परविंदर झोटा हत्याकांड: सीबीआई ने संभाली जांच : पंजाब में नशे और कानून-व्यवस्था पर फिर छिड़ी बहस

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मान सरकार ने परिवार की मांग पर जांच केंद्रीय एजेंसी को सौंपने का किया था ऐलान; अमित शाह के दौरे और विपक्ष के सवालों के बीच मामला राजनीतिक चर्चा के केंद्र में

चंडीगढ़, 21 अक्टूबर। पंजाब के मानसा में नशा विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की हत्या का मामला राज्य की राजनीति में लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने 20 अक्टूबर को परिवार की मांग स्वीकार करते हुए मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपने की घोषणा की थी। बुधवार को सीबीआई ने मामले में प्राथमिकी दर्ज कर जांच औपचारिक रूप से अपने हाथ में ले ली।

कौन थे परविंदर सिंह झोटा?

परविंदर सिंह झोटा मानसा क्षेत्र में नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले कार्यकर्ता के रूप में पहचाने जाते थे। वह मेडिकल स्टोरों पर कथित तौर पर नशीली दवाओं की अवैध बिक्री के खिलाफ सवाल उठाते थे और सोशल मीडिया पर लाइव वीडियो के जरिए अपनी गतिविधियां साझा करते थे।

13 अक्टूबर को मानसा के एक मेडिकल स्टोर में दुकानदार के साथ विवाद के दौरान उन्हें गोली मार दी गई थी। इस घटना में उनकी मौत हो गई। घटना के बाद परिवार और समर्थकों ने निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए विरोध प्रदर्शन किया। परिवार ने सीबीआई जांच की मांग के साथ अन्य मांगें भी उठाईं।

परिवार की मांग पर सीबीआई जांच

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने मंगलवार को सोशल मीडिया पर घोषणा की कि झोटा हत्याकांड की जांच सीबीआई को सौंपी जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार नशे के खिलाफ लड़ाई जारी रखेगी और परिवार की मांग स्वीकार की जा रही है।

यह घोषणा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के झोटा के परिवार से मिलने के निर्धारित कार्यक्रम से कुछ घंटे पहले हुई थी। परिवार और विपक्षी दल पहले से ही केंद्रीय एजेंसी से जांच कराने की मांग कर रहे थे। बुधवार को सीबीआई की ओर से प्राथमिकी दर्ज किए जाने के बाद मामले की जांच का अगला चरण शुरू हो गया है।

नशे और कानून-व्यवस्था पर उठे सवाल

झोटा की हत्या ने पंजाब में नशे की समस्या और कानून-व्यवस्था को लेकर चल रही बहस को फिर तेज कर दिया है। आम आदमी पार्टी सरकार नशे के खिलाफ अभियान चलाने और तस्करी पर कार्रवाई करने की बात कहती रही है। वहीं, विपक्षी दल इस घटना को लेकर सरकार की नीतियों और पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं।

इस मामले में जांच से जुड़े कई सवालों के जवाब सीबीआई की पड़ताल के बाद ही स्पष्ट हो सकेंगे। इनमें हत्या की परिस्थितियां, घटना से पहले हुए विवाद और पुलिस की कार्रवाई से संबंधित पहलू शामिल हैं। आरोपों और दावों की पुष्टि जांच के निष्कर्षों के आधार पर ही हो सकेगी।

आगामी विधानसभा चुनाव में मुद्दा बन सकता है मामला

पंजाब में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले नशा और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों पर राजनीतिक बहस तेज रहने की संभावना है। झोटा हत्याकांड को विपक्षी दल सरकार से जवाब मांगने के लिए उठा रहे हैं, जबकि सरकार ने परिवार की मांग पर सीबीआई जांच का फैसला किया है।

हालांकि, इस एक घटना का चुनावी नतीजों पर कितना असर पड़ेगा, इसका आकलन अभी करना जल्दबाजी होगी। इसका राजनीतिक प्रभाव जन प्रतिक्रिया, जांच में सामने आने वाले तथ्यों और विभिन्न दलों की आगे की रणनीति पर निर्भर करेगा। फिलहाल, मामले में सबकी नजर सीबीआई जांच और परिवार को न्याय मिलने की दिशा में होने वाली कार्रवाई पर है।

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