चंडीगढ़ से सांसद मनीष तिवारी ने शहर के भूले-बिसरे परिवारों के लिए मुफ्त बिजली और पानी की मांग की

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पंजाब के राज्यपाल और यूटी प्रशासक को लिखे पत्र में तिवारी ने चंडीगढ़ के शहरी गरीब और निम्न मध्यम वर्ग के लिए सुनिश्चित राहत की मांग की

तिवारी ने 20,000 रुपये से कम मासिक आय वाले परिवारों को 300 यूनिट बिजली और 20,000 लीटर पानी मुफ्त देने की मांग की

चंडीगढ़, 10 मई: पंजाब के राज्यपाल और केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया को लिखी एक विचारपूर्ण अपील में पूर्व केंद्रीय मंत्री और चंडीगढ़ से सांसद मनीष तिवारी ने शहर के शहरी गरीब और निम्न मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए लक्षित कल्याणकारी योजनाएं लागू करने की मांग की है। चार पन्नों के विस्तृत पत्र (कॉपी संलग्न) में तिवाड़ी ने इन वर्गों के सामने मौजूद गंभीर आर्थिक चुनौतियों को उजागर करते हुए, ऐसी नीतियां लागू करने की मांग की है, जो बुनियादी जीवन में सस्ती सुविधाएं और सम्मान सुनिश्चित कर सकें। तिवारी की प्रमुख मांग यह है कि प्रशासन 20,000 रुपये से कम मासिक आय वाले परिवारों को हर महीने 300 यूनिट मुफ्त बिजली और 20,000 लीटर मुफ्त पानी उपलब्ध करवाए, ताकि वे सम्मान और आत्मसम्मान के साथ जीवन जी सकें।

तिवारी ने संसाधनों के पुनर्वितरण की संभावना पर जोर देते हुए, अपने पत्र में कहा कि कुछ प्रमुख क्षेत्रों में सरकारी खर्च कम हुआ है और उस बचत को जनहितकारी लाभों, जैसे सब्सिडी वाली आवश्यक सेवाओं की ओर मोड़ा जा सकता है। दिल्ली और पंजाब में अपनाई गई नीतियों का हवाला देते हुए, उन्होंने कहा कि इस तरह के कदम आर्थिक रूप से टिकाऊ और सामाजिक रूप से प्रभावशाली साबित हो सकते हैं। तिवारी ने शहरी गरीब और निम्न मध्यम वर्ग की गरिमा, समानता और सहायता सुनिश्चित करने के लिए तत्काल कदम उठाने की आवश्यकता पर बल दिया।

तिवारी ने शहर के गरीब और निम्न मध्यम वर्गीय परिवारों के सामने बढ़ती आर्थिक परेशानियों पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने अपने पत्र में लिखा कि पिछले 23 महीनों के दौरान चंडीगढ़ के शहरी गांवों और पुनर्वास कॉलोनियों के दौरों के दौरान उन्होंने लोगों को महंगाई और बढ़ती जीवनयापन लागत से जूझते देखा है। उन्होंने कहा कि कई परिवार राहत और पुनर्वास कॉलोनियों में अपने छोटे फ्लैटों की लीज राशि या लाइसेंस फीस चुकाने में भी असमर्थ हैं, जिसके कारण उन्हें रद्दीकरण नोटिस और भारी ब्याज की मांग का सामना करना पड़ रहा है।

तिवारी ने कहा कि परिस्थितियां तत्काल हस्तक्षेप की मांग करती हैं और प्रशासन को लक्षित राहत उपाय लागू करने चाहिए, जो प्रभावित परिवारों को सहारा और सम्मान प्रदान कर सकें। उन्होंने कहा कि वह प्रशासन से आग्रह करते हैं कि 20,000 रुपये से कम मासिक आय वाले परिवारों को हर महीने 300 यूनिट मुफ्त बिजली और 20,000 लीटर मुफ्त पानी दिया जाए। यह कदम शहरी गरीब और निम्न मध्यम वर्ग की गरिमा और आत्मसम्मान बनाए रखने के लिए जरूरी हैं।

इस अवसर पर अपने पत्र में बजट के विस्तृत आंकड़े देते हुए, तिवारी ने कहा कि यदि केंद्रीय बजट 2026-27 में गृह मंत्रालय की डिमांड नंबर 53 के तहत चंडीगढ़ के वार्षिक बजट को ध्यान से देखा जाए तो इस प्रस्ताव को लागू करने के लिए पर्याप्त वित्तीय गुंजाइश मौजूद है। वित्त वर्ष 2024-25 में चंडीगढ़ का वास्तविक खर्च 6,598.19 करोड़ रुपये था और शुद्ध खर्च 5,858.93 करोड़ रुपये रहा। बिजली और नवीकरणीय ऊर्जा पर कुल खर्च 1,027.87 करोड़ रुपये था।

