डेजी ठाकुर ने राहुल गांधी से मांगा जवाब, कांग्रेस सांसद के खिलाफ कार्रवाई की उठाई मांग
शिमला। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में 11 छात्राओं की ओर से लगाए गए कथित यौन उत्पीड़न के आरोपों को लेकर हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में सियासी घमासान तेज हो गया है। शनिवार को भाजपा महिला मोर्चा ने कांग्रेस मुख्यालय राजीव भवन के बाहर धरना-प्रदर्शन कर कांग्रेस के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। प्रदर्शनकारियों ने महिला सुरक्षा का मुद्दा उठाते हुए कांग्रेस नेतृत्व से जवाब मांगा और संबंधित सांसद के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
भाजपा महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष डेजी ठाकुर ने कांग्रेस सांसद एवं जेएनयू के पूर्व प्रोफेसर डॉ. अंगोमचा बिमोल अकोइजाम से जुड़े मामले को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने राहुल गांधी से सवाल किया कि महिलाओं के अधिकारों की बात करने वाली कांग्रेस ऐसे गंभीर आरोपों पर क्या रुख अपना रही है। उन्होंने मांग की कि मामले में जवाबदेही तय करते हुए संबंधित सांसद के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाए।
11 छात्राओं की शिकायतों से जुड़ा है मामला
मामला जेएनयू की 11 छात्राओं की ओर से लगाए गए कथित यौन उत्पीड़न के आरोपों से संबंधित है। छात्राओं ने दावा किया था कि उन्होंने मई 2026 में विश्वविद्यालय की कुलपति को शिकायत दी थी, लेकिन उनकी शिकायतों पर उचित कार्रवाई नहीं हुई। शिकायतों में कथित तौर पर वाइवा के अंक देने के बहाने और अन्य तरीकों से अनुचित लाभ मांगने के आरोप भी लगाए गए।
मामले में विश्वविद्यालय की आंतरिक समिति ने जांच की। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, जांच के बाद डॉ. अकोइजाम के खिलाफ प्रोफेसर के पद से बर्खास्तगी की कार्रवाई की गई। दिल्ली महिला आयोग ने भी विश्वविद्यालय प्रशासन से जांच रिपोर्ट मांगी थी।
महिला सुरक्षा के मुद्दे पर कांग्रेस को घेरने की रणनीति
भाजपा महिला मोर्चा ने इस मामले को महिला सुरक्षा और छात्राओं को न्याय दिलाने से जोड़ते हुए कांग्रेस नेतृत्व की जवाबदेही पर सवाल उठाए। प्रदर्शन के जरिए भाजपा ने कांग्रेस को राजनीतिक रूप से घेरने की कोशिश की। पार्टी का कहना है कि छात्राओं की शिकायतों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए और मामले में उचित कार्रवाई सुनिश्चित होनी चाहिए।
डॉ. अकोइजाम 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर मणिपुर की इनर मणिपुर सीट से सांसद चुने गए थे। हालांकि, विश्वविद्यालय की विभागीय कार्रवाई और आपराधिक मामले में अदालत द्वारा दोषसिद्धि अलग-अलग कानूनी प्रक्रियाएं हैं। विश्वविद्यालय से बर्खास्तगी के आधार पर सांसद की सदस्यता भी स्वतः समाप्त नहीं होती।
