सीबीआई की विशेष अदालत में करीब 22,500 शब्दों में दर्ज हुए बयान; बचाव पक्ष ने क्रॉस एग्जामिनेशन में राजनीतिक साजिश से जुड़े सवाल उठाए
चंडीगढ़। पंजाब के निलंबित डीआईजी हरचरण सिंह भुल्लर और उनके कथित बिचौलिए कृष्णु शारदा के खिलाफ आठ लाख रुपये रिश्वत मामले में अभियोजन पक्ष को अहम आधार मिला है। मामले के शिकायतकर्ता आकाश बत्ता की सीबीआई की विशेष अदालत में गवाही पूरी हो गई है। करीब एक महीने तक चली सुनवाई के दौरान उनके बयान लगभग 90 पन्नों में दर्ज किए गए, जिनमें करीब 22,500 शब्द शामिल हैं।
शिकायतकर्ता का बचाव पक्ष की ओर से क्रॉस एग्जामिनेशन भी किया जा चुका है। सीबीआई का दावा है कि जिरह के दौरान भी आकाश बत्ता रिश्वत मांगने से जुड़े अपने बयानों पर कायम रहे। उन्होंने अदालत में आरोपी भुल्लर की पहचान करते हुए मामले से जुड़े घटनाक्रम के बारे में विस्तार से जानकारी दी। अभियोजन पक्ष इस गवाही को महत्वपूर्ण मान रहा है।
बचाव पक्ष ने राजनीतिक साजिश से जुड़े सवाल उठाए
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने शिकायतकर्ता के बयानों पर सवाल उठाए। सूत्रों के मुताबिक, भुल्लर के वकील ने जिरह के दौरान आकाश बत्ता से पूछा कि क्या उन्होंने किसी बड़ी राजनीतिक पार्टी से जुड़े व्यक्ति के कहने पर शिकायत दर्ज करवाई थी। बचाव पक्ष की कोशिश मामले को राजनीतिक घटनाक्रम से जोड़कर यह सवाल उठाने की थी कि कहीं किसी नेता के इशारे पर भुल्लर को फंसाया तो नहीं गया।
शिकायत पर सीबीआई ने बिछाया था ट्रैप
पिछले साल आकाश बत्ता की शिकायत पर सीबीआई ने डीआईजी हरचरण सिंह भुल्लर और कथित बिचौलिए कृष्णु शारदा को गिरफ्तार किया था। शिकायतकर्ता का आरोप था कि उसके खिलाफ चल रहे एक आपराधिक मामले में गिरफ्तारी का डर दिखाकर आठ लाख रुपये रिश्वत मांगी जा रही थी। आरोप के मुताबिक, बिचौलिए ने भुल्लर के नाम पर उससे रिश्वत की मांग की थी।
शिकायत मिलने के बाद सीबीआई ने ट्रैप लगाकर दोनों आरोपियों को गिरफ्तार क
