भारत से सीजफायर के ऐलान के बाद पाकिस्तान ने की चीन से की बात…अब क्या होगा आगे?

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नई दिल्ली ।   भारत और पाकिस्तान के बीच शनिवार को सीजफायर का ऐलान किया गया। हालांकि, कुछ घंटे बाद ही पाकिस्तान ने नापाक साजिश करते हुए फिर से ड्रोन हमले कर दिए। इन हमलों को भारतीय सेना ने विफल कर दिया।

इस बीच, पाकिस्तान को चीन ने एक बार फिर से सपोर्ट देने की बात कही है। चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने शनिवार को कहा कि उनका देश पाकिस्तान की संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता और राष्ट्रीय स्वतंत्रता को बनाए रखने में उसके साथ खड़ा रहेगा। पाकिस्तान के विदेश मंत्री और डिप्टी पीएम इशाक डार ने चीनी विदेश मंत्री के साथ बातचीत की, जिसके बाद बयान जारी किया गया। इस बयान में कहा गया कि दोनों देशों ने बातचीत जारी रखने के महत्व पर जोर दिया और आने वाले दिनों में लगातार समन्वय बनाए रखने पर सहमति व्यक्त की।

बातचीत के दौरान, पाक के विदेश मंत्री व उप-प्रधानमंत्री इशाक डार ने वांग यी को विकसित क्षेत्रीय स्थिति के बारे में जानकारी दी। वांग यी ने पाकिस्तान के संयम को स्वीकार किया और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में उसके दृष्टिकोण की सराहना की। चीनी विदेश कार्यालय ने कहा, “उन्होंने फिर से पुष्टि की कि चीन, पाकिस्तान के सदाबहार रणनीतिक सहयोगी भागीदार और दृढ़ मित्र के रूप में, पाकिस्तान की संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता और राष्ट्रीय स्वतंत्रता को बनाए रखने में उसके साथ मजबूती से खड़ा रहेगा।” इसके अलावा, डार ने यूएई के उप-प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री शेख अब्दुल्ला बिन जायद से भी बात की, जिन्होंने पाकिस्तान और भारत के बीच संघर्ष विराम समझौते का स्वागत किया। डार ने तुर्की के विदेश मंत्री हकन फिदान से भी बात की और उन्हें क्षेत्र की मौजूदा स्थिति से अवगत कराया।

भारत और पाकिस्तान के बीच जारी तनाव के बीच विश्व की दो महाशक्तियों के नाक के सवाल खड़ा हो गया है? स्थिति अब जटिलता की ओर जा रही है?

जटिलता इसलिए कि पाकिस्तान को तुर्किए के अलावा किसी भी देश का समर्थन नहीं मिल पा रहा था। अजरबैजान के सैद्धांतिक समर्थन का भारत और पाकिस्तान के बीच में जंग जैसे माहौल में कोई महत्व नहीं है। वैसे भी भारत हथियार आदि के मामले में अजरबैजान के दुश्मन आर्मेनिया का सहयोगी है।

अब क्या होगा आगे?
भारत में सामरिक और रणनीतिक विशेषज्ञ अचानक संघर्ष विराम की घोषणा से तंग थे। ङन्हें यह कम अच्छा लग रहा था। ब्रह्म चेलानी ने कड़ी टिप्पणी भी की। पूर्व सेनाध्यक्ष मनोज मुकमंद नरवाणे ने भी संतुलित भाषा में आईना दिखाया। लेकिन स्थिति एक बार फिर लौटकर बुद्धू घर को आए।

वैसे, बुद्ध का देश भारत युद्ध नहीं चाहता। भारत ने कई बार कहा कि आत्मरक्षा में आपरेशन सिन्दूर के तहत आतंकवाद के खिलाफ सटीक, पुख्ता सूचना पर केवल आतंकी शिविरों को निशाना बनाया। किसी सैन्य प्रतिष्ठान, शिविर और आम नागरिक को चोट नहीं पहुंचाई। हम टकराव को बढ़ाना नहीं चाहते लेकिन युद्ध थोपा गया तो दुश्मन की हर हरकत का मुंहतोड़ जवाब देगा। भारत की इस नीति को विदेश सचिव विक्रम मिस्री, विदेश मंत्री एस जयशंकर, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह कई बार दोहरा चुके हैं। यह नीति प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दिशा निर्देश, राजनीतिक इच्छा शक्ति के आधार पर बनी है। भारत अपनी स्वतंत्रता के बाद से इसी नीति पर चला है। इसलिए दुश्मन के हर नापाक इरादे का मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा। सीमा पर भारतीय सैन्य बल पाकिस्तान के संघर्ष विराम उल्लंघन का मुंहतोड़ जवाब दे रहे हैं।

