कांग्रेस और आप को छोड़कर समान विचारधारा वाले दलों से गठजोड़ के दिए संकेत; बोले- मुख्यमंत्री भगवंत मान धूरी से हार जाएंगे चुनाव
चंडीगढ़। । पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। शिरोमणि अकाली दल (शिअद) के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने भाजपा के साथ संभावित गठबंधन की अटकलों पर फिलहाल कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया है। सोमवार को इस संबंध में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि वह कोई पंडित नहीं हैं, लेकिन कुछ ही दिनों में स्थिति स्पष्ट हो जाएगी। उनके इस बयान के बाद दोनों पुराने सहयोगी दलों के फिर से साथ आने की चर्चाओं को और बल मिला है।
सुखबीर बादल ने कहा कि कांग्रेस और आम आदमी पार्टी (आप) को छोड़कर अकाली दल उन राजनीतिक दलों के साथ गठबंधन करने के लिए तैयार है, जिनकी विचारधारा पार्टी से मेल खाती है और जो पंजाब के हितों के लिए काम करना चाहते हैं। उन्होंने कांग्रेस और आप पर निशाना साधते हुए दोनों को पंजाब के हितों के खिलाफ बताया। हालांकि, उन्होंने भाजपा का नाम लेकर गठबंधन की पुष्टि नहीं की।
भाजपा के साथ गठबंधन की अटकलें उस समय तेज हुई थीं, जब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पिछले महीने दिल्ली में एक कार्यक्रम के दौरान दावा किया था कि 2027 में पंजाब में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की सरकार बनेगी। इसके बाद अकाली दल और भाजपा के दोबारा साथ आने की संभावनाओं पर चर्चा शुरू हो गई। वहीं, पंजाब भाजपा के कई नेता आगामी चुनाव में सभी 117 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी की बात कह चुके हैं।
बादल ने आम आदमी पार्टी के दो विधायकों के पार्टी छोड़ने के मुद्दे पर भी टिप्पणी की। उन्होंने दावा किया कि आने वाले दिनों में आप के कई और नेता पार्टी छोड़ सकते हैं। मुख्यमंत्री भगवंत मान पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि मान अपनी धूरी विधानसभा सीट से चुनाव हार जाएंगे। उन्होंने आप सरकार पर लोगों का भरोसा खोने और भ्रष्टाचार के आरोप भी लगाए। ये राजनीतिक आरोप हैं, जिन पर संबंधित पक्षों का जवाब अलग हो सकता है।
इसी बीच सोमवार को भारतीय किसान यूनियन (कादियान) ने 2027 के विधानसभा चुनाव में शिरोमणि अकाली दल को बिना शर्त समर्थन देने की घोषणा की। यूनियन के अध्यक्ष हरमीत सिंह कादियान ने सुखबीर बादल की मौजूदगी में यह ऐलान किया। बीकेयू (कादियान) कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन का नेतृत्व करने वाले संयुक्त किसान मोर्चा से जुड़ा किसान संगठन है। इस समर्थन को अकाली दल के लिए चुनाव से पहले एक महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम के रूप में देखा जा रहा है।
अकाली दल और भाजपा का गठबंधन सितंबर 2020 में तीन कृषि कानूनों के विरोध में टूट गया था। दोनों दल करीब 24 साल तक सहयोगी रहे थे। अकाली दल ने कृषि कानूनों के मुद्दे पर भाजपा से नाता तोड़ लिया था। वर्ष 2022 के पंजाब विधानसभा चुनाव में भाजपा ने दो और अकाली दल ने तीन सीटें जीती थीं। अब 2027 के चुनाव से पहले गठबंधन को लेकर दोनों दलों के रुख और आने वाले दिनों में होने वाली राजनीतिक गतिविधियों पर नजर रहेगी।
