नई दिल्ली/चंडीगढ़, 2 अप्रैल: चंडीगढ़ से सांसद मनीष तिवारी ने लोकसभा में चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड (सीएचबी) के ‘नीड-बेस्ड चेंजेज़’ (एनबीसी) ऑर्डर को लेकर निवासियों से जुड़े गंभीर मुद्दे उठाते हुए, आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय से पूछा कि 3 जनवरी, 2023 को सीएचबी के चेयरमैन द्वारा पत्र नंबर – पीए/सीईओ/ईए1/2023/02 द्वारा जारी इस आदेश का कोई प्रभाव आकलन किया गया है या नहीं, और यदि किया गया है तो उसका विवरण दिया जाए।
तिवारी ने अनस्टार्ड प्रश्न संख्या 6298 के माध्यम से, यह भी पूछा है कि क्या इस आदेश के बाद हितधारकों से कोई परामर्श किया गया है या करने की योजना है, तो उसकी जानकारी दी जाए। उन्होंने 2023 से 2025 के बीच संबंधित आदेशों और चंडीगढ़ बिल्डिंग बायलॉज बारे रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशनों और अलॉटियों से प्राप्त शिकायतों, विशेष रूप से पात्रता, जुर्मानों और प्रक्रियात्मक कठोरताओं से संबंधित मुद्दों पर, की संख्या और प्रकृति के बारे में भी जानकारी मांगी है।
तिवारी ने आगे पूछा कि क्या सरकार या केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन चंडीगढ़ बिल्डिंग रूल्स (अर्बन), 2017 में कोई संशोधन, ढील या तार्किक बदलाव करने पर विचार कर रहा है या नहीं, जिस संबंधी कारणों की जानकारी दी जाए।
इस पर जवाब देते हुए, केंद्रीय हाउसिंग और शहरी मामलों संबंधी मंत्रालय के राज्यमंत्री टोकहन साहू ने कहा कि चंडीगढ़ प्रशासन द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार उक्त आदेश का कोई प्रभाव आकलन नहीं किया गया है। हालांकि, ‘नीड-बेस्ड चेंजेज़’ ऑर्डर के क्लॉज 20 के क्रियान्वयन को लेकर हितधारकों से परामर्श किया गया है।
मंत्री ने यह भी कहा कि वर्तमान में चंडीगढ़ बिल्डिंग रूल्स (अर्बन), 2017 में किसी प्रकार का संशोधन या ढील देने का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। उन्होंने कहा कि ये नियम पड़ोसी राज्यों के बायलॉज़ का समग्र विश्लेषण करने के बाद बनाए गए हैं और सभी प्रकार की इमारतों के लिए मानक निर्धारित करते हैं।
तिवारी ने अफसोस जताते हुए, कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि सरकार चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड के लगभग 3.5 लाख अलॉटियों की पिछले 25 वर्षों से चली आ रही समस्याओं को मानवीय दृष्टिकोण से नहीं देख रही है।