तिवारी ने खुलासा किया कि वित्त वर्ष 2025-26 के केंद्रीय बजट अनुमानों के अनुसार चंडीगढ़ का कुल बजट 6,983.18 करोड़ रुपये और शुद्ध बजट 6,187.48 करोड़ रुपये था, जिसमें से 917.87 करोड़ रुपये बिजली और नवीकरणीय ऊर्जा के लिए निर्धारित किए गए थे। उन्होंने कहा कि 1 फरवरी, 2025 को चंडीगढ़ में बिजली वितरण का निजीकरण किया गया और चंडीगढ़ पॉवर डिस्ट्रीब्यूशन लिमिटेड ने इंजीनियरिंग विभाग के इलेक्ट्रिसिटी विंग से संचालन संभाल लिया। उन्होंने बताया कि 2025-26 के संशोधित अनुमानों में कुल खर्च 6,466.97 करोड़ रुपये और शुद्ध खर्च 5,556.42 करोड़ रुपये रहा, जबकि बिजली और नवीकरणीय ऊर्जा पर खर्च घटकर 279.82 करोड़ रुपये रह गया। वहीं वर्तमान वित्त वर्ष 2026-27 के लिए कुल मांग 6,545.52 करोड़ रुपये और शुद्ध मांग 5,720.17 करोड़ रुपये है, जिसमें बिजली और नवीकरणीय ऊर्जा के लिए केवल 171.86 करोड़ रुपये का प्रावधान है।

तिवारी ने कहा कि वित्त वर्ष 2024-25 के वास्तविक खर्च और 2026-27 के अनुमानों के बीच बिजली और नवीकरणीय ऊर्जा पर खर्च में 856.01 करोड़ रुपये की कमी आई है। उन्होंने कहा कि यही वह वित्तीय गुंजाइश है, जिसका उपयोग प्रशासन को 20,000 रुपये से कम मासिक आय वाले परिवारों को 300 यूनिट मुफ्त बिजली देने के लिए करना चाहिए। तिवारी ने सुझाव दिया कि प्रशासन को सप्लीमेंट्री डिमांड्स फॉर ग्रांट्स में 856 से 1000 करोड़ रुपये की मांग करनी चाहिए, ताकि मुफ्त बिजली आपूर्ति के बदले सीपीडीएल को भुगतान किया जा सके। उन्होंने कहा कि यदि प्रशासन राजनीतिक इच्छाशक्ति और गरीबों के प्रति संवेदनशीलता दिखाए तो यह योजना 1 जुलाई, 2026 से लागू की जा सकती है।

तिवारी ने कहा कि पंजाब, जिस पर 31 मार्च 2027 तक 4.47 लाख करोड़ रुपये का कर्ज होने का अनुमान है और जिसका कर्ज-जीडीपी अनुपात 46.65 प्रतिशत है, फिर भी अपने निवासियों को मुफ्त बिजली दे रहा है। उन्होंने कहा कि चंडीगढ़ एक केंद्र शासित प्रदेश और पंजाब-हरियाणा की संयुक्त राजधानी होने के कारण इस तरह की वित्तीय बाधाओं का सामना नहीं करता, क्योंकि इसके फंड सीधे केंद्र सरकार से आते हैं। इस पृष्ठभूमि में उन्होंने तर्क दिया कि चंडीगढ़ केंद्र से केवल उतनी ही राशि की मांग करेगा, जितनी वित्त वर्ष 2024-25 तक बिजली और नवीकरणीय ऊर्जा पर पहले से खर्च की जा रही थी।

तिवारी ने जोर देते हुए, कहा कि वैचारिक दृष्टिकोण से भी एनडीए/भाजपा सरकार को चंडीगढ़ के लिए यह अतिरिक्त फंड जारी करने में कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए, क्योंकि केंद्र सरकार इस समय 4,510 से अधिक केंद्रीय और राज्य स्तरीय जनकल्याण योजनाएं चला रही है, जिनमें 260 केंद्रीय सेक्टर योजनाएं और 54 केंद्र प्रायोजित योजनाएं शामिल हैं।

