलाई को पकड़े गए आरोपी से हुई प्रारंभिक पूछताछ ने सुरक्षा एजेंसियों को सबसे ज्यादा चौंकाया है. यह आरोपी किसी खुफिया अंडरग्राउंड नेटवर्क से नहीं, बल्कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘इंस्टाग्राम’ के जरिए सीधे पाकिस्तान में बैठे आईएसआई (ISI) हैंडलरों के संपर्क में आया था. इसका सीधा संकेत है कि पाकिस्तान अब पंजाब के स्थानीय और भटके हुए युवाओं को डिजिटल माध्यमों से बरगला रहा है. बिना किसी भौतिक मुलाकात के, सिर्फ सोशल मीडिया मैसेजेस के दम पर युवाओं को ‘लोन वोल्फ’ या स्लीपर सेल में तब्दील किया जा रहा है।
टारगेट किलिंग और सांप्रदायिक अशांति फैलाने का बड़ा इनपुट : .अमृतसर जैसे संवेदनशील और धार्मिक रूप से महत्वपूर्ण जिले में लगातार दो दिनों तक हैंड ग्रेनेड और ग्लॉक पिस्टल जैसी चुनिंदा टारगेट किलिंग वाली बंदूकों का मिलना किसी बड़े वीआईपी (VIP) हमले या भीड़भाड़ वाले इलाके को दहलाने की साजिश की ओर इशारा करता है. पुलिस ने भी माना है कि यह कार्रवाई पंजाब में शांति और कानून व्यवस्था को पूरी तरह से डिस्टर्ब करने की टाइमिंग के साथ रची गई थी, जिसे समय रहते नाकाम कर दिया गया।
टेरर-गैंगस्टर सिंडिकेट का खतरनाक गठजोड़
अमृतसर ग्रामीण से पकड़े गए तीन आरोपियों का संबंध जिस संगठित तस्करी गिरोह से सामने आ रहा है, वह पंजाब के पुराने ‘टेरर-गैंगस्टर नेटवर्क’ के दोबारा जिंदा होने का पुख्ता सबूत है. पाकिस्तान में बैठे खालिस्तानी आका और आईएसआई अफसर स्थानीय गैंगस्टरों को हथियारों की लालच देकर उनसे अपने राष्ट्रविरोधी अजेंडे को पूरा करवा रहे हैं।
सुरक्षा ग्रिड के लिए चुनौती: इन दोनों घटनाओं के बाद सीमा सुरक्षा बल (BSF) और पंजाब पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती बॉर्डर पर एक्टिव एंटी-ड्रोन सिस्टम को और ज्यादा मुस्तैद करने की है, क्योंकि बारूद की यह बड़ी खेप अत्याधुनिक ड्रोनों के जरिए ही भारतीय सीमा के भीतर ड्रॉप की जा रही है. जब तक इन हथियारों के स्थानीय ‘रिसीवर नेटवर्क’ और ‘डिजिटल हैंडलर्स’ को जड़ से नहीं उखाड़ा जाता, तब तक पंजाब पर मंडरा रहा यह साया टलने वाला नहीं है।
पंजाब पुलिस ने क्या कहा?..पंजाब पुलिस ने स्पष्ट किया है कि राज्य में सीमा पार से संचालित होने वाले आतंकी मॉड्यूल और आपराधिक नेटवर्क के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा. पुलिस ने कहा कि प्रदेश की शांति, सुरक्षा और आम लोगों की जान-माल की रक्षा उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है तथा किसी भी आतंकी या राष्ट्र विरोधी गतिविधि को सफल नहीं होने दिया जाएगा. फिलहाल जांच एजेंसियां आरोपी के डिजिटल उपकरणों, सोशल मीडिया संपर्कों और वित्तीय लेन-देन की भी जांच कर रही हैं, ताकि इस साजिश से जुड़े पूरे नेटवर्क का खुलासा किया जा सके।
