जनजातीय क्षेत्रों की अनदेखी नहीं चलेगी : डॉ. जनकराज

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विधानसभा में गूंजा LADA फंड का मुद्दा, विधायक डॉ. जनकराज ने उठाई पारदर्शिता और समयबद्ध खर्च की मांग

डॉ. जनकराज ने LADA राशि के उपयोग में देरी पर सरकार को घेरा

एएम नाथ। चम्बा : हिमाचल प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के दौरान भरमौर विधानसभा क्षेत्र के विधायक डॉ. जनकराज ने LADA (लोकल एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी) राशि के उपयोग और वितरण को लेकर महत्वपूर्ण मुद्दा उठाया। उन्होंने सदन में इस विषय पर चर्चा करते हुए कहा कि जनजातीय और दूरदराज क्षेत्रों के विकास के लिए निर्धारित यह राशि अपने उद्देश्य के अनुरूप प्रभावी ढंग से खर्च नहीं हो पा रही है, जिससे स्थानीय जनता को अपेक्षित लाभ नहीं मिल रहा है।
डॉ. जनकराज ने सरकार का ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि LADA के तहत मिलने वाली धनराशि का समय पर आवंटन और उसका पारदर्शी उपयोग सुनिश्चित किया जाना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने आरोप लगाया कि कई क्षेत्रों में इस राशि के उपयोग में अनावश्यक देरी हो रही है, जबकि कुछ मामलों में प्राथमिकता के आधार पर कार्यों का चयन भी ठीक से नहीं किया जा रहा। इससे विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं और लोगों में असंतोष बढ़ रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि भरमौर जैसे जनजातीय क्षेत्र में आधारभूत सुविधाओं की अभी भी कमी है, और LADA फंड इन कमियों को दूर करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम हो सकता है। लेकिन यदि इस राशि का सही तरीके से उपयोग नहीं किया गया, तो इसका उद्देश्य ही अधूरा रह जाएगा। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि इस दिशा में स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं ताकि विकास कार्यों को गति मिल सके।
विधायक ने सुझाव दिया कि LADA फंड के उपयोग की निगरानी के लिए एक प्रभावी तंत्र विकसित किया जाए और इसमें जनप्रतिनिधियों की भूमिका को भी मजबूत किया जाए। इसके साथ ही उन्होंने यह मांग भी रखी कि योजनाओं की स्वीकृति और क्रियान्वयन प्रक्रिया को सरल और समयबद्ध बनाया जाए, ताकि स्थानीय स्तर पर विकास कार्यों में तेजी लाई जा सके।
डॉ. जनकराज ने कहा कि सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि LADA राशि का उपयोग पूरी पारदर्शिता के साथ हो और इसका सीधा लाभ आम जनता तक पहुंचे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि इस दिशा में सुधार नहीं किया गया, तो वे इस मुद्दे को आगे भी मजबूती से उठाते रहेंगे।
सदन में इस मुद्दे के उठने के बाद सरकार की ओर से आश्वासन दिया गया कि LADA फंड के उपयोग को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। अब देखना होगा कि सरकार इस दिशा में कितनी गंभीरता से काम करती है और क्या भरमौर सहित अन्य क्षेत्रों को इसका वास्तविक लाभ मिल पाता है।

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