होबार स्कूल में मिशन लाइफ के तहत एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित
स्थानीय हस्तकला विशेषज्ञों ने धमन, बांस, खजूर के पत्तों और धान की पराली से वस्तुएं बनाने का किया प्रदर्शन
शिक्षकों और विद्यार्थियों को पर्यावरण संरक्षण के साथ पारंपरिक हस्तकला अपनाने के लिए किया प्रेरित
एएम नाथ। चुवाड़ी : राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला होबार में पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के रचनात्मक उपयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक दिवसीय इको-क्राफ्टिंग कार्यशाला आयोजित की गई। पर्यावरण शिक्षा कार्यक्रम 2026-27 के अंतर्गत आयोजित इस कार्यशाला में शिक्षकों और युवाओं सहित 30 प्रतिभागियों तथा 120 विद्यार्थियों ने भाग लिया। कार्यशाला का आयोजन एकीकृत मिशन लाइफ परियोजनाओं के तहत किया गया।
यह कार्यक्रम भारत सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय तथा हिमाचल प्रदेश विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं पर्यावरण परिषद के प्रायोजन से आयोजित हुआ।
कार्यशाला का शुभारंभ विद्यालय के प्रधानाचार्य प्रवीण कुमार सिंह ने किया। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के लिए स्थानीय प्राकृतिक संसाधनों का सतत और जिम्मेदारी से उपयोग करना आवश्यक है। विद्यार्थियों को बचपन से ही पर्यावरण के प्रति जागरूक बनाना समय की जरूरत है। उन्होंने कार्यशाला में भाग लेने वाले शिक्षकों, विद्यार्थियों और विशेषज्ञों के प्रयासों की सराहना की।
कार्यशाला के दोनों सत्रों में विषय विशेषज्ञ डॉ. रूप लाल ने व्याख्यान और व्यावहारिक प्रस्तुतियों के माध्यम से मिशन लाइफ की विभिन्न परियोजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी गतिविधियों का चयन स्थानीय समस्याओं और उपलब्ध संसाधनों को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए। उन्होंने मृदा एवं अपशिष्ट प्रबंधन, जल और ऊर्जा संरक्षण, खाद्य संसाधनों के उचित उपयोग, जैव विविधता संरक्षण, पक्षियों के लिए घोंसले बनाने तथा इको-क्राफ्टिंग के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने विद्यार्थियों की ओर से तैयार की गई रचनात्मक वस्तुओं की भी सराहना की।
कार्यशाला का मुख्य आकर्षण स्थानीय हस्तकला विशेषज्ञ सावित्री देवी, करतार देवी और गुस्तो देवी की ओर से दिया गया व्यावहारिक प्रशिक्षण रहा। उन्होंने धमन वृक्ष से रस्सी, बांस से टोकरी, खजूर के पत्तों से चटाई और झाड़ू, पोचल से बिन्ना तथा धान की पराली से टोकरी बनाने की पारंपरिक विधियों का प्रदर्शन किया।
इससे विद्यार्थियों को स्थानीय हस्तकला और प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग से जुड़ी पारंपरिक तकनीकों को करीब से समझने का अवसर मिला।
विद्यालय की ईको क्लब प्रभारी संगीता ने कार्यशाला का संचालन एवं समन्वय किया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को स्थानीय संसाधनों के संरक्षण, पुनः उपयोग और रचनात्मक इस्तेमाल से जोड़ना पर्यावरण जागरूकता का प्रभावी माध्यम है। अंत में प्रतिभागियों को जलपान करवाने के साथ पुरस्कार वितरित किए गए। कार्यशाला ने विद्यार्थियों को पर्यावरण अनुकूल जीवनशैली अपनाने और पारंपरिक हस्तकला को संरक्षित करने का संदेश दिया।
