मुख्यमंत्री की पत्नी को देहरा से उमीदवार बनाने के बाद बगावत के स्वर तेज : डॉ. राजेश शर्मा ने कहा टिकट नहीं बदली तो निर्दलीय लड़ेंगे चुनाव

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एएम नाथ। देहरा :  मुख्यमंत्री की पत्नी को देहरा से कांग्रेस प्रत्याशी घोषित करने के बाद  देहरा में कांग्रेस में बगावत के स्वर तेज हो गए है। जिसके चलते हिमाचल कांग्रेस के कोषाध्यक्ष एवं 2022 के चुनाव में प्रत्याशी रहे डॉ. राजेश शर्मा ने कमलेश ठाकुर को टिकट देने का विरोध करते हुए कहा टिकट नहीं बदला तो निर्दलीय चुनाव लड़ेंने की ताल ठोकने की बात कह डाली है।  इस बार भी डॉ. राजेश शर्मा देहरा से टिकट के दावेदार थे।

राजेश शर्मा ने सुक्खू की पत्नी को टिकट मिलने के बाद बुधवार को देहरा में समर्थकों की बैठक बुलाई थी। इसमें राजेश ने कहा कि सुक्खू ने उन्हें मंगलवार को शिमला बुलाया था और मुख्यमंत्री आवास में बैठाए रखा।  इस दौरान उन्होंने कई आरोप लगाए और रो पड़े। उन्होंने कांग्रेस हाईकमान से देहरा के टिकट पर दोबारा विचार करने का आग्रह किया है। यदि ऐसा नहीं होता है तो वह निर्दलीय चुनाव लड़ेंगे।

बैठक के बाद बिगड़ गई राजेश की तबीयत  :   बैठक के बाद राजेश की तबीयत बिगड़ गई व उन्हें सिविल अस्पताल देहरा में दाखिल करवाया गया। डॉक्टरों के अनुसार डॉ. शर्मा को पैनिक अटैक आया था। शाम के समय उन्हें छुट्टी दे दी गई। पैनिक अटैक अक्सर तब होता है जब लोग जीवन में होने वाली किसी घटना को लेकर चिंतित होते हैं या किसी कठिन या तनावपूर्ण स्थिति का सामना करते हैं।  देहरा से भाजपा प्रत्याशी होशियार सिंह पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ उनका हाल जानने अस्पताल पहुंचे। संबोधन के दौरान राजेश कई बार भावुक हुए। उन्होंने कहा कि उनके पिता की मृत्यु हृदयाघात से हुई थी। मैं राजनीति में सेवा भाव से आया हूं। उन्होंने कहा कि पैसा कमाना मकसद नहीं है। इस दौरान उनकी पत्नी कोमल शर्मा भी मौजूद रही। संबोधन खत्म होने पर दोनों काफी देर तक एक-दूसरे के गले लगकर रोते रहे।

पत्नी को नहीं लड़ाना चाहता था चुनाव-   मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा है कि वह पत्नी कमलेश को चुनाव नहीं लड़ाना चाहते थे। पार्टी हाईकमान के जोर देने पर उन्हें देहरा से प्रत्याशी बनाया गया है। उन्होंने कहा कि हाईकमान ने लोकसभा चुनाव में भी कमलेश को उतारने के लिए कहा था, लेकिन उनकी ऐसी इच्छा नहीं थी।

इस बार फिर कहा गया तो वह इन्कार नहीं कर पाए क्यों प्रदेश के राजनीतिक परिदृश्य की भी आवश्यकता थी। पार्टी के सर्वेक्षण में भी कमलेश सबसे आगे थी। लेकिन वह परिवार से एक ही व्यक्ति के राजनीति में आने पर विश्वास करते हैं। देहरा में पार्टी को सशक्त प्रत्याशी चाहिए था।  मेरी पत्नी भी देहरा उपमंडल से हैं और उनके परिवार वाले भी वहीं रहते हैं। कई पंचायतों के प्रतिनिधियों ने भी कमलेश को चुनाव में उतारने की पैरवी की थी। मैंने पहले भी कहा था देहरा है मेरा और मेरी पत्नी मेरे प्रतिनिधि के रूप में यहां का प्रतिनिधित्व करेगी और क्षेत्र का विकास सुनिश्चित होगा।

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