भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने सुक्खू सरकार पर साधा निशाना, बोले- जनता पर कर्ज, टैक्स और महंगाई का बोझ बढ़ा
एएम नाथ। शिमला : भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व वाली हिमाचल सरकार पर खर्च और प्राथमिकताओं को लेकर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार के पास अस्पतालों में मरीजों को पर्ची उपलब्ध करवाने के लिए 10 रुपये तक नहीं हैं, जबकि मुख्यमंत्री और मंत्रियों के आलीशान कार्यालयों तथा अन्य सुविधाओं पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं।
‘आम आदमी की राहतों में कटौती’
बिंदल ने कहा कि मुख्यमंत्री का राजनीतिक सफर कभी आल्टो कार से शुरू हुआ था, लेकिन अब सरकार में आलीशान गाड़ियों, कार्यालयों और कोठियों पर खर्च किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि दूसरी ओर आम जनता पर कर्ज, टैक्स और महंगाई का बोझ बढ़ रहा है। उनके अनुसार बिजली सब्सिडी में बदलाव, बिजली पर विभिन्न सेस, स्टाम्प ड्यूटी और एचआरटीसी से जुड़ी रियायतों में बदलाव से आम लोगों पर आर्थिक दबाव बढ़ा है।
हिमकेयर और पेंशन को लेकर भी उठाए सवाल
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने हिमकेयर योजना के तहत उपचार को लेकर मरीजों और अस्पतालों के सामने आ रही समस्याओं का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि प्रदेश के पेंशनर्स अपनी देनदारियों और समय पर पेंशन के लिए आवाज उठा रहे हैं, जबकि बेरोजगार युवा रोजगार का इंतजार कर रहे हैं। उन्होंने कांग्रेस के चुनावी वादे में एक लाख सरकारी नौकरियों का भी उल्लेख करते हुए सरकार पर वादा पूरा नहीं करने का आरोप लगाया।
महिलाओं और ग्रामीण शिक्षा का मुद्दा उठाया
बिंदल ने कहा कि महिलाएं चुनावी वादों को पूरा करने की मांग कर रही हैं। वहीं आम परिवार बिजली, पानी, परिवहन और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े बढ़ते खर्च को लेकर परेशान हैं। उन्होंने स्कूलों को बंद और मर्ज किए जाने के फैसलों पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि इससे ग्रामीण क्षेत्रों की शिक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ी है।
8 सबडिवीजन बंद करने पर मांगा जवाब
बिंदल ने हाल ही में नेशनल हाईवे से संबंधित एक डिवीजन और आठ सबडिवीजन बंद करने की अधिसूचना का भी जिक्र किया। उन्होंने सरकार से पूछा कि इन कार्यालयों को बंद करने से संबंधित क्षेत्रों में सड़क निर्माण, मरम्मत और विकास कार्यों पर क्या असर पड़ेगा।
‘जनता के हित में तय हों सरकारी प्राथमिकताएं’
बिंदल ने कहा कि सरकारी संसाधनों पर पहला अधिकार प्रदेश की जनता, गरीब, किसान, कर्मचारी, पेंशनर, महिलाओं और बेरोजगार युवाओं का होना चाहिए। उन्होंने सरकार से अपनी प्राथमिकताएं बदलने की मांग करते हुए कहा कि जनता सरकार के निर्णयों और खर्च का राजनीतिक हिसाब आगामी विधानसभा चुनाव में करेगी।
