तीन और टोल प्लाज़े नंगल शहीदां, मानगढ़ और मजारी टोल मुख्यमंत्री ने करवाए बंद : लोगों की जेबें कंपनी को लुटाने के लिए सुखबीर बादल, प्रताप बाजवा और परमिन्दर ढींडसा से माँगा जवाब

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होशियारपुर : 15 फरवरीः आम लोगों को बड़ी राहत देते हुए पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने आज राज्य के तीन और टोल प्लाज़े बंद करवाने के मौके पर अकाली-भाजपा गठजोड़ और कांग्रेस पार्टियों की सरकारों की टोल कंपनियों के साथ मिलीभुगत का पर्दाफाश किया।
आज यहाँ मजारी (नवांशहर), नंगल शहीदां और मानढ़ (होशियापुर) टोल प्लाज़े बंद करवाने के बाद पत्रकारों के साथ बातचीत करते हुये मुख्यमंत्री ने कहा कि यह तीनों टोल बंद होने से लोगों के रोज़मर्रा के 10.52 लाख रुपए बचेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि समझौते के मुताबिक यह टोल 10 साल पहले बंद होने चाहिए थे परन्तु मौके की सरकारों ने टोल कंपनी पर मेहरबान होते हुये उल्टा कंपनी के खजाने भरने में पूरी मदद की।
मुख्यमंत्री ने कहा, “यह पंजाब की बदकिसमती है कि हमारे राजनीतिज्ञों ने अपने ही लोगों के साथ वफ़ा नहीं की। पिछले समय में कांग्रेस और अकाली-भाजपा गठजोड़ की सरकारों ने अपने लोगों के हित सोचने की बजाय राज्य के खजाने दोनों हाथों लुटाया। इसकी स्पष्ट मिसाल इस प्रोजैक्ट से मिलती है कि कैसे सुखबीर सिंह बादल, विरोधी पक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा जो समझौते करने के मौके पर कांग्रेस सरकार में लोक निर्माण मंत्री थे और अकाली सरकार के लोक निर्माण मंत्री परमिन्दर सिंह ढींडसा छिप कर कंपनी के साथ मिलीभुगत करके लोगों की जेबों पर डाका मारते रहे।‘ राज नहीं सेवा’ का ढिंडोरा पीटने वाले कंपनी की सेवा में लगे रहे। इन नेताओं को लोगों के सामने स्पष्ट करना चाहिए कि उन्होंने पंजाब निवासियों के साथ धोख क्यों किया।“
इस प्रोजैक्ट के पृष्टभूमि के बारे विस्तार में जानकारी देते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि 123.64 करोड़ रुपए के इस प्रोजैक्ट के अंतर्गत रोहन राजदीप टोलवेअज़ कंपनी ने 104. 96 किलोमीटर सड़क बनानी थी और इस संबंधी कैप्टन अमरिन्दर सिंह की सरकार के समय 6 दिसंबर, 2005 में समझौता हुआ और उस समय पर प्रताप सिंह बाजवा लोक निर्माण मंत्री थे। उस मौके पर कैप्टन सरकार ने कंपनी पर मेहरबान होते हुये 123.64 करोड़ रुपए के कुल प्रोजैक्ट में से 49.45 करोड़ रुपए की सब्सिडी दी थी। कंपनी ने साल 2007 में नयी सरकार के गठन से पहले 6 मार्च, 2007 को यह तीनों ही टोल चालू कर दिए थे। समझौते के अंतर्गत कंपनी ने 5 मार्च, 2013 तक सड़क पर कोलतार डालने का काम पूरा करना था परन्तु यह काम 30 अप्रैल, 2015 को पूरा किया गया जो 786 दिन लेट था। इस देरी के लिए कंपनी पर 24.30 करोड़ जुर्माना और 37.30 करोड़ रुपए ब्याज समेत कुल 61.60 करोड़ रुपए का जुर्माना वसूल किया जा सकता था परन्तु उस समय की अकाली-भाजपा गठजोड़ सरकार ने जुर्माना वसूलने की बजाय माफ कर दिया जो पंजाब के लोगों को शरेआम धोखा देने वाला कदम था। दूसरी बार कोलतार डालने का काम 5 मार्च, 2018 को पूरा होना था जो 979 दिनों की देरी के साथ 9 नवंबर, 2020 को पूरा हुआ परन्तु कैप्टन अमरिन्दर सिंह की सरकार ने इस देरी के लिए नोटिस तक भी जारी न किया। इसके बाद तीसरी बार कोलतार डालने का काम जनवरी, 2023 तक पूरा होना था परन्तु वह भी पूरा नहीं हुआ। मुख्यमंत्री ने बताया कि टोल कंपनी ने हमारी सरकार से कोविड के समय के 101 दिन और किसान आंदोलन की आड़ में 432 दिनों का हवाला देते हुए 533 दिनों की मोहलत माँगी थी और हमने इस माँग को शुरू से निकार दिया।
मुख्यमंत्री ने बताया कि यह तीनों टोल 21 सितम्बर, 2013 तक बंद हो जाने चाहिए थे परन्तु अकाली सरकार ने बंद नहीं किये। इससे 21 सितम्बर, 2018 को फिर बंद किये जा सकते थे परन्तु कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने पंजाब निवासियों के हितों के उलट जाते हुए कंपनी को टोल चालू रखने की छूट दी। यदि आज भी अकालियों या कांग्रेस की सरकार होती तो यह टोल कभी भी बंद न होते। विरोधी पार्टियों के निजी फायदों का ज़िक्र करते हुए भगवंत मान ने कहा कि इन पार्टियों के साथ कंपनी की सांझ इतनी गहरी थी कि समझौतां के क्लॉज में स्पष्ट दर्ज कर दिया गया उल्लंघन होने की सूरत में कंपनी को 6.12 करोड़ रुपए से अधिक जुर्माना नहीं किया जा सकता। उन्होंने बताया कि हमारी सरकार उल्लंघन करने पर कंपनी के खि़लाफ़ कानूनी कार्यवाही की जायेगी और समझौते के नियमों की धज्जियाँ उड़ाने के लिए कारण बताओ नोटिस भी जारी किया जायेगा। इस मौके पर कैबिनेट मंत्री ब्रम शंकर जिम्पा और हरभजन सिंह ई. टी. ओ. और विधान सभा के डिप्टी स्पीकर जय कृष्ण रोड़ी भी उपस्थित थे।

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