श्री गुरू रविदास जी के तपोस्थल खुरालगढ़ साहिब में गुरू रविदास की यादगार(मीनार-ए-बेगमुपरा) के निर्माण का काम सरकार दाुरा धीमी गति से फंडज जारी ना करने कारण लंवित

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सडक़ ही हालत बदतर, 117 करोड़ में से अभी तक साढ़े 46 करोड़ की राशि जारी होनी लंवित
गढ़शंकर: श्री गुरू रविदास जी के तपोस्थल खुरालगढ़ साहिब में गुरू रविदास की यादगार(मीनार-ए-बेगमुपरा) के निर्माण का काम सरकार दाुरा फंडज जारी करने में बार बार की जा रही देरी के चलते पांच वर्ष भी साठ प्रतिशत ही पूरा हुया। गुरू रविदास जी के प्रकाशोत्सव पर काग्रेस की पंजाब सरकार दुारा तीसरा प्रदेश स्तरीय प्रोग्राम आज करवाया जा रहा है। लेकिन तपोस्थल के लिए जाने वाली सडक़ की दुर्दशा सरकार और प्रशासन की इस प्रति उदासीनता साफ व्यां कर रही है। हालांकि एक बार फिर तीस जून तक मीनार-ए-बेगमपुरा के कार्य को पूरा करने की बात तीस जून सरकार के मंत्री व विधायक कह रहे है।  लेकिन अभी तक करीव साढ़े 46 करोड़ की राशि जारी नहीं की जा रही। अगर राशि पूरी दे भी दी जाए तो भी कम से कम एक वर्ष में तो काम पूरा होना असंभव है।
गुरू रविदास जी की यादगार के निर्माण कार्य की धीमी गति: श्री गुरू रविदास जी के तपोस्थल खुरालगढ़ साहिब में गुरू रविदास की यादगार बनाने के लिए तीन अप्रैल, 2016 में तत्तकालीन मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने नींव पत्थर रखा था और कहा था कि नवंबर तक इसका निर्माण कार्य पूरा का लोकार्पण कर दिया जाएगा। लेकिन 107 करोड़ के प्रौजकट के लिए मात्र 33 करोड़ की रािश जारी की लिहाजा निर्माण कार्य अभी अधूरा था कि विधानसभा चुनाव आ गए और सरकार काग्रेस की आ गई। जिसके बाद फंडज जारी ना होने के कारण निर्माण कार्य और धीमा हो गया। एक वर्ष बाद सरकार को याद आई तो गुरू रविदास जी के प्रकाशोत्सव पर 2018 में आयोजित राज्य स्तरीय समागम में वित मंत्री मनप्रीत सिंह बादल पुहंचे और एक वर्ष में निर्माण कार्य पूरा करने की घोषणा कर दी। फिर 2019 में कैबिनट मंत्री सुदंर शाम अरोड़ा राज्य स्तरीय आयोजित समागम में पुहंचे और कहा कि एक वर्ष में निर्माण का काम पूरा हो जाएगा लेकिन अभी तक काम लंवित पड़ा है और करीव साढ़े 48 करोड़ की राशि जारी नहीं हुई तो पांच करोड़ का कंपनी का भेजा बिल भी कलियर होने से लटका हुया है। जिसके चलते निर्माण कार्य का काम बहुत धीमा चल रहा। वित मंत्री मनप्रीत बादल दुारा गांव खुरालगढ़ के लिए दस लाख की विशेष ग्रांट और कैबिनट मंत्री सुंदर शाम अरोड़ा दुारा घोषित पांच लाख की ग्रांट भी नहीं पुहंची।
गुरू रविदास यादगार : 117 करोड़ की लगात से बनेगी। जिसमें 151 फीट का मीनार-ए-बेगमपुरा, गुरू रविदास जी के जीवन व उनके दुारा लिखी वाणी का दर्शाता मयुजियम, दस हजार श्रद्धालुओं के बैठने के लिए संगत हाल, दो हजार श्रद्धालुओं के बैठने का आधुनिक सुविधाओं से लैस आडोटोरियम, पंद्रह सौ कमरे की सराय, पूरी ईमारत के ऊपर पौदे, फबारे और तीन मंजिली पार्किग होगी।
तपोस्थल को जाने वाली सडक़ की हालत बदतर: तपोस्थल को जाने वाली गढ़ीमानसोवाल से ख्ुारालगढ़ की पहाड़ी से गुजरने वाली सडक़ की हालत बद से बदतर है और तीसरे राज्य स्तरीय समागम के आयोजन के बावजूद लोक निर्माण विभाग ने सडक़ पर पड़े गड्डों में मिट्टी डाल कर अपने फर्ज की इतिश्र कर दी। जिसके चलते हजारो की संख्यां में पहुंचने वाले श्रद्धांलुओं को भारी परेशानी का साहमना करना पड़ेगा।
तपोस्थ्ल का ईतिहास :1515 में  गुरू रविदास जी यहां पर 4 साल, 2 महीने व 11 दिन रहे और लाखों की संगत उन्हें नतमस्तक करने आने लगी तो यहां के राजा बैन को गुरू जी की बढ़ती महिमा की सूचना मिली तो राजा बैन को ईष्या होने लगी। जिस पर राजा बैन ने गुरू जी को उन्होंने सजा के तौर पर चक्की(घराट) चलाने की सजा सुना दी। जिसके बाद गुरू जी तो भक्ति में मगन थे और चक्की अपने आप चलने लगी। जिस पर राजा बैन को अपनी गल्ती का अहसास हुया और वह गुरू रविदास के चरनों में नतमस्तक हो गए और गुरू रविदास का मंदिर बनाया। यहां से कुछ ही दूरी खड्ड में गुरू रविदास ने पीने के पानी की किल्लत के चलते अंगूठे से पत्थर हटाया और वहां से पानी निकलने लगा। जिसे अव चरण छो गंगा कहते है। अव श्री गुरू रविदास जी के तपोस्थल पर व चरण छो गंगा में हर वर्ष लाखों श्रद्धालू देश विदेश से नतमसतक होने आते है।
श्री गुरू रविदास जी के तपोस्थल खुरालगढ़ साहिब की प्रबंधक कमेटी के प्रधान भाई केवल सिंह चाकर: गुरू रविदास जी की यादगार को तुरंत सरकार को पूरा करने के लिए पैडिंग राशि जारी करनी चाहिए और रोजाना आने वाली संगत के लिए पीने के पानी का टियूबवैल विशेष तौर पर लगाना चाहिए। अभी तक सिंचाई के नलकूप से पीने का पानी व अन्य कामों के लिए पानी ला रहे है। देश विदेश से लाखों श्रद्धालू यहां नतमसकत होने आते है तो सरकार को इस और विशेष ध्यान देकर चौड़ी सडक़े बनानी चाहिए व अन्य सुविधाओं का प्रबंध करने के लिए आगे आना चाहिए।

अलौकिक चक्की का हिस्सा जो गुरू जी के भक्ति में लीन होने पर अपने आप चलती थी

 

सडक़ की बदतर हालत जिस पर मिट्टी डाल कर भरे गड्डे
अनाज तोलने के बाट
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