29 अक्टूबर को धरना खत्म करने का किया ऐलान भारतीय किसान यूनियन उगराहां ने : संगरूर में धरने पर बैठे किसानों की सभी मांगों को सरकार ने लिखती माना

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संगरूर : संगरूर में धरने पर बैठे किसानों की मांगों को सरकार ने मान लिया है। मांगें मानने के बाद भारतीय किसान यूनियन उगराहां ने 29 अक्टूबर को धरना खत्म करने का ऐलान कर दिया है। मांगों को लेकर किसान संगरूर में सीएम आवास के बाहर बैठे थे। यूनियन ने मांगे नहीं मानने पर कल से सख्त कदम उठाने की चेतावनी दी थी, जिस पर पंजाब सरकार हरकत में आई। कृषि मंत्री कुलदीप सिंह धालीवाल ने यूनियन के प्रधान जोगिंदर सिंह उगराहां समेत 5 प्रमुख नेताओं के साथ शुक्रवार को पटियाला के सर्किट हाउस में मीटिंग की। मीटिंग में सीनियर किसान नेता जगतार सिंह कालाझाड़, झंडा सिंह झेठुके, शंगारा सिंह और रूप सिंह छन्ना के अलावा डीसी व आईजी समेत अन्य अधिकारी भी मौजूद रहे।
मीटिंग के बाद जोगिंदर सिंह उगराहां ने कहा कि पंजाब सरकार ने किसानों की सभी मांगों को लिखित रूप में मान लिया है। इसके बाद उन्होंने करीब 20 दिन से जारी अनश्चितकाल धरना प्रदर्शन 29 अक्टूबर को खत्म करने की घोषणा कर दी।
उल्लेखनीय है कि किसान पंजाब सरकार से सितंबर महीने में मानी उनकी मांगों को लागू करने बात को लेकर धरने पीआर बैठे थे।
किसानों की मांगें पर कृषि मंत्री धालीवाल ने जताई सहमति :
कृषि मंत्री कुलदीप सिंह धालीवाल ने कहा कि किसान नेताओं के साथ चर्चा की गई और किसानों की सभी मांगों पर सहमति बन गई है। इसलिए किसान संगठनों द्वारा 29 अक्टूबर को सगरूर में मुख्यमंत्री के घर के सामने लगाया गया धरना उठा लिया जाएगा।
भाकियू उगराहां के प्रधान जोगिंदर सिंह उगराहां ने कहा कि जीटी दिनों में उनकी मुख्यमंत्री भगवंत मान के साथ मीटिंग हुई थी। इसमें मुख्यमंत्री ने किसानों की मांगे मानी थी। आज कृषि मंत्री कुलदीप सिंह धालीवाल व अन्य अधिकारियों ने आज बैठक में किसानों की मांगे लिखित में मान ली हैं और अब धरना उठा लिया जाएगा।
किसानों की प्रमुख मांगें जिन पीआर सहमति : किसानों को खराब फसलों का मुआवजा जल्द दिया जाए, भूजल व दरिया के पानी कॉर्पोरेट घरानों को सौंपने की जल नीति रद्द की जाए, भारत माला प्रोजेक्ट के तहत किसानों को मार्केट रेट अनुसार मुआवजा व तीस फीसदी उजाड़ा भत्ता दिया जाए, बड़ी कंपनियों का दूषित पानी धरती में जाने से रोकने व पानी डालने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाए, जमीन को समतल करने का हक छीनने वाला कानून रद्द किया जाए, पराली की संभाल के लिए 200 रुपए प्रति क्विंटल बोनस दें और पराली को आग लगाने वाले किसानों पर सख्ती बंद, धान की बिजाई पूरी तरह से बंद करने के लिए अन्य फसलों पर MSP, किसान मजदूरों पर दर्ज किए गए केस रद्द किए जाएं।

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