पंचायत चुनाव पर प्रदेश को बार-बार क्यों गुमराह कर रहे मुख्यमंत्री : जय राम ठाकुर

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पंचायत चुनाव न करवा कर ग्रामीण और शहरी निकायों का बहुत नुकसान कर रहे हैं मुख्यमंत्री

स्थानी निकायों के चुनाव रोक कर केंद्रीय मदद के रास्ते बंद कर रही है सुक्खू सरकार

सदन से लेकर सड़क तक समय पर चुनाव करवाने के मुख्यमंत्री के वादे का क्या हुआ

एएम नाथ। शिमला : पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि पंचायत चुनाव को लेकर सरकार आखिरकार खुलकर सामने आ ही गई। अगर सरकार को समय पर चुनाव नहीं करवाने थे और हाई कोर्ट के आदेशों को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देनी ही थी तो सरकार चुनाव की तैयारी का स्वांग क्यों रच रही थी? मुख्यमंत्री एक तरफ माननीय न्यायालय के फैसले पर अवांछनीय टिप्पणी करके निर्वाचन सूची के प्रकाशन के निर्देश की खबरें क्यों छपवा रहे थे? जब भारतीय जनता पार्टी चुनाव में सरकार द्वारा की जा रही देरी पर सवाल उठा रही थी तो मुख्यमंत्री और उनके मंत्री क्यों कह रहे थे कि समय पर चुनाव होंगे? आखिर सरकार और उसके मुखिया किस हद तक, कहां-कहां झूठ बोलेंगे? अपनी पाताल में चली गई लोकप्रियता के चलते सरकार ने बहुत पहले ही ठान लिया था कि उसे पंचायत चुनाव नहीं करवाने हैं। इसीलिए बार-बार राज्य निर्वाचन आयोग के निर्देशों की अवहेलना की जा रही थी उनके द्वारा दिए जा रहे पत्रों पर न तो कोई कार्रवाई की जा रही थी और न ही उचित जवाब दिया जा रहा था। यह सरकार पूर्णतया दिशाहीन और किंकर्तव्यविमूढ़ है।
पूरे देश में लोकतंत्र और संविधान की दुहाई देने वाली कांग्रेस पार्टी की सरकार लोकतंत्र और संविधान की धज्जियां उड़ा रही है और महात्मा गांधी के ग्राम स्वराज सपनों को कुचल रही है। सरकार पंचायत चुनावों को इतने हल्के में क्यों ले रही है, यह समझ नहीं आ रहा है। एक तरफ सरकार केंद्र द्वारा सहयोग न किए जाने का रोना रोती है और दूसरी तरफ केंद्र द्वारा दिए जा रहे भरपूर सहयोग को प्राप्त करने के रास्ते बंद कर रही। यदि लोगों द्वारा निर्वाचित स्थानीय निकाय नहीं होगा तो उसका विकास कैसे होगा? केंद्र द्वारा चलाई जा रही है सैकड़ों योजनाओं का क्रियान्वयन कैसे किया जाएगा? बिना निर्वाचित प्रतिनिधियों के केंद्र की योजनाएं जमीन पर कैसे पहुंचेंगी क्योंकि ज्यादातर योजना में निर्वाचित स्थानीय निकायों का होना बहुत जरूरी है। यदि सरकार इन चुनाव को साल यह 6 महीने और खींच लेगी तो प्रदेश को केंद्र द्वारा दी जा रही तमाम योजनाओं के पैसे नहीं मिलेंगे या देर से मिलेंगे। इस नुकसान की भरपाई कैसे होगी। 16वें वित्त आयोग में देश भर के शहरी और ग्रामीण निकायों हेतु जो लगभग 8 लाख करोड़ रुपए की धनराशि का प्रावधान किया गया है बिना निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के इसका लाभ कैसे मिलेगा? चुनाव के बिना स्थानीय निकायों का विकास रुक जाएगा। सरकार किसी नाकामी की वजह से मनरेगा प्रदेश में मनरेगा के 1.72 लाख प्रोजेक्ट अटके पड़े हैं और 655 पंचायतों में मनरेगा के तहत एक भी व्यक्ति को एक दिन का भी रोजगार नहीं मिला है।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि 9 जनवरी को माननीय उच्च न्यायालय ने 30 अप्रैल तक चुनाव संपन्न करवाने के आदेश दिए थे। तब से सरकार चुनाव करवाने के बजाय चुनाव न करवाने की रणनीति पर काम कर र हीथी। बार-बार डेडलाइन खत्म होने के बाद भी निर्वाचन सूची का प्रकाशन नहीं कर रही थी। साथ ही साथ प्रदेश को गुमराह भी कर रही थी। मुख्यमंत्री ने अपनी मंशा तो न्यायालय के आदेश पर सवालिया निशान लगाते हुए की हुई टिप्पणी से पहले ही जाहिर कर दी थी। सरकार पंचायत चुनाव करवाने में होने वाले खर्च पर दुहाई देती है लेकिन चुनाव न करवाने के लिए मुकदमे लड़ने पर करोड़ों रुपए खर्च करती है। सरकार आपदा प्रबंधन कानून थोप कर प्रदेश में चुनाव रोकना चाहती है लेकिन सबसे ज्यादा आपदा प्रभावित क्षेत्र में जाकर अपने 3 साल का जश्न मनाने के लिए आपदा राहत के लिए केंद्र सरकार द्वारा भेजे गए करोड़ों रुपए खर्च करती है। सरकार आपदा से हुए नुकसान के नाम पर पंचायत चुनाव रोकने की पैरवी भी करती है लेकिन आपदा प्रभावित क्षेत्रों में क्षतिग्रस्त सुविधाओं को बहाल करने के लिए कोई कदम नहीं उठाती है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को यह बताना चाहिए कि आपदा प्रबंधन कानून लागू होने के बाद उन्होंने प्रदेश की आपदा राहत क्षेत्र में आपदा राहत की समीक्षा करने के लिए कितने दौरे किए हैं?

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