उपायुक्त जतिन लाल ने किया शुभारंभ, पुराने बस अड्डा परिसर में 18 अक्टूबर तक चलेगा बाजार
रोहित जसवाल। ऊना, 14 अक्टूबर। देशभर की पारंपरिक हस्तशिल्प कला और हस्तनिर्मित उत्पादों की झलक अब ऊना में देखने को मिल रही है। शहर के पुराने बस अड्डा परिसर में गांधी शिल्प बाजार सज गया है। यहां विभिन्न राज्यों से पहुंचे कारीगर अपनी पारंपरिक कला और हाथों से तैयार की गई आकर्षक वस्तुओं का प्रदर्शन कर रहे हैं। उपायुक्त जतिन लाल ने मंगलवार शाम बाजार का शुभारंभ किया। यह बाजार 18 अक्टूबर तक चलेगा।
शुभारंभ के बाद उपायुक्त जतिन लाल ने बाजार में लगाए गए विभिन्न स्टॉलों का निरीक्षण किया और कारीगरों से बातचीत कर उनके उत्पादों तथा उन्हें तैयार करने की पारंपरिक विधियों के बारे में जानकारी ली। उन्होंने कारीगरों के हुनर और उनकी कलात्मक प्रतिभा की सराहना की। इस दौरान उन्होंने हस्तशिल्प की कुछ वस्तुओं की खरीदारी भी की।
देशभर की पारंपरिक कलाओं का संगम
गांधी शिल्प बाजार में बनारस, जम्मू-कश्मीर के उधमपुर और बसोहली, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, बिहार, राजस्थान, झारखंड और दिल्ली सहित विभिन्न राज्यों के कारीगर अपने उत्पाद लेकर पहुंचे हैं। इसके साथ ही हिमाचल प्रदेश के कुल्लू, शिमला, चंबा, मंडी, किन्नौर, लाहौल-स्पीति, ऊना, बंगाणा और गगरेट सहित अन्य क्षेत्रों की पारंपरिक हस्तशिल्प कला भी बाजार में देखने को मिल रही है।
विभिन्न क्षेत्रों की विशिष्ट कारीगरी और हाथों से तैयार की गई वस्तुएं बाजार को खास बना रही हैं। यहां लोगों को अलग-अलग राज्यों की कला, संस्कृति और पारंपरिक शिल्प को करीब से जानने का अवसर मिल रहा है।
कारीगरों को मिलेगा उत्पाद बेचने का अवसर
गांधी शिल्प बाजार का उद्देश्य पारंपरिक हस्तशिल्प को प्रोत्साहित करना और कारीगरों को अपने उत्पादों के प्रदर्शन एवं बिक्री के लिए मंच उपलब्ध करवाना है। इससे कारीगर अपनी कला को अधिक लोगों तक पहुंचा सकते हैं और अपने हस्तनिर्मित उत्पादों के लिए नए ग्राहक बना सकते हैं।
वहीं, स्थानीय लोगों के लिए यह बाजार देश के विभिन्न हिस्सों की पारंपरिक कलाओं को देखने और हस्तनिर्मित वस्तुओं की खरीदारी करने का अवसर है। बाजार के माध्यम से भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा देने और पारंपरिक कारीगरी को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।
