खेती, बागवानी और पशुपालन अर्थव्यवस्था की रीढ़: बलवीर चौधरी

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ऊना 20 सितंबर: चौधरी सरवण कुमार हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय अनुसंधान केन्द्र अकरोट में एक उर्वरक जागरुकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसमें चिंतपुर्णी के विधायक बलवीर चौधरी ने बतौर मुख्यातिथि शिरकत की। कार्यक्रम में आसपास के क्षेत्र के लगभग 300 किसानों ने भाग लिया। किसानों को सम्बोधित करते हुए बलवीर चौधरी ने कहा कि खेती, बागवानी और पशुपालन अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। उन्होंने कहा कि करोना महामारी ने विश्व में सभी आर्थिक गतिविधियों को प्रभावित किया लेकिन मेहनती कृषक समुदाय ने खेती के प्रमुख महत्व को महामारी के दौरान भी किसी तरह से भी प्रभावित नहीं होने दिया। उन्होंने कहा कि हिमाचल सरकार ने कृषि को रोज़गारोन्मुख बनाने के लिए कई प्रोत्सहनवर्धक योजनाएं आरंभ की हैं और किसानों को इस तरह के प्रोत्साहनों का लाभ अवश्य उठाना चाहिए। उन्होंने अकरोट अनुसंधान केन्द्र को सुदृढ़ीकरण पर खुशी जाहिर की तथा किसानों को नई कृषि तकनीक के बारे में शिक्षित करने के लिए विश्वविद्यालय के प्रयासों को सराहा। उन्होंने वैज्ञानिक खेती के महत्व पर भी अपने विचार सांझा किये और उम्मीद जताई कि विश्वविद्यालय ऊना के अन्य क्षेत्रों में भी नियमित तौर पर ऐसे कार्यक्रमों का आयोजित करेगा।
उर्वरक का संतुलित उपयोग बेहतरीन फसल के लिए महत्वपूर्ण
इस अवसर पर कुलपति सीएसके हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय अनुसंधान केन्द्र अकरोट प्रो. एचके चौधरी ने कहा कि उर्वरक का संतुलित उपयोग बेहतरीन उत्पादन के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि पूरे राज्य को जैविक और प्राकृतिक खेती में बदलना संभव नहीं है, लेकिन खेत की खाद के साथ उर्वरकों का संतुलित उपयोग मिट्टी के स्वस्थ स्वास्थ्य के लिए आवश्यक घटक है।
प्रो. चौधरी ने कहा राज्य में जिला ऊना कृषि, पशुपालन, आदि में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने कहा कि किसान लाभकारी मूल्य प्राप्त करने के लिए कुछ फसलों में जैविक और प्राकृतिक खेती को अपना सकते हैं। उन्होंने किसानों को अपने खेत, फसल, उर्वरक और पशुपालन इत्यादि कृषि व इसके संबद्ध विषयों की समस्याओं के निदान के लिए प्रदेश में स्थापित विश्वविद्यालय कृषि विज्ञान केंद्रों और अनुसंधान स्टेशनों के संपर्क में रहने का सुझाव दिया।
प्रो. चौधरी ने किसानों से अपने बच्चों को विश्वविद्यालय में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के लिए कहा। उन्होंने कृषि में स्टार्टअप, युवा किसानों में उद्यमिता का विकास, एकीकृत खेती, नकदी फसलों का उत्पादन तथा स्थानीय उत्पादों का के प्रचार-प्रसार के महत्व पर भी किसानों को टिप्स दिये। उन्होंने बताया कि आवश्यक स्टाफ के साथ अकरोट में अनुसंधान केंद्र को और मजबूत किया जाएगा।
कार्यक्रम मंे अनुसंधान निदेशक डीके वत्स, वेटरनरी कॉलेज डीन डॉ. मंदीप शर्मा, कृषि कॉलेज डीन डॉ. आर.के. कटारिया, एसोसिएट डायरेक्टर डॉ. वी.के.शर्मा, और कुछ विभागाध्यक्षों व वैज्ञानिकों ने भी प्रतिभागियों को संबोधित किया। अनुसंधान स्टेशन प्रभारी डॉ बिपन शर्मा, और कृषि विज्ञान केंद्र ऊना के कार्यक्रम समन्वयक डॉ. योगिता शर्मा ने अपने स्टेशनों की गतिविधियों की विस्तृत जानकारी दी।
इस मौके पर प्रश्नोत्तर सत्र का भी आयोजन किया गया जिसमें विभागाध्यक्षों और अन्य वैज्ञानिकों ने किसानों के विभिन्न सवालों के जवाब दिए।
कार्यक्रम में विकास विभागों के कुछ जिला स्तरीय अधिकारियों के अलावा प्रगतिशील किसान कुलदीप धीमान, देवेंद्र लाठ, होशियार सिंह, नियामत अली, राजपाल शर्मा, सुखजीत सिंह राणा आदि भी मौजूद रहेे।

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