तीन सप्ताह में जवाब दाखिल करने के निर्देश, सफल अभ्यर्थियों की काउंसलिंग बीच में रोकने को दी गई है चुनौती
शिमला। हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने सीबीएसई से संबद्ध स्कूल ऑफ एक्सीलेंस में शिक्षकों की उप-कैडर भर्ती प्रक्रिया और काउंसलिंग बीच में रोकने के मामले में कड़ा संज्ञान लिया है। न्यायमूर्ति ज्योत्सना रिवाल दुआ की पीठ ने राज्य सरकार को नोटिस जारी कर तीन सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने सरकार से पूछा है कि स्वीकृत योजना के तहत काउंसलिंग प्रक्रिया आगे क्यों नहीं बढ़ाई जा रही है। मामले की अगली सुनवाई 5 नवंबर 2026 को होगी।
लिखित परीक्षा में सफल हुए थे याचिकाकर्ता
प्रदीप और अन्य याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत को बताया गया कि राज्य सरकार ने 11 फरवरी 2026 को सीबीएसई से संबद्ध स्कूल ऑफ एक्सीलेंस के लिए योजना शुरू की थी। इसके तहत शिक्षकों का चयन लिखित परीक्षा और काउंसलिंग में मेरिट के आधार पर किया जाना था। भर्ती प्रक्रिया फरवरी-मार्च में शुरू हुई और 5 मार्च को लिखित परीक्षा आयोजित की गई।
इस योजना को पहले भी हाई कोर्ट में चुनौती दी गई थी। अदालत ने 29 अप्रैल 2026 को याचिका खारिज करते हुए सरकार को परीक्षा परिणाम घोषित करने और कानून के अनुसार काउंसलिंग प्रक्रिया आगे बढ़ाने के निर्देश दिए थे।
कैबिनेट सब-कमेटी के गठन के बाद प्रक्रिया अटकी
अदालत के निर्देशों के बाद सरकार ने 1 मई 2026 को लिखित परीक्षा का परिणाम घोषित किया। याचिकाकर्ताओं के अनुसार, वे परीक्षा में सफल रहे और काउंसलिंग के लिए पात्र घोषित किए गए। हालांकि, उनका आरोप है कि सरकार ने काउंसलिंग पूरी करने के बजाय 27 जून 2026 को अधिसूचना जारी कर कैबिनेट सब-कमेटी गठित कर दी, जिसके बाद भर्ती प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ी।
याचिका में यह भी कहा गया है कि 18 सितंबर 2026 को जारी नोटिस के माध्यम से काउंसलिंग को कुछ चुनिंदा विषयों और स्कूलों तक सीमित कर दिया गया।
सब-कमेटी संबंधी अधिसूचना रद्द करने की मांग
याचिकाकर्ताओं ने अदालत से कैबिनेट सब-कमेटी के गठन संबंधी अधिसूचना रद्द करने और सभी सफल अभ्यर्थियों की काउंसलिंग जल्द पूरी करवाने की मांग की है।
मामले की सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से भर्ती प्रक्रिया रोकने का कारण स्पष्ट करने को कहा है। अब सरकार के जवाब और अगली सुनवाई पर इस मामले की आगे की दिशा निर्भर करेगी।
