IIT-NEET की महंगी कोचिंग का खेल खत्म : सरकारी स्कूल के छात्रों के लिए भगवंत मान सरकार का मास्टरप्लान तैयार

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चंडीगढ़ : पंजाब की भगवंत मान सरकार ने सरकारी स्कूलों के शिक्षा तंत्र में एक क्रांतिकारी बदलाव की शुरुआत की है। शिक्षा मंत्री स. हरजोत सिंह बैंस ने घोषणा की है कि ‘पेस’ (PACE) कार्यक्रम के तहत पंजाब के 1700 से अधिक होनहार विद्यार्थियों को आईआईटी (IIT), एनआईटी (NIT) और एम्स (AIIMS) जैसी देश की शीर्ष संस्थाओं में प्रवेश के लिए विशेष ‘विंटर रेज़िडेंशियल कोचिंग कैंप’ के माध्यम से निःशुल्क प्रशिक्षण दिया गया।

यह पहल उन मेधावी छात्रों के सपनों को पंख देने के लिए है, जो आर्थिक तंगी के कारण महंगी कोचिंग नहीं ले पाते थे। मान सरकार का यह मॉडल शिक्षा में समानता और उत्कृष्टता सुनिश्चित करते हुए सरकारी स्कूलों को देश के बेहतरीन करियर लॉन्चपैड के रूप में स्थापित कर रहा है।

1700+ विद्यार्थियों के लिए विशेष कोचिंग कैंप

पंजाब के तीन प्रमुख जिलों लुधियाना, बठिंडा और मोहाली में आयोजित इन शीतकालीन आवासीय कैंपों में कुल 1728 विद्यार्थियों ने भाग लिया। आंकड़ों के अनुसार, बठिंडा में 601, लुधियाना में 573 और मोहाली में 554 छात्रों को उच्च स्तरीय प्रशिक्षण मिला। विशेष बात यह है कि इन कैंपों में छात्राओं की भागीदारी छात्रों से अधिक रही, जो महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ा कदम है। शिक्षा मंत्री के अनुसार, यह कार्यक्रम छात्रों में आत्मविश्वास भरने और उन्हें वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करने का एक सशक्त माध्यम बना है।

देश की शीर्ष संस्थाओं के विशेषज्ञों का मार्गदर्शन

इन कोचिंग कैंपों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए पंजाब सरकार ने ‘फिजिक्सवाला’, ‘विद्या मंदिर’ और ‘अवंती फेलोज़’ जैसी नामी कोचिंग संस्थाओं के साथ साझेदारी की। विशेषज्ञों ने जेईई (JEE) और नीट (NEET) के नवीनतम पैटर्न के आधार पर फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी जैसे विषयों की जटिल अवधारणाओं को छात्रों को समझाया। पाठ्यक्रम का मुख्य केंद्र उन्नत समस्या-समाधान कौशल विकसित करना था। सरकारी स्कूलों के छात्रों को निजी कोचिंग जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराना मान सरकार की प्राथमिकता रही है, ताकि कोई भी प्रतिभा पीछे न रहे।

पारदर्शी चयन प्रक्रिया और समावेशी आरक्षण

कैंप के लिए विद्यार्थियों का चयन एक अत्यंत पारदर्शी और निष्पक्ष प्रक्रिया के माध्यम से किया गया। इसमें मॉक टेस्ट, अकादमिक निरंतरता और शिक्षकों की सिफारिशों को आधार बनाया गया। समावेशी दृष्टिकोण अपनाते हुए सरकार ने प्रत्येक केंद्र में 20 प्रतिशत सीटें ‘स्कूल ऑफ एमिनेंस’ के अलावा सामान्य सरकारी स्कूलों और ड्रॉप-ईयर अभ्यर्थियों के लिए आरक्षित रखीं। इससे दूर-दराज के गांवों और सामान्य स्कूलों में पढ़ने वाले मेधावी छात्रों को भी भारत की सर्वश्रेष्ठ शैक्षणिक संस्थाओं में प्रवेश पाने का समान अवसर प्राप्त हुआ है।

पढ़ाई के साथ मानसिक स्वास्थ्य पर भी जोर

केवल अकादमिक ज्ञान ही नहीं, बल्कि छात्रों की समग्र भलाई के लिए कैंपों में वन-टू-वन मेंटरिंग और स्ट्रेस मैनेजमेंट सत्र भी आयोजित किए गए। विशेषज्ञ काउंसलर्स ने छात्रों को प्रतियोगी परीक्षाओं के दबाव को झेलने और करियर मार्गदर्शन के गुर सिखाए। आवासीय केंद्रों पर सुरक्षित आवास, पौष्टिक भोजन और 24 घंटे चिकित्सा सहायता जैसी पुख्ता व्यवस्थाएं की गईं। यह सुखद वातावरण छात्रों को पूरी एकाग्रता के साथ अध्ययन करने में सहायक सिद्ध हुआ, जिससे उनकी सीखने की क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई।

सरकारी स्कूलों का शानदार प्रदर्शन और भविष्य

शिक्षा मंत्री स. हरजोत सिंह बैंस ने पिछले वर्ष के शानदार परिणामों का हवाला देते हुए बताया कि 265 सरकारी स्कूली छात्रों ने जेईई मेन्स और 847 ने नीट परीक्षा उत्तीर्ण की थी। इस बार के रेज़िडेंशियल कैंपों से उम्मीद है कि 11वीं और 12वीं कक्षा के परिणामों में और भी जबरदस्त सुधार देखने को मिलेगा। मान सरकार का लक्ष्य पंजाब को शिक्षा के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बनाना है, जहाँ गरीब से गरीब बच्चा भी डॉक्टर या इंजीनियर बनने का अपना सपना बिना किसी आर्थिक बाधा के पूरा कर सके।

 

 

 

 

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