इस दौरान राष्ट्रीय कल्याणकारी योजनाओं का हवाला देते हुए, तिवारी ने कहा कि प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के तहत 81.5 करोड़ लोगों को मुफ्त राशन दिया जा रहा है, जबकि पीएम किसान के तहत 9.32 करोड़ किसानों को सालाना 6,000 रुपये दिए जाते हैं। इसी तरह मनरेगा के लिए 86,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है और 2024-25 में 7.88 करोड़ लोगों को रोजगार मिला। उन्होंने सवाल किया कि जब ग्रामीण गरीबों के लिए इस तरह की योजनाएं चलाई जा सकती हैं, तो चंडीगढ़ के शहरी गरीबों को ऐसी सहायता क्यों नहीं मिल सकती। जबकि 20,000 लीटर मुफ्त पानी के मुद्दे पर तिवाड़ी ने याद दिलाया कि 11 मार्च 2024 को चंडीगढ़ नगर निगम के जनरल हाउस में कांग्रेस और आप पार्षदों ने बहुमत से शहरवासियों को मुफ्त पानी देने का प्रस्ताव पारित किया था।

उन्होंने कहा कि लोकसभा चुनाव में वह इंडिया गठबंधन के उम्मीदवार के रूप में जीते थे, लेकिन तत्कालीन प्रशासक बनवारी लाल पुरोहित ने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया था। हालांकि 10 जुलाई 2024 को जनरल हाउस ने दोबारा इस प्रस्ताव को मंजूरी दी। उन्होंने कहा कि नगर निगम अधिनियम के तहत आवश्यक प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया था, क्योंकि जनरल हाउस को न तो कारण बताओ नोटिस दिया गया, न ही उसकी सुनवाई की गई और न ही प्रस्ताव खारिज करने से पहले कोई परामर्श किया गया। तिवाड़ी ने कहा कि मुफ्त पानी देने का प्रस्ताव आज भी वैध है, लेकिन दुर्भाग्यवश पिछले लगातार दो कार्यकालों से भाजपा महापौरों के नेतृत्व वाली नगर निगम ने इसे लागू नहीं किया।

इस दौरान अपने तर्क को और मजबूत करते हुए, तिवारी ने आंकड़े पेश किए, जिनसे स्पष्ट होता है कि 20,000 लीटर मुफ्त पानी उपलब्ध करवाना न केवल संभव है बल्कि आर्थिक रूप से भी काफी सस्ता है। उन्होंने कहा कि 30 मार्च 2024 तक चंडीगढ़ के सभी निवासियों को मुफ्त पानी देने की कुल लागत लगभग 39.65 करोड़ रुपये आंकी गई थी, जो कांग्रेस और आप द्वारा संयुक्त रूप से जारी आंकड़ों पर आधारित थी। यदि यह लाभ केवल 20,000 रुपये या उससे कम मासिक आय वाले परिवारों तक सीमित रखा जाए तो इसकी लागत उस राशि का केवल चौथाई हिस्सा होगी, जिसे नगर निगम अपने फंड से आसानी से वहन कर सकता है।

तिवारी ने इस छोटी आवश्यकता की तुलना पहले से किए जा चुके फिजूलखर्ची से की। उन्होंने कहा कि असफल 24×7 मनीमाजरा जल आपूर्ति परियोजना पर लगभग 166 करोड़ रुपये बर्बाद कर दिए गए, जिसकी वर्तमान में सीएंडएजी द्वारा परफॉर्मेंस ऑडिट की जा रही है। इसके अलावा 17 दिसंबर 2022 को पूरे शहर के 24×7 जल परियोजना के लिए एएफडी से ऋण प्रतिबद्धता के माध्यम से लगभग 510 करोड़ रुपये की अतिरिक्त वित्तीय देनदारी भी ली गई। इस शृंखला में, उन्होंने कहा कि समाज के गरीब और कमजोर वर्गों को मुफ्त पानी उपलब्ध कराने के लिए 15 से 20 करोड़ रुपये का प्रबंध करना कोई बड़ी बात नहीं है और नगर निगम इसे आसानी से संभाल सकता है, बशर्ते चंडीगढ़ प्रशासन अपने गलत वीटो अधिकार का इस्तेमाल न करे।

अंत में तिवारी ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि इस मामले में मुझे आपका सीधा जवाब मिलेगा, क्योंकि यह चंडीगढ़ की उस अदृश्य आबादी से जुड़ा मुद्दा है, जो अपने पसीने, मेहनत और आंसुओं से शहर के पहियों को चलाती है।

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