एसजीपीसी सराय विवाद पर AAP का अकाली नेतृत्व से सवाल—15 दिन की जांच समिति क्यों?

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बलतेज पन्नू बोले- निष्पक्ष जांच चाहिए तो रिटायर्ड जज या पुलिस अधिकारी को शामिल किया जाए; महिला को सराय में रखने और एफआईआर को लेकर उठाए सवाल

चंडीगढ़। श्री आनंदपुर साहिब में एसजीपीसी की सराय से जुड़े विवाद और अमरजीत सिंह चावला व मलकीत सिंह के खिलाफ दर्ज एफआईआर को लेकर आम आदमी पार्टी (आप) पंजाब के मीडिया प्रभारी बलतेज पन्नू ने शिरोमणि अकाली दल (बादल) और एसजीपीसी अध्यक्ष हरजिंदर सिंह धामी पर सवाल उठाए हैं। पन्नू ने कहा कि एसजीपीसी को विवाद से जुड़े सभी सवालों का स्पष्ट जवाब देना चाहिए और जांच प्रक्रिया को लेकर पारदर्शिता सुनिश्चित करनी चाहिए।

15 दिन का समय क्यों? पन्नू ने समिति पर उठाए सवाल

बलतेज पन्नू ने कहा कि हरजिंदर सिंह धामी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करने के बजाय वीडियो के माध्यम से चार सदस्यीय समिति की घोषणा की है और समिति को रिपोर्ट देने के लिए 15 दिन का समय दिया गया है। पन्नू ने सवाल किया कि जांच के लिए 15 दिन का समय देने का आधार क्या है और क्या इस अवधि में विवाद से जुड़े सवालों का समाधान हो पाएगा।

उन्होंने कहा कि सिख बुद्धिजीवियों और विभिन्न सिख संगठनों की ओर से सवाल उठाए जा रहे हैं और एसजीपीसी को इनका जवाब देना चाहिए।

जांच समिति की संरचना पर भी सवाल

पन्नू ने समिति में शामिल सदस्यों की भूमिका और वरिष्ठ नेताओं से पूछताछ करने की क्षमता पर सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि यदि विवाद में वरिष्ठ अकाली नेताओं के नाम सामने आ रहे हैं तो क्या जूनियर स्तर के सदस्य उनसे पूछताछ कर पाएंगे।

उन्होंने समिति की कानूनी विशेषज्ञता को लेकर भी सवाल उठाते हुए कहा कि गंभीर मामले की निष्पक्ष जांच के लिए अनुभवी व्यक्तियों को शामिल किया जाना चाहिए।

रिटायर्ड जज या पुलिस अधिकारी को शामिल करने की मांग

पन्नू ने कहा कि यदि एसजीपीसी निष्पक्ष जांच करना चाहती है तो किसी सेवानिवृत्त सिख जज या सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारी, जिसे जांच और कानून का अनुभव हो, को समिति में शामिल किया जा सकता था। उन्होंने सवाल उठाया कि ऐसी व्यवस्था क्यों नहीं की गई।

सराय में महिला को ठहराने पर जवाब मांगा

आप नेता ने पूछा कि महिला को एसजीपीसी की सराय में लंबे समय तक रहने की अनुमति किन परिस्थितियों में दी गई। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि सरबजीत सिंह झिंझर और विरसा सिंह वल्टोहा की महिला को सराय तक लाने में क्या भूमिका थी और क्या जांच समिति इस पहलू की भी जांच करेगी।

महिला के चरित्र पर चर्चा से मुद्दा न भटकाने की अपील

पन्नू ने महिला के चरित्र से जुड़े मुद्दों को सामने लाने पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि विवाद का मुख्य सवाल यह है कि एसजीपीसी की सराय में क्या हुआ, महिला को वहां कौन लेकर आया, उसे वहां क्यों ठहराया गया और एसजीपीसी नेतृत्व को इस संबंध में क्या जानकारी थी। उनके अनुसार, जांच का केंद्र इन्हीं सवालों पर होना चाहिए।

सुखबीर, हरसिमरत और मजीठिया की चुप्पी पर सवाल

पन्नू ने वरिष्ठ अकाली नेताओं सुखबीर सिंह बादल, हरसिमरत कौर बादल और बिक्रम सिंह मजीठिया की सार्वजनिक प्रतिक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि इन नेताओं ने मामले पर खुलकर जवाब क्यों नहीं दिया।

पन्नू ने कांग्रेस और भाजपा नेताओं की चुप्पी पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि जो नेता अन्य राजनीतिक मुद्दों पर सक्रिय रूप से बयान देते हैं, वे इस विवाद पर सार्वजनिक रूप से सामने क्यों नहीं आ रहे।

एसजीपीसी चुनावों से विवाद को जोड़ने का दावा

आप नेता ने चार सदस्यीय समिति के एक सदस्य की पृष्ठभूमि को लेकर भी सवाल उठाया। उन्होंने दावा किया कि समिति के एक सदस्य का एसजीपीसी चुनावों से जुड़े मामले में हाईकोर्ट जाने से संबंध रहा है और वह हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधक समिति के निर्वाचित सदस्य भी हैं।

पन्नू ने सवाल किया कि क्या समिति का गठन करते समय संबंधित व्यक्ति की पृष्ठभूमि और संभावित हितों को ध्यान में रखा गया।

सिख संस्थाओं की साख से जुड़ा मामला बताया

बलतेज पन्नू ने कहा कि विवाद का असर सिख संस्थाओं की छवि और साख पर पड़ रहा है। उन्होंने एसजीपीसी सदस्यों और नेतृत्व से सार्वजनिक रूप से सवालों के जवाब देने की मांग की। उन्होंने कहा कि केवल समिति गठित करने के बजाय जांच की प्रक्रिया, दायरा और निष्कर्षों को लेकर भी स्पष्टता होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि सिख संगत और विभिन्न संगठनों की ओर से उठाए जा रहे सवालों का जवाब पारदर्शी तरीके से दिया जाना चाहिए।

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