मुझे निशाना बनाने के बजाय आरडीजी मुद्दे पर प्रधानमंत्री से मिलें भाजपा नेता : मुख्यमंत्री सुक्खू

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पी. चिदंबरम ने आरडीजी मुद्दे को उचित मंच पर उठाने का आश्वासन दिया
एएम नाथ। शिमला : मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने दिल्ली से शिमला लौटने के उपरान्त मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि भाजपा नेताओं को आपसी राजनीति छोड़कर राज्य के हित में आगे आना चाहिए। उन्होंने कहा कि राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) की समाप्ति से हिमाचल प्रदेश को वर्ष 2026 से 2031 तक प्रत्येक वर्ष लगभग 10,000 करोड़ रुपये का नुकसान होगा। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने आरडीजी समाप्त कर प्रदेश के लोगों का हक छीन लिया है। उन्होंने भाजपा नेताओं से कहा, ‘मुझे निशाना बनाने के बजाय भाजपा नेताओं को आरडीजी की बहाली के लिए प्रधानमंत्री से मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि मैंने कई बार भाजपा नेताओं से प्रदेश सरकार के साथ मिलकर केंद्र के समक्ष प्रदेश का पक्ष रखने का आग्रह किया और आरडीजी के मुद्दे पर भी एक जुट होकर लड़ने के लिए आगे आने को कहा लेकिन मुझे पता है कि वे ऐसा कभी नहीं करेंगे।’
 मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम से भेंट कर 16वें वित्त आयोग की सिफारिशों से हिमाचल प्रदेश पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों के बारे में अवगत करवाया। उन्होंने कहा कि वर्तमान कांग्रेस सरकार को पिछली सरकार से 75,000 करोड़ रुपये का कर्ज और 10,000 करोड़ रुपये की देनदारियां (वेतन और पेंशन एरियर) विरासत में मिली हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान सरकार ने कई सुधार और नीतिगत बदलाव किए हैं और भ्रष्टाचार पर लगाम लगाई है, जिससे पिछले तीन वर्षों में 3,800 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय हुई है। उन्होंने कहा कि श्री चिदंबरम ने प्रदेश सरकार के इन प्रयासों की सराहना की और अधिक जानकारी मांगी तथा इस मुद्दे को उचित मंच पर उठाने का आश्वासन दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि श्री चिदंबरम के अनुसार संविधान के अनुच्छेद 275(1) के तहत राज्यों की आय और व्यय की स्थिति को ध्यान में रखने का प्रावधान है। 17 राज्यों से आरडीजी समाप्त करते समय पर्वतीय और छोटे राज्यों के हितों की सुरक्षा जरूरी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि तमाम चुनौतियों के बावजूद राज्य सरकार आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रही है और आर्थिक सुधार कर रही है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में राज्य को 54,296 करोड़ रुपये से अधिक आरडीजी मिला, जबकि वर्तमान सरकार को पिछले तीन वर्षों में केवल 17,563 करोड़ रुपये ही प्राप्त हुए हैं। इसके अलावा, पिछली भाजपा सरकार को 16,000 करोड़ रुपये जीएसटी मुआवजे और 11,431 करोड़ रुपये अंतरिम अनुदान के रूप में भी मिले है।
ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि भाजपा सरकार को पांच वर्षों में कुल मिलाकर करीब 70,000 करोड़ रुपये मिले। यदि उसमें से 40,000 करोड़ रुपये कर्ज चुकाने में लगाए जाते, तो आज प्रदेश कर्ज के जाल में नहीं फंसा होता। पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर को बताना चाहिए कि ये 70,000 करोड़ रुपये कहां खर्च हुए और किसे इसका लाभ मिला।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछली भाजपा सरकार ने आरडीजी का दुरुपयोग कर  फिजूलखर्ची की जबकि वर्तमान प्रदेश सरकार ने अनावश्यक खर्चों पर रोक लगाई है और सख्त वित्तीय अनुशासन अपनाया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार किसी भी पद को समाप्त नहीं करेगी, बल्कि युवाओं के लिए रोज़गार के नए अवसर सृजित किए जाएंगे। राज्य के लोगों का हित सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार ने आवश्यकता के अनुसार ही अध्यक्ष और उपाध्यक्ष नियुक्त किए हैं, जो पिछली भाजपा सरकार की तुलना में लगभग आधे हैं और ये सभी राज्य के विकास में सक्रिय योगदान दे रहे हैं।
 श्री सुक्खू ने कहा कि केंद्र से सीमित अनुदान मिलने के बावजूद, 70 वर्ष और उससे अधिक आयु के पेंशनरों और पारिवारिक पेंशनरों के पेंशन एरियर का भुगतान कर दिया गया है। इसके साथ ही, वर्ष 2016 से 2021 के बीच सेवानिवृत्त हुए चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के ग्रेच्युटी और अवकाश नकदीकरण के बकाया भी जारी किए गए हैं, जो वर्तमान प्रदेश सरकार की वित्तीय समझदारी का प्रमाण है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए आईएएस, आईपीएस और आईएफएस कैडर में भी कटौती की गई है। उन्होंने कहा कि आईएफएस पदों की संख्या 110 से घटाकर 86 कर दी गई है। अधिकारी स्तर के पद कम किए गए हैं, जबकि निचले स्तर के पद बढ़ाए गए हैं ताकि प्रशासन अधिक प्रभावी हो सके।
उन्होंने कहा कि खर्च कम करने के लिए कुछ स्कूलों और कॉलेजों का विलय किया गया है। सरकार ने सत्ता संभालने के पहले दिन से ही प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए कठिन फैसले लेने शुरू कर दिए थे। उन्होंने कहा कि राज्य ‘व्यवस्था परिवर्तन’ के माध्यम से एक मजबूत और आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि भारतीय वन प्रबंधन संस्थान की एक रिपोर्ट के अनुसार, हिमाचल प्रदेश देश की अर्थव्यवस्था को करीब 90,000 करोड़ रुपये की पारिस्थितिक सेवाएं प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के संसाधनों पर हमारा अधिकार है और हम इसके लिए पूरी मजबूती से लड़ेंगे।
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