राघव चड्ढा के बगावती तेवर पर भगवंत मान का बड़ा खुलासा….खोल दिया पूरा कच्चा-चिट्ठा

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चंडीगढ़ : आम आदमी पार्टी के भीतर जारी घमासान अब एक नए और बेहद गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। राज्यसभा में पार्टी के उपनेता पद से हटाए जाने के बाद राघव चड्ढा ने जहां ‘चुप कराए जाने’ का भावनात्मक कार्ड खेला था, वहीं अब पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने उन पर सीधा और तीखा हमला बोला है।

शुक्रवार को एक संवाददाता सम्मेलन के दौरान मान ने साफ शब्दों में कहा कि राघव चड्ढा इस वक्त किसी भारी ‘दबाव’ में काम कर रहे हैं और उन्होंने बार-बार पार्टी की नीतियों और सामूहिक फैसलों के खिलाफ जाकर काम किया है। मुख्यमंत्री का यह बयान इशारा कर रहा है कि राघव चड्ढा और आम आदमी पार्टी के बीच की खाई अब शायद ही कभी भर पाए।

पीएम मोदी से डरने का आरोप और पार्टी व्हिप का उल्लंघन

मुख्यमंत्री भगवंत मान से जब सीधा सवाल पूछा गया कि क्या राघव चड्ढा किसी दबाव में हैं, तो उन्होंने बिना झिझक ‘हां’ में जवाब दिया। मान ने चड्ढा की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब संसद में विपक्षी दल सामूहिक रूप से किसी मुद्दे पर सदन से बहिर्गमन (वॉकआउट) का फैसला लेते हैं, तो राघव चड्ढा उस निर्देश का पालन नहीं करते। मान ने इसे सीधे तौर पर ‘पार्टी व्हिप’ का उल्लंघन करार दिया। पार्टी के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अनुराग ढांडा ने भी मान सुर में सुर मिलाते हुए पूछा कि क्या कोई ऐसा व्यक्ति देश के लिए लड़ सकता है जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से डरता हो? आप नेताओं का आरोप है कि राघव अब केंद्र के खिलाफ मुद्दे उठाने से कतरा रहे हैं।

‘प्रचार-प्रसार’ की राजनीति पर सीएम की कड़ी आपत्ति

भगवंत मान ने राघव चड्ढा के उन दावों की भी हवा निकाल दी जिसमें उन्होंने खुद को जनता की आवाज बताया था। मान ने कहा कि गुजरात में जब ‘आप’ के कई दिग्गज नेताओं और कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारियां हुईं, तब राघव चड्ढा की आवाज कहीं सुनाई नहीं दी। पश्चिम बंगाल में मतदाताओं के नाम हटाए जाने जैसे गंभीर मुद्दों पर भी उन्होंने चुप्पी साधे रखी। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि राघव चड्ढा संसद में पार्टी के एजेंडे को आगे बढ़ाने के बजाय केवल अपनी व्यक्तिगत ब्रांडिंग और प्रचार-प्रसार में जुटे हुए थे। उनके मुताबिक, पार्टी ऐसे व्यवहार को कभी बर्दाश्त नहीं करेगी जो संगठन के हितों के ऊपर व्यक्ति को रखता हो।

नेतृत्व परिवर्तन को बताया एक सामान्य प्रक्रिया

राघव चड्ढा को पद से हटाए जाने को लेकर मचे हंगामे पर भगवंत मान ने अपना उदाहरण देते हुए स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि संसद में किसी दल द्वारा अपने नेताओं को बदलना कोई अनोखी या असामान्य बात नहीं है। मान ने याद दिलाया कि जब वे 2014 में पहली बार संगरूर से सांसद बने थे, तब डॉ. धर्मवीर गांधी संसदीय बोर्ड के नेता थे, और बाद में खुद मान ने भी उस जिम्मेदारी को संभाला था। उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी समय-समय पर रणनीतिक फैसले लेती रहती है और इसे किसी ‘साजिश’ के तौर पर देखना गलत है।

क्या राघव के लिए अब ‘आप’ में रास्ते बंद?

मुख्यमंत्री के इस कड़े रुख ने यह साफ कर दिया है कि अरविंद केजरीवाल और भगवंत मान की जोड़ी अब राघव चड्ढा के ‘बागी’ तेवरों को और अधिक ढील देने के मूड में नहीं है। मान ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी कि यदि कोई भी पार्टी की नीति से परे जाता है या निर्देशों का पालन नहीं करता है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई तय है। राघव चड्ढा ने भले ही कहा हो कि वे पराजित नहीं हुए हैं, लेकिन अपनी ही पार्टी के मुख्यमंत्री द्वारा लगाए गए ‘डर’ और ‘दबाव’ के आरोपों ने उनकी राजनीतिक साख पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। अब देखना यह होगा कि दिल्ली से लेकर पंजाब तक मची यह रार आगे क्या मोड़ लेती है।

 

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