ट्वीट डिलीट करेंगे राहुल गांधी, कोर्ट को दी जानकारी : नाबालिग की पहचान उजागर करने वाला

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नई दिल्ली : दिल्ली के कैंट इलाके में नाबालिग रेप पीड़िता की पहचान उजागर करने के मामला में कांग्रेस नेता राहुल गांधी की ओर से दिल्ली हाई कोर्ट को बताया गया कि वह 2021 में कथित रूप से बलात्कार की शिकार एक नाबालिग की पहचान का खुलासा करने वाला अपना ट्वीट हटा देंगे। राहुल गांधी के वकील ने दिल्ली हाई कोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश मनमोहन की अध्यक्षता वाली खंडपीठ के सामने एक मौखिक वचन दिया, जब कोर्ट ने कहा कि वह राहुल गांधी को ट्वीट हटाने का निर्देश देने वाला न्यायिक आदेश पारित नहीं करना चाहती है।                             दिल्ली पुलिस के वकील ने कोर्ट को बताया कि नाबालिग पीड़िता की मौत बिजली का झटका लगने से हुई। कोई वैज्ञानिक सबूत नहीं है कि यह बलात्कार और हत्या का मामला हो। कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को निर्देश दिया कि वह मामले में एक सीलबंद लिफाफे में एक सटीक और विस्तृत स्थिति रिपोर्ट दाखिल करे, जिसमें 4 सप्ताह के भीतर राहुल गांधी की जांच की वर्तमान स्थिति का संकेत दिया जाए।

आपको बता दें कि 2021 में दिल्ली के छावनी क्षेत्र में एक श्मशान के अंदर एक पुजारी पर 9 साल की लड़की के साथ कथित तौर पर बलात्कार कर हत्या करने का आरोप लगा था। राहुल गांधी ने बाद में पीड़िता के परिवार से मुलाकात की और ट्विटर पर एक तस्वीर पोस्ट की जिससे नाबालिग की पहचान उजागर हो गई थी।

राहुल गांधी ने नाबालिग की तस्वीर किया था शेयर :  इसके पहले दिल्ली उच्च न्यायालय ने पुलिस को एक नाबालिग बलात्कार और हत्या पीड़िता के माता-पिता के साथ अपनी तस्वीर माइक्रोब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा करने के लिए कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग वाली याचिका पर अपना जवाब देने के लिए 10 दिन का समय दिया था।

राहुल गांधी ने 4 अगस्त, 2021 को नौ वर्षीय लड़की के माता-पिता से मुलाकात की थी। इसके बाद उन्होंने एक्स, पहले ट्विटर पर पीड़िता के माता-पिता के साथ अपनी एक तस्वीर साझा की थी। पोस्ट को 6 अगस्त को माइक्रोब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म द्वारा हटा दिया गया था।

सामाजिक कार्यकर्ता होने का दावा करने वाले मकरंद सुरेश म्हादलेकर ने उसी महीने कांग्रेस नेता के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू करने की मांग करते हुए उच्च न्यायालय का रुख किया था।

कोर्ट में कहा-तस्वीर कर देंगे डिलीट

याचिका में कहा गया था कि राहुल गांधी की पोस्ट किशोर न्याय अधिनियम, 2015 की धारा 74 और यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण अधिनियम (POCSO) 2012 की धारा 23 (2) का उल्लंघन है, जिनमें से दोनों में नाबालिग की पहचान अनिवार्य है। पीड़ित का खुलासा नहीं किया जाना चाहिए था।उस समय राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) के वकील ने कहा था कि यौन अपराधों के नाबालिग पीड़ितों की पहचान की रक्षा करने वाले कानून में कोई अपवाद नहीं है और पुलिस को एफआईआर दर्ज करनी चाहिए और परिणामी कार्रवाई करनी चाहिए।कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश मनमोहन और न्यायमूर्ति मिनी पुष्करणा की खंडपीठ ने दिल्ली पुलिस को 10 दिन में जवाब दाखिल करने को कहा था। इसने मामले को 21 दिसंबर को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया। उसी मामले की गुरुवार की सुनवाई हुई, जिसमें राहुल गांधी के वकील ने कोर्ट को यह जानकारी दी।

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