जनविरोधी नीतियों को लेकर सड़कों पर उतरे लोग
मूलभूत सुविधाओं की बदहाली पर उठी आवाज
एएम नाथ। भरमौर : भरमौर में शुक्रवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और स्थानीय लोगों ने प्रदेश की सुक्खू सरकार की कथित जनविरोधी नीतियों के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। इस विरोध प्रदर्शन में बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया और सरकार के प्रति अपनी नाराजगी खुलकर व्यक्त की। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि वर्तमान नीतियां आम जनता के हितों के विपरीत हैं, जिससे क्षेत्र के लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
भरमौर के विधायक डॉ. जनक राज ने कहा कि सरकार द्वारा लिए जा रहे फैसले जनहित में नहीं हैं और इनका सीधा असर आम जनता पर पड़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि किसान, युवा, कर्मचारी और अन्य वर्ग इन नीतियों से प्रभावित हो रहे हैं और उन्हें रोजमर्रा की समस्याओं से जूझना पड़ रहा है।
प्रदर्शनकारियों ने भरमौर के मुख्य बाजार से रैली निकाली। इस दौरान उनके हाथों में झंडे और तख्तियां थीं, जिन पर सरकार विरोधी नारे लिखे गए थे। रैली के दौरान पूरे क्षेत्र में जोरदार नारेबाजी की गई और सरकार से जनसमस्याओं के समाधान की मांग की गई। प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा, लेकिन लोगों का आक्रोश साफ तौर पर दिखाई दे रहा था।
सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने क्षेत्र की बुनियादी समस्याओं को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि भरमौर में सड़क, बिजली और पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाओं की स्थिति बेहद खराब है, जिससे आम जनजीवन प्रभावित हो रहा है। इसके अलावा स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर भी लोगों ने नाराजगी जताई और कहा कि अस्पतालों में पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं, जिसके कारण मरीजों को समय पर उपचार नहीं मिल पाता।
शिक्षा व्यवस्था में गिरावट को लेकर भी प्रदर्शनकारियों ने चिंता व्यक्त की। उनका कहना था कि शिक्षा के स्तर में गिरावट आने से आने वाली पीढ़ी का भविष्य प्रभावित हो रहा है। साथ ही स्थानीय लोगों ने यह आरोप भी लगाया कि क्षेत्र की लगातार अनदेखी की जा रही है और विकास कार्यों में भेदभाव बरता जा रहा है।
प्रदर्शनकारियों ने सरकार से मांग की कि सभी क्षेत्रों के साथ समान व्यवहार किया जाए और लंबित विकास कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों को जल्द पूरा नहीं किया गया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
प्रदर्शन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ और अंत में प्रशासन के माध्यम से सरकार को ज्ञापन भेजने का निर्णय लिया गया।
