एएम नाथ। मंडी। मंडी जिले में विकास कार्यों और केंद्र प्रायोजित योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर भाजपा सांसद कंगना रनौत और कांग्रेस नेता एवं लोक निर्माण विभाग मंत्री विक्रमादित्य सिंह के बीच जुबानी टकराव शुरू हो गया है। विवाद जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति (दिशा) की बैठक में लंबित विकास परियोजनाओं की समीक्षा के बाद सामने आया।
मंडी लोकसभा क्षेत्र की दिशा समिति की अध्यक्ष कंगना रनौत ने बैठक में अधिकारियों से लंबित परियोजनाओं को लेकर जवाब मांगा। उन्होंने कहा कि कई परियोजनाओं के लिए धनराशि स्वीकृत होने के बावजूद काम शुरू नहीं हो पाए हैं। अधिकारियों की ओर से जमीन अधिग्रहण, आवश्यक अनुमतियों और अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) को देरी का कारण बताए जाने पर सांसद ने नाराजगी जताई।
कंगना रनौत ने लंबित परियोजनाओं को जल्द पूरा करने पर जोर देते हुए संबंधित अधिकारियों को जवाबदेही सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने ऐसी परियोजनाओं की समीक्षा करने, जहां आवश्यक हो वहां धनराशि वापस लेने, जिम्मेदार लोगों पर जुर्माना लगाने और कथित अनियमितताओं या धोखाधड़ी में संलिप्त लोगों को ब्लैकलिस्ट करने के निर्देश भी दिए।
केंद्र की योजनाओं को लेकर सरकार पर लगाए आरोप
कंगना ने आरोप लगाया कि हिमाचल प्रदेश में केंद्र सरकार की योजनाओं के क्रियान्वयन में अपेक्षित तेजी नहीं दिखाई जा रही है। उन्होंने अधिकारियों से केंद्र से स्वीकृत धनराशि का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करने और विकास कार्यों को निर्धारित समयसीमा में पूरा करने को कहा।
सांसद के इन आरोपों के बाद मामला प्रशासनिक समीक्षा से आगे बढ़कर राजनीतिक बहस का मुद्दा बन गया।
विक्रमादित्य सिंह ने किया पलटवार
लोक निर्माण विभाग मंत्री एवं मंडी से कांग्रेस के पूर्व लोकसभा उम्मीदवार विक्रमादित्य सिंह ने कंगना रनौत के रवैये पर सवाल उठाते हुए पलटवार किया। उन्होंने कहा कि सरकारी अधिकारियों के कामकाज में कमियां हो सकती हैं और योजनाओं के क्रियान्वयन में देरी को दूर किया जाना चाहिए, लेकिन सभी अधिकारियों को एक ही नजर से देखना उचित नहीं है।
विक्रमादित्य सिंह ने कंगना की भाषा-शैली पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि उनके बोलने का तरीका पूरे देश में जाना जाता है। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक अधिकारियों को दबाव में लेने के बजाय समस्याओं के समाधान पर ध्यान दिया जाना चाहिए।
237 विकास कार्यों के लिए 5.12 करोड़ रुपये स्वीकृत
दिशा समिति की बैठक में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार मंडी जिले में 237 विकास कार्यों के लिए कुल 5.12 करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत हुई है। इनमें से 3.22 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। मंडी लोकसभा क्षेत्र में पूर्ण किए गए 74 विकास कार्यों में से 68 कार्य मंडी जिले से संबंधित बताए गए।
इन आंकड़ों के आधार पर विकास योजनाओं की प्रगति और शेष कार्यों को समय पर पूरा करने को लेकर भी समीक्षा की गई।
आरएसएस से जुड़े शैक्षणिक मॉडल पर भी मतभेद
बैठक के बाद ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में शिक्षा व्यवस्था को लेकर भी दोनों नेताओं के बीच मतभेद सामने आए। कंगना रनौत ने भाजपा की सरकार बनने की स्थिति में ग्रामीण क्षेत्रों में आरएसएस से जुड़े शैक्षणिक मॉडल को बढ़ावा देने की बात कही।
वहीं, विक्रमादित्य सिंह ने इसका विरोध करते हुए कहा कि स्कूलों और शिक्षा संस्थानों को राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र नहीं बनाया जाना चाहिए। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था को राजनीतिक विचारधाराओं से अलग रखते हुए विद्यार्थियों के हित और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर ध्यान देने की जरूरत बताई।
मंडी में विकास कार्यों, प्रशासनिक जवाबदेही और शिक्षा व्यवस्था को लेकर कंगना रनौत तथा विक्रमादित्य सिंह के बीच सामने आया यह टकराव आने वाले समय में प्रदेश की राजनीति में और तेज होने के संकेत दे रहा है।
