अमृतपाल की याचिका पर हाइकोर्ट में सुनवाई स्थगित : अनुपस्थित MP’s की छुट्टी की समीक्षा के लिए पैनल गठित

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चंडीगढ़ : केंद्र सरकार ने पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट को सूचित किया है कि लोकसभा अध्यक्ष द्वारा 15 सदस्यीय समिति का गठन किया गया है जो संसद से अनुपस्थित रहने वाले सभी सांसदों की छुट्टी के आवेदनों की समीक्षा करेगी।
इस समिति की अध्यक्षता त्रिपुरा के पूर्व मुख्यमंत्री और राज्यसभा सांसद बिप्लब कुमार देब कर रहे हैं।

अमृतपाल सिंह की याचिका पर हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल सत्य पाल जैन और अधिवक्ता धीरज जैन ने मुख्य न्यायाधीश शील नागो और न्यायमूर्ति सुमीत गोयल की खंडपीठ को बताया कि यह समिति कल गठित की गई थी और यह सभी अनुपस्थित सांसदों के मामलों की समीक्षा करेगी।

इस बीच, अमृतपाल सिंह के वकील आर.एस. बैंस अदालत में उपस्थित नहीं हो सके और उन्होंने बहस के लिए समय मांगा। हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार के बयान को रिकॉर्ड में लेते हुए मामले की सुनवाई अगले सप्ताह तक स्थगित कर दी।

अमृतपाल सिंह की याचिका

खडूर साहिब से सांसद और वारिस पंजाब दे संगठन के प्रमुख अमृतपाल सिंह वर्तमान में राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत डिब्रूगढ़ सेंट्रल जेल में बंद हैं। अमृतपाल ने अपनी याचिका में संसद सत्र में शामिल होने की अनुमति मांगी है, यह तर्क देते हुए कि उनकी लंबी अनुपस्थिति उनके संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन करती है और उनके निर्वाचन क्षेत्र को प्रतिनिधित्व से वंचित कर रही है।

अमृतपाल ने अपनी याचिका में यह भी उल्लेख किया है कि यदि कोई सांसद लगातार 60 दिनों तक संसद में अनुपस्थित रहता है, तो उसकी सीट रिक्त घोषित की जा सकती है, जिससे खडूर साहिब के लगभग 19 लाख मतदाताओं पर प्रभाव पड़ेगा। इसके अलावा, उन्होंने सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना (MPLADS) के तहत विभिन्न विकास परियोजनाओं के लिए अधिकारियों और मंत्रियों से मिलने की अनुमति भी मांगी है।

अमृतपाल ने यह भी बताया कि उन्होंने 30 नवंबर 2023 को लोकसभा अध्यक्ष को संसद सत्र में भाग लेने की अनुमति के लिए आवेदन किया था, जिस पर उन्हें सूचित किया गया कि वह पहले ही 46 दिनों तक अनुपस्थित रह चुके हैं। इसके बाद उन्होंने डिप्टी कमिश्नर/जिला मजिस्ट्रेट को भी पत्र लिखा था, लेकिन उन्हें कोई जवाब नहीं मिला। इस कारण उन्होंने न्यायिक हस्तक्षेप की मांग की है।

लोकतांत्रिक प्रक्रिया के उल्लंघन का आरोप

अमृतपाल सिंह ने अपनी याचिका में तर्क दिया है कि उनकी गिरफ्तारी और उसके कारण उनकी अनुपस्थिति स्वैच्छिक नहीं है, बल्कि यह “अनिवार्य बहिष्करण” है, जो लोकतांत्रिक प्रक्रिया को बाधित करता है और उनके निर्वाचन क्षेत्र के लोगों के अधिकारों का हनन करता है। अब हाई कोर्ट इस मामले की अगली सुनवाई अगले सप्ताह करेगी।

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