हिमाचल प्रदेश को देश का पहला बाल मित्र राज्य बनाने की दिशा में कार्य करेंः डॉ. आनंद

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राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के सदस्य डॉ. आर जी आनंद ने की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता
ऊना :  हिमाचल प्रदेश को देश का पहला बाल मित्र बनाने का लक्ष्य रखा गया है तथा सभी को इस दिशा में कार्य करना चाहिए। यह बात आज राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के सदस्य डॉ. आर जी आनंद ने आज यहां एक प्रैस वार्ता में कही। उन्होंने कहा कि वह राज्य के 7 जिलों सोलन, शिमला, सिरमौर, कुल्लू, मंडी, बिलासपुर तथा हमीरपुर का दौरा करने के बाद ऊना पहुंचे हैं तथा ऊना में बाल अधिकारों के संरक्षण की दिशा में बेहतर कार्य किया गया है।
डॉ. आनंद ने कहा कि कोरोना महामारी के दौर में मानसिक रूप से प्रभावित हो रहे बच्चों की सहायता के लिए आयोग ने नई पहल आरंभ की है। प्रभावित बच्चों की काउंसलिंग के लिए आयोग ने ”संवेदना” नाम से टोल फ्री नंबर 18001212830 जारी किया है, जिस पर कॉल कर विशेषज्ञों से बात कर अपनी समस्या का समाधान पाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि इस टोल फ्री नंबर के माध्यम से सुबह 9 बजे से सायं 5 बजे सहायता प्राप्त की जा सकती है।
प्रैस वार्ता के बाद राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के सदस्य डॉ. आर जी आनंद ने सभी अधिकारियों के साथ बैठक की और जिला में बाल कल्याण के लिए किए जा रहे कार्यों, शिक्षा का अधिकार, बाल श्रम व स्वास्थ्य संबंधी कार्यों की समीक्षा कर आवश्यक दिशा निर्देश दिए। उन्होंने जिला में सभी पुलिस थानों में बाल मित्र कॉर्नर बनाने के निर्देश दिए। साथ ही बाल अधिकार संरक्षण गतिविधियों से जुड़ी रिपोर्टिंग के लिए उपयुक्त तंत्र विकसित करने पर जोर दिया। डॉ. आनंद ने कहा कि जिला ऊना में गुमशुदा बच्चों को ढूंढने की दिशा में पुलिस ने बेहतर कार्य किया है और गायब हुए बच्चों को ढूंढने की दर 96 प्रतिशत है, जो सराहनीय है। उन्होंने जिला प्रशासन को व्यापक अभियान चलाकर बच्चों में नशे की समस्या के पूर्ण उन्मूलन के लिए कार्य करने को कहा।
राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के सदस्य ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों को जिला के सभी प्राइवेट स्कूलों में शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) की पूरी अनुपालना सुनिश्चित बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि स्कूलों को पत्र लिख कर उनसे आरटीई लाभार्थियों की जानकारी मांगें और अवेहना करने वाले स्कूलों पर कार्रवाई करें। उन्होंने श्रम विभाग को बाल मजदूरी के मामलों में कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए और कहा कि किसी भी रेस्क्यू ऑपरेशन से पहले उपायुक्त की अनुमति अवश्य ली जानी चाहिए।
डॉ. आनंद ने कहा कि बाल कल्याण समिति प्रति माह जिला में बच्चों की स्थिति के संबंध में एक विस्तृत नोट जिलाधीश को दे, जिसमें बाल श्रम, बाल स्वास्थ्य, नशे की प्रवृति, बाल विवाह तथा उनके गुमशुदा होने के बारे में जानकारी हो। उन्होंने कहा कि बच्चों को गोद लेने की प्रक्रिया को आसान बनाया जा रहा है।
बैठक में उपायुक्त ऊना राघव शर्मा ने डॉ. आरजी आनंद का स्वागत करते हुए सभी निर्देशों की पूरा अनुपालना सुनिश्चित बनाने का विश्वास दिलाया। बैठक में पुलिस अधीक्षक अर्जित सेन ठाकुर ने बाल अधिकारों के संरक्षण के लिए पुलिस द्वारा उठाए गए कदमों से अवगत करवाया। बैठक में राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्षा वंदना कुमारी, महिला बाल विकास विभाग की संयुक्त सचिव भावना शर्मा सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं अन्य मौजूद रहे।
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