महाविद्यालय चबां में जुटेंगे देश विदेश के शोधकर्ता

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“विकसित भारत का पुनरुद्धार 2047, समावेशी विकास को प्राचीन भारत की बुद्धिमत्ता के साथ एकीकृत करना” विषय पर सम्मेलन का आयोजन

एएम नाथ। चम्बा : राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, चंबा (हिमाचल प्रदेश) द्वारा 3 और 4 नवम्बर 2025 को “विकसित भारत का पुनरुद्धार 2047, समावेशी विकास को प्राचीन भारत की बुद्धिमत्ता के साथ एकीकृत करना’ विषय पर एक दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन हाइब्रिड मोड में किया जा रहा है। इस सम्मेलन का उद्देश्य भारत की स्वतंत्रता की शताब्दी वर्ष 2047 तक “विकसित भारत के लक्ष्य को साकार करने के लिए आर्थिक, सामाजिक एवं तकनीकी प्रगति को हमारी प्राचीन सभ्यता और ज्ञान परंपरा के मूल्यों के साथ जोड़ना है।
प्राचाय डॉ. मदन गुलेरिया ने जानकारी देते हुए बताया कि सम्मेलन में भाग लेने वाले शोधकर्ताओं द्वारा यह विचार-विमर्श किया जाएगा कि ऋग्वेद, उपनिषद, अर्थशास्त्र, पुराणों तथा भारतीय धर्म एवं शासन प्रणालियों में निहित ज्ञान और दार्शनिक दृष्टिकोण आधुनिक भारत के समावेशी विकास, पर्यावरणीय स्थिरता और सामाजिक समरसता के लिए किस प्रकार उपयोगी हो सकते हैं। इसमें वाणिज्य, समावेशी अर्थव्यवस्था, सभी के लिए स्वास्थ्य, स्वदेशी विचार पर आधारित नैतिक अर्थशास्त्र, पर्यावरण संरक्षण, भागीदारी लोकतंत्र, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी द्वारा सतत विकास जैसे विषयों पर विशेषज्ञों द्वारा विमर्श किया जाएगा। इस सम्मेलन में देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों और संस्थानों से प्रख्यात विद्वान एवं वक्ता भाग लेंगे, जिनमें प्रमुख प्रवख्ता प्रो. राज कुमार सिंह (वाणिज्य विभाग, हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय, शिमला), प्रो. मदन लाल (वाणिज्य एवं व्यवसाय अध्ययन विभाग, दिल्ली विश्वविद्यालय), प्रो. मनोज कुमार सिन्हा (पीजीडीएवी कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय), डॉ. रुचि रमेश (प्राचार्य, जीसी दरलाघाट, सोलन), डॉ. पीयूष सवल (एमिटी विश्वविद्यालय, पंजाब), प्रो. संजय ठाकुर (करियर पॉइंट विश्वविद्यालय, हमोरपुर), डॉ. विजय नाग (प्राचार्य, जीसी बनीखेत), डॉ. मोहिंदर कुमार सलारिया (प्राचार्य, जीसी सलूणी), डॉ. हेमंत पाल (प्राचार्य, जीसी भरमौर) तथा श्री नारायण सिंह (टीजीटी, फुलब्राइट फेलोशिप एवं ब्रिटिश काउंसिल छात्रवृत्ति धारक)। इस सम्मेलन के संयोजक डॉ. विजय कुमार ने जानकारी देते हुए बताया कि सम्मेलन में देश विदेश के विभिन्न विषयों के शोधकर्ता हिस्सा ले रहें हैं। उन्होंने बताया कि समेलन्न को लेकर विभिन्न कमेटियों का गंठन कर लिया गया है और इस के लिए सभी तैयारियां कर ली है। उन्होंने बताया कि यह महाविद्यालय में इस तरह की सम्मेलन हर साल होते रहते हैं। उन्होंने बताया कि सम्मेलन में शोध पत्र जमा करवाने की अंतिम तिथि 30 नम्बर 2025 निर्धारित की गई है। चयनित शाध-पत्रों (Abstract) को एक संपादित्त शोध-संग्रह (Edited Volume) में प्रकाशित किया जाऐगा। उन्होंने कहा कि महाविद्यालय के बौद्धिक वातावरण को समुद्ध करेगा और छात्रों व अध्यापकों के लिए प्रेरणादायी अनुभव सिद्ध होगा।

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