पंजाब में अन्य सरकारी विश्वविद्यालयों में भी लोकतांत्रिक प्रणाली शुरू हो :सूद
होशियारपुर /दलजीत अज्नोहा पूर्व कैबिनेट मंत्री व वरिष्ठ भाजपा नेता तीक्ष्ण सूद द्वारा जारी प्रेस नोट में भारत सरकार द्वारा पंजाब विश्वविद्यालय सीनेट व सिंडीकेट को भंग करके कुल सदस्यों व चुने हुए सदस्यों की संख्या में भारी कमी कर दी गई थी व विश्वविद्यालय के वाईस चांसलर को बहुत सी नियुक्तियों के अधिकार दे दिए गए थे। जिसके कारण विवाद पैदा हो गया था व छात्र संगठन व अन्य राजनीतिक दल इस के विरोध में खड़े हो गए थे। उल्लेखनीय हैं कि भाजपा पंजाब की इकाई जो पहले भी हर मुद्दे पर मजबूती से पंजाब के हित्तों के साथ खड़ी रहती हैं, उसमें भी माननीय प्रधानमंत्री, केंद्र के गृह मंत्री तथा शिक्षा मंत्री को अपनी भावनाए व्यक्त करते हुए कह दिया था कि ऐसी अलोकतांत्रिक अधिसूचना को वापस लिया जाए , क्योंकि यह पंजाब के हितों के अनुरूप नहीं थी। श्री सूद ने कहा कि केंद्र सरकार ने हमारी मांग को सहानुभूतिपूर्वक स्वीकार करते हुए अधिसूचना वापस ली हैं, परन्तु आम आदमी पार्टी जो इस अधिसूचना से राजनीतिक लाभ लेने के लिए छटपटाती नजर आ रही थी , उसकी कारगुजारी की समीक्षा की जाए तो पता चलेगा पंजाब विश्वविद्यालय की सीनेट में पंजाब के मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री तथा दो नाममित विधायक जो आधिकारिक तौर पर सदस्य होते हैं वह पिछले 4 साल से किसी भी बैठक में शामिल ही नहीं हुए। पंजाब सरकार द्वारा विश्वविद्यालय को दी जाने वाली ग्रांट के हिस्से में जो काफी कटौती कर दी हैं। केंद्र की अधिसूचना पर उंगली उठाने वाले पंजाब के मुख्यमंत्री को अपने गिरेबान में भी झांक कर देखना चाहिए क्या पंजाब में भी पंजाबी यूनिवर्सिटी, श्री गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी, पी.टी.यू व बाबा फरीद यूनिवर्सिटी जैसी अन्य यूनिवर्सिटीयां पंजाब सरकार द्वारा चलाई जा रही हैं, उन में भी कहीं भी लोकतांत्रिक व्यवस्था हैं या नहीं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा संचालित सभी विश्वविद्यालयों पंजाब विश्वविद्यालय की तर्ज पर विद्यार्थी तथा अध्यापकों में से सीनेट व सिंडिकेट में निर्वाचित सदस्य नियुक्त करे ताकि उन विश्वविद्यालयों के संचालन में भी लोकतांत्रिक प्रक्रिया शुरू हो सके ।
