चंडीगढ़: पंजाब में धान की खरीद शुरू होने के साथ ही मंडियों और राइस मिलों में भंडारण क्षमता का संकट गहराने लगा है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रहलाद जोशी को पत्र लिखकर केंद्र से तत्काल 21 लाख मीट्रिक टन अनाज उठाने की मांग की है। इसमें 1 से 10 अक्टूबर के बीच 6 लाख मीट्रिक टन चावल और पूरे अक्टूबर में 15 लाख मीट्रिक टन गेहूं उठाने की मांग शामिल है।
मुख्यमंत्री के अनुसार करीब 40 लाख मीट्रिक टन गेहूं राइस मिलों और मंडी यार्डों में भंडारण के लिए रखा गया था, जिसमें से लगभग 17 लाख मीट्रिक टन गेहूं अभी भी वहीं पड़ा है। ऐसे में धान की आवक बढ़ने पर मंडियों और राइस मिलों में नई फसल रखने के लिए जगह की कमी हो सकती है।
सितंबर में भी लिफ्टिंग रही अपेक्षा से कम
मान ने कहा कि राज्य सरकार सितंबर में भी केंद्र से अनाज की लिफ्टिंग तेज करने का आग्रह कर चुकी है। 1 से 29 सितंबर तक पंजाब से 8.30 लाख मीट्रिक टन चावल और 4.30 लाख मीट्रिक टन गेहूं उठाया गया। राज्य सरकार के अनुसार जून से हर महीने कम से कम 10 लाख मीट्रिक टन गेहूं और चावल की लिफ्टिंग की जरूरत बताई जा रही है।
आंकड़ों के मुताबिक जून में 11.91 लाख मीट्रिक टन, जुलाई में 11.60 लाख मीट्रिक टन, अगस्त में 12.72 लाख मीट्रिक टन और सितंबर में 29 तारीख तक 12.60 लाख मीट्रिक टन अनाज की लिफ्टिंग हुई।
6 लाख मीट्रिक टन चावल की डिलीवरी अभी बाकी
मुख्यमंत्री ने बताया कि खरीफ मंडीकरण सीजन 2025-26 के लिए निर्धारित 105.64 लाख मीट्रिक टन कस्टम मिल्ड राइस में से 29 सितंबर तक 99.50 लाख मीट्रिक टन यानी करीब 94 प्रतिशत चावल एफसीआई को डिलीवर किया जा चुका है। लगभग 6 लाख मीट्रिक टन चावल की डिलीवरी अभी बाकी है।
मान ने कहा कि धान की आवक 10 अक्टूबर के आसपास चरम पर पहुंच सकती है। ऐसे में लंबित चावल की डिलीवरी और राइस मिलों तथा मंडी यार्डों में पड़े गेहूं की तत्काल लिफ्टिंग जरूरी है। उन्होंने केंद्र से एफसीआई अधिकारियों को आवश्यक निर्देश जारी कर उठान तेज करवाने का आग्रह किया है। मुख्यमंत्री के मुताबिक जगह की कमी से राइस मिलरों को धान के भंडारण और मिलिंग में परेशानी हुई तो इसका असर सीधे धान की खरीद व्यवस्था पर पड़ सकता है।
