नितिन नवीन को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने के बाद राज्यों में भी नई पीढ़ी को आगे लाने के संकेत; गुजरात में हर्ष सांघवी पर नजर
नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी (BJP) भविष्य की राजनीति में युवा नेतृत्व को आगे बढ़ाने की रणनीति पर काम करती नजर आ रही है। पार्टी नेतृत्व देश की नई पीढ़ी, खासकर युवाओं की आकांक्षाओं को ध्यान में रखते हुए आने वाले समय में सरकारों के नेतृत्व के लिए 60 वर्ष से कम उम्र के चेहरों को प्राथमिकता देने की तैयारी में बताया जा रहा है।
हालांकि, पार्टी की योजना में वरिष्ठ नेताओं की भूमिका पूरी तरह खत्म करने के बजाय उन्हें सरकार और संगठन में अनुभव के आधार पर महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां देने की भी संभावना है।
अगले साल सात राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं। इनमें पांच राज्यों में फिलहाल भाजपा की सरकार है। ऐसे में पार्टी की इस रणनीति का असर आगामी चुनावों और चुनाव के बाद बनने वाली सरकारों के नेतृत्व पर दिखाई दे सकता है।
देश में भाजपा के मौजूदा मुख्यमंत्रियों में अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू सबसे युवा हैं, जिनकी उम्र 47 वर्ष है। वहीं त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा 73 वर्ष की उम्र के साथ सबसे अधिक उम्र वाले भाजपा मुख्यमंत्रियों में हैं।
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और मणिपुर के मुख्यमंत्री वाय खेमचंद सिंह भी 60 वर्ष से अधिक उम्र के हैं।
नितिन नवीन को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाना बड़ा संकेत
भाजपा नेतृत्व की ओर से संगठन में नई पीढ़ी को आगे बढ़ाने का सबसे बड़ा संकेत नितिन नवीन को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाए जाने के रूप में देखा जा रहा है।
अब इसी तर्ज पर राज्यों में भी युवा चेहरों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां देने की संभावना जताई जा रही है। जेन-जी से जुड़े आंदोलनों और युवाओं की बदलती राजनीतिक अपेक्षाओं के बीच भाजपा अपनी रणनीति में युवा नेतृत्व को अधिक जगह दे सकती है।
हालांकि, पार्टी के सामने अलग-अलग राज्यों में स्थानीय राजनीतिक समीकरण और परिस्थितियां अलग हैं। ऐसे में कुछ राज्यों में मौजूदा नेतृत्व को बनाए रखने या वरिष्ठ नेताओं को प्राथमिकता देने जैसे अपवाद भी संभव हैं।
गुजरात में हर्ष सांघवी पर नजर
आगामी चुनावी राज्यों में गुजरात को इस रणनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष सांघवी को भाजपा के युवा नेतृत्व के संभावित चेहरों में देखा जा रहा है।
वहीं मणिपुर में राजनीतिक और सामाजिक परिस्थितियां अलग हैं। ऐसे में वहां नेतृत्व को लेकर पार्टी अलग रणनीति अपना सकती है।
हिमाचल और पंजाब में युवा चेहरे पर दांव?
हिमाचल प्रदेश और पंजाब में भाजपा फिलहाल सत्ता में नहीं है। दोनों राज्यों में आगामी विधानसभा चुनाव पार्टी के लिए महत्वपूर्ण हैं।
ऐसे में यह चर्चा भी तेज हो सकती है कि भाजपा इन राज्यों में संगठन को मजबूत करने के साथ-साथ युवा और नए चेहरों को आगे रखकर सत्ता परिवर्तन की रणनीति अपनाएगी।
विशेष रूप से पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए भाजपा संगठन को मजबूत करने और नए सामाजिक एवं राजनीतिक समीकरण तैयार करने में जुटी है। युवा नेतृत्व को प्राथमिकता देने की राष्ट्रीय रणनीति का असर पंजाब में भी दिखाई दे सकता है।
PM मोदी के जन्मदिन पर यूपी में महीनेभर चलेगा ‘सेवा संकल्प अभियान’
इस बीच भाजपा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर उत्तर प्रदेश में 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक ‘सेवा संकल्प अभियान’ चलाएगी।
पार्टी के प्रदेश मुख्यालय की ओर से जारी बयान के अनुसार इस दौरान प्रदेशभर में सेवा, जनकल्याण और सामाजिक सरोकारों से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
भाजपा ने इस अभियान को नरेंद्र मोदी के गुजरात के मुख्यमंत्री से लेकर प्रधानमंत्री बनने तक के 25 वर्षों के सार्वजनिक जीवन को समर्पित बताया है।
पार्टी के मुताबिक अभियान के जरिए सेवा, सुशासन, गरीब कल्याण और विकसित भारत के संकल्प को आम लोगों तक पहुंचाया जाएगा।
लखनऊ में हुई प्रदेश स्तरीय कार्यशाला
अभियान की तैयारियों को लेकर सोमवार को लखनऊ स्थित इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में प्रदेश स्तरीय कार्यशाला आयोजित की गई।
इसमें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, भाजपा की राष्ट्रीय महासचिव स्मृति ईरानी, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष एवं केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक तथा प्रदेश महामंत्री संगठन धर्मपाल सिंह शामिल हुए।
कार्यशाला में अभियान की रूपरेखा, कार्यक्रमों और संगठनात्मक तैयारियों को लेकर चर्चा की गई।