शाहबाज शरीफ ने संसद को बताया था कि आखिरी पाकिस्तान के लिए जंग से हट रहे हैं पीछे
भारत और पाकिस्तान के बीच में युद्ध विराम को लेकर वहां के प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ ने सफाई दी थी। उन्होंने अपनी संसद को बताया था कि जंग में भारत पाकिस्तान पर बहुत भारी है। पाकिस्तान की फौज बहादुरी से मुकाबला कर रही है लेकिन उनके देश के पास लड़ने के लिए मजबूत संसाधन नहीं हैं। शाहबाज शरीफ ने यहां तक कहा था कि इस लड़ाई में उन्होंने सऊदी अरब, चीन समेत दुनिया के तमाम देशों से मदद मांगी, लेकिन तुर्किए को छोड़कर किसी ने सहायता के लिए हामी नहीं भरी। हो सकता है शाहबाज शरीफ ने कुटिल चाल के तहत संसद में यह रोना रोया हो। मिल रही जानकारी के मुताबिक इसके बाद चीन के विदेश मंत्री और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार वांग यी ने पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री मोहम्मद इशाक डार से बात की। पाकिस्तान को हर तरह के समर्थन का भरोसा दिया और कहा कि चीन पाकिस्तान के साथ खड़ा है।

क्या है मोहम्मज इशाक डार की एक्स पर पोस्ट
विदेश मंत्री डार ने इसमें लिखा है कि उन्होंने चीन के विदेश मंत्री वांग यी से फोन पर बात की। वांग यी को भारतीय आक्रामकता के बारे में बताया। पाकिस्तान की स्थिति, क्षेत्रीय हालात के बारे में जानकारी दी। डार लिखते हैं कि वांग यी ने पाकिस्तान के संयम को स्वीकार किया और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में पाकिस्तान के जिम्मेदाराना दृष्टिकोण की सराहना की। वांग यी ने इसके बाद कहा कि चीन पाकिस्तान के सदाबहार रणनीतिक सहयोगी, साझीदार और सच्चे मित्र का फर्ज निभाएगा। चीन पाकिस्तान कीसंप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता, राष्ट्रीय स्वतंत्रता को बनाए रखने में पाकिस्तान के साथ मजबूती से खड़ा रहेगी।

अब क्या होगा आगे?
भारत में सामरिक और रणनीतिक विशेषज्ञ अचानक संघर्ष विराम की घोषणा से तंग थे। ङन्हें यह कम अच्छा लग रहा था। ब्रह्म चेलानी ने कड़ी टिप्पणी भी की। पूर्व सेनाध्यक्ष मनोज मुकमंद नरवाणे ने भी संतुलित भाषा में आईना दिखाया। लेकिन स्थिति एक बार फिर लौटकर बुद्धू घर को आए।

वैसे, बुद्ध का देश भारत युद्ध नहीं चाहता। भारत ने कई बार कहा कि आत्मरक्षा में आपरेशन सिन्दूर के तहत आतंकवाद के खिलाफ सटीक, पुख्ता सूचना पर केवल आतंकी शिविरों को निशाना बनाया। किसी सैन्य प्रतिष्ठान, शिविर और आम नागरिक को चोट नहीं पहुंचाई। हम टकराव को बढ़ाना नहीं चाहते लेकिन युद्ध थोपा गया तो दुश्मन की हर हरकत का मुंहतोड़ जवाब देगा। भारत की इस नीति को विदेश सचिव विक्रम मिस्री, विदेश मंत्री एस जयशंकर, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह कई बार दोहरा चुके हैं। यह नीति प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दिशा निर्देश, राजनीतिक इच्छा शक्ति के आधार पर बनी है। भारत अपनी स्वतंत्रता के बाद से इसी नीति पर चला है। इसलिए दुश्मन के हर नापाक इरादे का मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा। हालांकि अभी इस बारे में भारतीय विदेश मंत्रालय की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। सीमा पर भारतीय सैन्य बल पाकिस्तान के संघर्ष विराम उल्लंघन का मुंहतोड़ जवाब दे रहे हैं।

अमेरिका अब क्या करेगा?
भारत में रात और अमेरिका में सुबह हुए कुछ घंटे हो गए हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ओवल आफिस जाने की तैयारी कर रहे होंगे। उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और विदेश मंत्री माकोर् रुबियों, जो पिछले 48 घंटे से भारत पाकिस्तान को संयम बरतने, युद्ध को न भड़काने, क्षेत्रीय शांति बनाए रखने के लिए तैयार करने की मेहनत कर रहे थे, उन्हें पाकिस्तान के संघर्ष विराम उल्लंघन की सूचना मिल गई होगी। कूटनीति की भाषा में कहें कि तुर्किए और चीन के पाकिस्तान को ताकत देने की नीति ने अमेरिका को इस क्षेत्रीय टकराव में सीधे तौर पर घसीट लिया है। अब यहां चीन सीधे तौर पर संघर्ष विराम तुड़वाने के बाद अमेरिका की चौधराहट को चुनौती देता नजर आ रहा है। इसने क्षेत्रीय टकराव की स्थिति को काफी जटिल बना दिया है। देखना होगा कि अब आगे क्या?

 

 

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