बौद्ध दर्शन में डॉक्टरेट के समकक्ष मानी जाती है उपाधि, महिलाओं के लिए 2012 में खुला था डिग्री हासिल करने का रास्ता
एएम नाथ। धर्मशाला । तिब्बती बौद्ध परंपरा में महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज हुई है। धर्मशाला में आयोजित समारोह में 33 तिब्बती बौद्ध भिक्षुणियों को प्रतिष्ठित ‘गेशेमा’ डिग्री प्रदान की गई। बौद्ध दर्शन में उच्च विद्वत्ता की प्रतीक यह उपाधि पहले पुरुष भिक्षुओं तक सीमित थी। इसे हासिल करने वाली भिक्षुणियां अब बौद्ध दर्शन के अध्ययन, शिक्षण और पारंपरिक ज्ञान के संरक्षण में अधिक सक्रिय भूमिका निभा सकेंगी।
गेशेमा स्नातकों के नौवें बैच को प्रख्यात तिब्बती लामा लिंग रिनपोचे की उपस्थिति में डिग्रियां प्रदान की गईं। समारोह से पहले भिक्षुणियों ने तिब्बती आध्यात्मिक नेता दलाई लामा से आशीर्वाद भी लिया।
दशकों के प्रयासों का परिणाम
महिलाओं को गेशेमा डिग्री देने की व्यवस्था तिब्बती मठवासी परंपरा में लैंगिक समानता की दिशा में लंबे समय से किए जा रहे प्रयासों का परिणाम है। इस उपाधि के माध्यम से भिक्षुणियों को बौद्ध दर्शन में उच्च स्तरीय अध्ययन, शास्त्रार्थ और शिक्षण के अवसर मिलते हैं।
नेपाल के कोपन मठ की शिक्षिका गेशेमा नमडोल फुंटसोक ने इसे महत्वपूर्ण उपलब्धि बताते हुए कहा कि गहन दार्शनिक ज्ञान महिलाओं को समाज में अपनी भूमिका मजबूत करने का अवसर देता है। उन्होंने महिलाओं के लिए दार्शनिक बहस की शुरुआत को इस बदलाव की दिशा में अहम कदम बताया।
लगभग दो दशक की पढ़ाई के बाद मिली उपलब्धि
हिमाचल प्रदेश के किन्नौर की भिक्षुणी आराधना ने अपनी पढ़ाई के अनुभव साझा करते हुए बताया कि उनकी अध्ययन यात्रा लगभग दो दशक तक चली। उन्होंने कहा कि शुरुआत में उन्होंने डिग्री हासिल करने का लक्ष्य तय नहीं किया था, लेकिन अध्ययन के दौरान उनकी रुचि बढ़ती गई। आज इस उपलब्धि को हासिल कर वह खुद को भाग्यशाली महसूस करती हैं। उनके अनुसार, महिलाओं को इस स्तर तक पहुंचते देखना दूसरी महिलाओं के लिए भी प्रेरणा है।
वहीं, काठमांडू के कोपन ननरी की सांग्ये चिनज़ोम ने कहा कि इस शिक्षा के माध्यम से भिक्षुणियां अपने ज्ञान और अनुभव को दुनिया भर के लोगों के साथ साझा कर सकती हैं तथा ध्यान और आध्यात्मिक अभ्यास के जरिए समाज के कल्याण में योगदान दे सकती हैं।
2012 में महिलाओं के लिए खुला था रास्ता
दलाई लामा और केंद्रीय तिब्बती प्रशासन के प्रयासों से वर्ष 2012 में महिलाओं के लिए गेशेमा डिग्री हासिल करने की औपचारिक व्यवस्था शुरू हुई। इसके बाद तिब्बती बौद्ध भिक्षुणियों के लिए उच्च स्तरीय दार्शनिक अध्ययन और परीक्षा प्रणाली में भाग लेने का अवसर बढ़ा।
इस नौवें बैच के साथ दुनिया भर में गेशेमा डिग्री प्राप्त भिक्षुणियों की संख्या 160 से अधिक हो गई है। इसे तिब्बती धार्मिक परंपराओं, बौद्ध दर्शन और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में महिलाओं की बढ़ती संस्थागत भूमिका के रूप में देखा जा रहा है।
