PSIEC प्लॉट आवंटन घोटाले में ED की बड़ी कार्रवाई, 11 ठिकानों पर छापेमारी; ₹4.01 करोड़ फ्रीज, ₹12.15 लाख नकदी बरामद

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जालंधर/चंडीगढ़। पंजाब स्मॉल इंडस्ट्रीज एंड एक्सपोर्ट कॉरपोरेशन (PSIEC) में कथित औद्योगिक प्लॉट आवंटन घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) के जालंधर जोनल ऑफिस ने बड़ी कार्रवाई की है। एजेंसी ने पंजाब और चंडीगढ़ में 11 परिसरों पर तलाशी अभियान चलाया। कार्रवाई के दौरान ₹12.15 लाख की अघोषित नकदी, कई आपत्तिजनक दस्तावेज और डिजिटल उपकरण बरामद किए गए हैं। साथ ही PSIEC के दो सेवानिवृत्त अधिकारियों से जुड़े बैंक खातों में मौजूद करीब ₹4.01 करोड़ की राशि फ्रीज कर दी गई है।

तीन दिनों तक चला तलाशी अभियान

ED के अनुसार यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत 4, 5 और 6 अगस्त को की गई। चंडीगढ़, अमृतसर, गुरदासपुर और लुधियाना में स्थित 11 परिसरों पर एक साथ तलाशी ली गई। इसके अलावा एजेंसी की टीम ने PSIEC के मुख्य कार्यालय में सर्वे भी किया।

तलाशी के दौरान जांच एजेंसी को महत्वपूर्ण दस्तावेजों के साथ हार्ड डिस्क, पेन ड्राइव और मोबाइल फोन समेत विभिन्न डिजिटल उपकरण मिले हैं। इनसे मामले से जुड़े वित्तीय लेनदेन और अन्य गतिविधियों की जांच की जा रही है।

दो पूर्व अधिकारियों के खातों में ₹4.01 करोड़ फ्रीज

ED ने PSIEC के दो पूर्व अधिकारियों सुरिंदर पाल सिंह, सेवानिवृत्त मुख्य महाप्रबंधक (CGM), और जसविंदर सिंह रंधावा, सेवानिवृत्त महाप्रबंधक (GM) से जुड़े बैंक खातों में जमा लगभग ₹4.01 करोड़ की रकम फ्रीज की है। इसके अतिरिक्त तलाशी के दौरान ₹12.15 लाख की अघोषित नकदी भी बरामद की गई।

फर्जी फर्मों और पतों के जरिए प्लॉट आवंटन का आरोप

जांच एजेंसी के मुताबिक मामले में आरोप है कि औद्योगिक प्लॉट ऐसे लोगों और संस्थाओं को आवंटित किए गए, जिनके पास संबंधित उद्योग चलाने का अनुभव या वास्तविक गतिविधि नहीं थी। जांच में कथित तौर पर फर्जी फर्मों और काल्पनिक पतों के इस्तेमाल की बात भी सामने आई है।

ED को संदेह है कि कुछ प्लॉट कथित रूप से अधिकारियों से करीबी संबंध रखने वाले लोगों और संस्थाओं को आवंटित किए गए तथा बाद में उन्हें बाजार मूल्य पर तीसरे पक्ष को बेचकर आर्थिक लाभ कमाया गया। कुछ मामलों में औद्योगिक इस्तेमाल के लिए आवंटित प्लॉटों के आवासीय या व्यावसायिक इस्तेमाल की भी जांच की जा रही है।

रिश्वत और मनी ट्रेल की भी जांच

जांच एजेंसी कथित तौर पर यह पता लगाने में जुटी है कि प्लॉटों के आवंटन में रिश्वत का कोई लेनदेन हुआ था या नहीं और यदि हुआ तो उस रकम को किस तरह विभिन्न खातों अथवा संस्थाओं के जरिए आगे बढ़ाया गया।

ED की मनी लॉन्ड्रिंग जांच पंजाब विजिलेंस ब्यूरो द्वारा दर्ज उस FIR से जुड़ी है, जिसमें PSIEC अधिकारियों और निजी व्यक्तियों के खिलाफ भ्रष्टाचार और कथित अनियमितताओं के आरोप लगाए गए थे।

जांच अभी जारी

ED की ताजा कार्रवाई के बाद अब जांच का फोकस कथित प्लॉट आवंटन से जुड़े पूरे वित्तीय नेटवर्क, अधिकारियों की भूमिका, निजी लाभार्थियों और पैसों के लेनदेन पर है। एजेंसी द्वारा जब्त किए गए दस्तावेजों और डिजिटल उपकरणों की जांच के आधार पर आगे और कार्रवाई की संभावना है।

नोट: मामले में लगाए गए आरोप जांच के अधीन हैं। संबंधित आरोपियों के खिलाफ अंतिम निष्कर्ष सक्षम अदालत के निर्णय के बाद ही तय होगा।

 

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