पंजाब की राजनीति पर पार्टी ने कभी सलाह नहीं ली, बोले पूर्व मुख्यमंत्री; कहा- करीब छह दशक के अनुभव के बावजूद नहीं हुई कोई बैठक
चंडीगढ़। पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने भारतीय जनता पार्टी में अपने करीब चार साल के राजनीतिक सफर को लेकर खुलकर अपनी नाराजगी जाहिर की है। द ट्रिब्यून को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि भाजपा में शामिल होने के बाद उन्हें कोई खास राजनीतिक भूमिका या लाभ नहीं मिला और पंजाब की राजनीति व नीति से जुड़े मामलों में पार्टी ने उनसे सलाह भी नहीं ली।
अमरिंदर सिंह ने कहा कि उन्हें भाजपा में शामिल होने का अफसोस नहीं है, लेकिन अगर उनसे पूछा जाए कि इन वर्षों में उन्होंने क्या हासिल किया, तो उनके पास इसका कोई स्पष्ट जवाब नहीं है।
पंजाब को लेकर सलाह तक नहीं ली
पूर्व मुख्यमंत्री के मुताबिक, किसी पार्टी में शामिल होने वाले अनुभवी नेता से उम्मीद होती है कि उसके राजनीतिक अनुभव का इस्तेमाल किया जाएगा। उन्होंने कहा कि उन्होंने करीब छह दशक तक पंजाब की राजनीति को करीब से देखा है और ब्लॉक स्तर से लेकर मुख्यमंत्री पद तक का अनुभव उनके पास है। इसके बावजूद पंजाब की राजनीति या नीति को लेकर भाजपा के साथ उनकी कोई बैठक नहीं हुई।
उन्होंने कहा कि पार्टी को जमीनी राजनीति समझने वाले नेताओं से सलाह लेनी चाहिए। उनके मुताबिक, वह छह बार विधायक, दो बार सांसद और दो बार पंजाब के मुख्यमंत्री रह चुके हैं।
‘भाजपा पंजाब को नहीं समझती’
इंटरव्यू में जब उनसे पूछा गया कि क्या भाजपा पंजाब को समझती है, तो अमरिंदर सिंह ने इसका जवाब ‘नहीं’ में दिया। उन्होंने कहा कि भाजपा लंबे समय तक पंजाब में सत्ता में नहीं रही, इसलिए उसे राज्य की राजनीति और राजनीतिक व्यवस्था को समझने के लिए जमीनी स्तर पर काम करने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि केवल मंत्री बनने से किसी राज्य की राजनीति को समझना संभव नहीं है। इसके लिए ब्लॉक और जिला स्तर से राजनीति को समझना जरूरी है।
अमरिंदर सिंह ने कहा कि भाजपा को उनके जैसे अनुभवी नेताओं से कम से कम सलाह लेनी चाहिए। अगर पार्टी को उनकी सलाह सही न लगे तो उसे अस्वीकार किया जा सकता है, लेकिन अनुभव रखने वाले व्यक्ति से सलाह ही न लेना उचित नहीं है।
भाजपा में क्यों बने हुए हैं?
जब उनसे पूछा गया कि अगर उन्हें भाजपा में अपेक्षित भूमिका नहीं मिल रही तो वह पार्टी में क्यों बने हुए हैं, तो अमरिंदर सिंह ने कहा कि उनके सामने विकल्प क्या है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह अकाली दल में नहीं जा सकते और उन्हें नहीं लगता कि कांग्रेस उन्हें वापस स्वीकार करेगी।
उन्होंने हालांकि कांग्रेस के साथ अपने पुराने संबंधों को भी याद किया। अमरिंदर सिंह ने कहा कि वह करीब 50 साल तक कांग्रेस के साथ रहे और पार्टी उनके जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस छोड़ने का फैसला उन्होंने खुद नहीं लिया था, बल्कि कांग्रेस नेतृत्व ने उनसे अलग होने का निर्णय लिया था और उन्होंने उसे स्वीकार किया।
कांग्रेस में वापसी की अटकलों पर भी स्थिति स्पष्ट
कांग्रेस में उनकी संभावित वापसी को लेकर चल रही अटकलों पर भी अमरिंदर सिंह ने स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि उन्होंने कांग्रेस छोड़ने की पहल नहीं की थी और अब वह पार्टी में लौटने के लिए कोई पहल नहीं कर रहे हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि पिछले करीब पांच वर्षों में सोनिया गांधी, राहुल गांधी या प्रियंका गांधी के साथ उनकी कोई राजनीतिक बातचीत नहीं हुई है।
