विधायक पठानमाजरा को हाई कोर्ट से राहत : हाई कोर्ट से सख्त शर्तों के साथ मिली जमानत

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चंडीगढ़ :  पंजाब के सनौर से आम आदमी पार्टी के विधायक हरमीत सिंह पठानमाजरा को दुष्कर्म, धोखाधड़ी, धमकी और दूसरी शादी से जुड़े चर्चित मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है।

जस्टिस त्रिभुवन दहिया की अदालत ने उन्हें नियमित जमानत प्रदान करते हुए कहा कि मामले के तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए लंबे समय तक हिरासत में रखना उचित नहीं होगा।

मामला सितंबर 2025 में दर्ज एफआईआर से जुड़ा है, जिसमें एक महिला ने आरोप लगाया था कि वर्ष 2013-14 में फेसबुक के माध्यम से उसकी विधायक हरमीत सिंह पठानमाजरा से पहचान हुई थी। महिला का दावा था कि पठानमाजरा ने स्वयं को तलाकशुदा बताकर उससे विवाह का वादा किया और इसी आधार पर शारीरिक संबंध बनाए।

श्बाद में 14 अगस्त 2021 को गुरुद्वारे में आनंद कारज भी कराया गया, लेकिन बाद में उसे पता चला कि विधायक की पहली पत्नी के साथ शादी अभी भी कायम है। महिला ने आरोप लगाया कि उसे धोखे में रखकर उसका यौन शोषण किया गया।

दावा- मामला राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित

विधायक की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि मामला राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित है। बचाव पक्ष ने यह भी दलील दी कि शिकायतकर्ता पहले भी इसी प्रकार के आरोप लगाकर एक पुलिस अधिकारी के खिलाफ दुष्कर्म का मामला दर्ज करा चुकी है, जिसमें आरोपी बाद में बरी हो गया था। इसके अलावा शिकायत पर पहले हुई पुलिस जांच में भी किसी संज्ञेय अपराध के स्पष्ट प्रमाण नहीं पाए गए थे।

राज्य सरकार और शिकायतकर्ता की ओर से जमानत का विरोध करते हुए कहा गया कि विधायक ने झूठे बहाने से महिला का शोषण किया और बाद में उसे धमकाया भी। यह भी बताया गया कि वह एक समय देश छोड़कर विदेश चला गया था तथा उसे भगोड़ा भी घोषित किया जा चुका है। इसलिए उसके फरार होने की आशंका बनी हुई है।

2017 के चुनाव हलफनामे का भी हुआ जिक्र

अदालत ने रिकॉर्ड पर मौजूद तथ्यों का विश्लेषण करते हुए कहा कि शिकायतकर्ता और आरोपी के बीच लगभग एक दशक तक संबंध रहे। ऐसे में यह विचारणीय प्रश्न है कि क्या शिकायतकर्ता इतने लंबे समय तक आरोपी के वैवाहिक संबंधों से पूरी तरह अनभिज्ञ रह सकती थी। अदालत ने यह भी नोट किया कि विधायक ने वर्ष 2017 के चुनावी हलफनामे में भी अपनी पत्नी का उल्लेख किया था।

महीने में दो बार थाने में लगानी होगी हाजिरी

हाई कोर्ट ने कहा कि आरोपी के पहले फरार रहने का तथ्य अपने आप में जमानत से इनकार का आधार नहीं बन सकता। इसके साथ ही अदालत ने विधायक को नियमित जमानत देते हुए पासपोर्ट ट्रायल कोर्ट में जमा कराने, प्रत्येक माह की 1 और 15 तारीख को संबंधित थाने में हाजिरी लगाने तथा शिकायतकर्ता, उसके परिजनों और गवाहों से किसी भी प्रकार का संपर्क न करने की शर्तें लगाई हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी भी शर्त के उल्लंघन पर पुलिस जमानत रद्द कराने के लिए आवेदन कर सकेगी।

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