एक देश-एक चुनाव – जेपीसी गठित, 31 सदस्यों की जेपीसी में अनुराग ठाकुर और प्रियंका गांधी का नाम शामिल

by
नई दिल्ली।  एक देश-एक चुनाव के लिए संयुक्‍त संसदीय कमेटी (जेपीसी) का गठन हो गया है. 31 सदस्यों की जेपीसी में अनुराग ठाकुर और प्रियंका गांधी जैसे सांसदों का नाम शामिल है. इस कमेटी की अध्यक्षता बीजेपी सांसद पी. पी. चौधरी करेंगे। वन नेशन वन इलेक्शन बिल को लोकसभा में स्वीकार कर लिया गया है. अब इसे संयुक्त संसदीय समिति  के पास भेज दिया गया है.
जेपीसी की सिफारिशें मिलने के बाद अब नरेंद्र मोदी सरकार की अगली चुनौती इसे संसद से पास कराने की होगी. चूंकि वन नेशन वन इलेक्शन से जुड़ा बिल संविधान संशोधन विधेयक है इसलिए लोकसभा और राज्यसभा में इस बिल को पास कराने के लिए विशेष बहमत की आवश्यकता होगी. अनुच्छेद 368 (2) के तहत संविधान संशोधनों के लिए विशेष बहुमत की आवश्यकता होती है. इसका अर्थ है कि प्रत्येक सदन में यानी कि लोकसभा और राज्यसभा में उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के दो-तिहाई बहुमत द्वारा इस विधेयक को मंजूरी देनी होगी.
जेपीसी में शामिल ये नाम  : 
1. पी.पी.चौधरी (BJP)
2. डॉ. सीएम रमेश (BJP)
3. बांसुरी स्वराज (BJP)
4. परषोत्तमभाई रूपाला (BJP)
5. अनुराग सिंह ठाकुर (BJP)
6. विष्णु दयाल राम (BJP)
7. भर्तृहरि महताब (BJP)
8. डॉ. संबित पात्रा (BJP)
9. अनिल बलूनी (BJP)
10. विष्णु दत्त शर्मा (BJP)
11. प्रियंका गांधी वाड्रा (कांग्रेस)
12. मनीष तिवारी (कांग्रेस)
13. सुखदेव भगत (कांग्रेस)
14. धर्मेन्द्र यादव (समाजवादी पार्टी)
15. कल्याण बनर्जी (TMC)
16. टी.एम. सेल्वागणपति (DMK)
17. जीएम हरीश बालयोगी (TDP)
18. सुप्रिया सुले (NCP-शरद गुट)
19. डॉ. श्रीकांत एकनाथ शिंदे (शिवसेना- शिंदे गुट)
20. चंदन चौहान (RLD)
21. बालाशोवरी वल्लभनेनी (जनसेना पार्टी)
क्या करेगी जेपीसी :   सरकार ने इस बिल को संयुक्त संसदीय समिति  के पास भेजा है. JPC का काम है इस पर व्यापक विचार-विमर्श करना, विभिन्न पक्षकारों और विशेषज्ञों से चर्चा करना और अपनी सिफारिशें सरकार को देना. वरिष्ठ अधिवक्ता संजय घोष कहते हैं, ‘JPC की जिम्मेदारी है कि वह व्यापक परामर्श करे और भारत के लोगों की राय को समझे.’
 बिल पर चर्चा क्यों हो रही :  यह बिल भारत के संघीय ढांचे, संविधान के मूल ढांचे, और लोकतंत्र के सिद्धांतों को लेकर बड़े पैमाने पर कानूनी और संवैधानिक बहस छेड़ चुका है. आलोचकों का कहना है कि राज्य विधानसभाओं के चुनाव लोकसभा के साथ कराने से राज्यों की स्वायत्तता पर असर पड़ेगा और सत्ता के केंद्रीकरण की स्थिति बनेगी. कानूनी विशेषज्ञ यह भी देख रहे हैं कि क्या यह प्रस्ताव संविधान की बुनियादी विशेषताओं, जैसे संघीय ढांचा और लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व, को प्रभावित करता है।
Share
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  

You may also like

article-image
समाचार , हिमाचल प्रदेश

पंचायती राज संस्थाओं व शहरी निकायों के सामान्य निर्वाचन वर्ष 2025-26 में होने सम्भावित – राज्य निर्वाचन आयुक्त

एएम नाथ। शिमला : अनिल कुमार खाची राज्य निर्वाचन आयुक्त हिमाचल प्रदेश की अध्यक्षता में जिला शिमला के प्रशासनिक अधिकारियों की बैठक हुईI इस बैठक में जिला के उपायुक्त अनुपम कश्यप, अतिरिक्त उपायुक्त अभिषेक...
article-image
हिमाचल प्रदेश

प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ा कदम : मुकेश रेपसवाल

घर की छत पर सोलर पैनल लगाने पर 40% तक सब्सिडी और 6% ब्याज दर पर ऋण सुविधा उपलब्ध : उपायुक्त उपायुक्त ने लोगों से योजना का अधिक से अधिक लाभ उठाने का किया...
article-image
हिमाचल प्रदेश

हिमाचल सरकार ने बढ़ाया 1 साल का कार्यकाल : डॉक्टर देवेंद्र की M.O के पद पर हुई तैनाती

एएम नाथ। चम्बा  :  मेडिकल कॉलेज चंबा में कार्यरत डॉक्टर देवेंद्र कुमार का हिमाचल सरकार ने रिटायरमेंट के बाद 1 साल के कार्यकाल को बढ़ाया है। मेडिकल कॉलेज चंबा में डॉक्टर देवेंद्र मेडिकल ऑफिसर...
article-image
पंजाब

A Seminar and a street

Hoshiarpur /Daljeet Ajnoha /Dec.31 :  Today on the occasion of last day of 2024, as per the instructions of Sh. Rakesh Kumar, Distt. Youth Officer, Nehru Yuva Kendra Hoshiarpur, to create awareness about the...
Translate »
error: Content is protected !!