HPU कुलपति विवाद पर हाईकोर्ट की रोक से सुक्खू सरकार घिरी, भाजपा ने उठाए सवाल
एएम नाथ। मंडी। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (HPU) के कुलपति का कार्यभार डीन और रजिस्ट्रार को सौंपने संबंधी आदेश पर उच्च न्यायालय की अंतरिम रोक को लेकर प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। भाजपा के प्रदेश मुख्य प्रवक्ता एवं विधायक राकेश जमवाल ने इस मामले में मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार को घेरा। उन्होंने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालयों के प्रशासनिक फैसलों और कुलपति नियुक्तियों को लेकर बार-बार विवाद सामने आना उच्च शिक्षा व्यवस्था के लिए चिंता का विषय है।
जमवाल ने कहा कि सरकार को न्यायालय के आदेशों से सबक लेते हुए विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता, नियुक्तियों में पारदर्शिता और प्रशासनिक प्रक्रियाओं की वैधानिकता सुनिश्चित करनी चाहिए। उनके अनुसार, सरकार को राजनीतिक और प्रशासनिक विवादों के बजाय शिक्षा की गुणवत्ता, शिक्षकों की कमी तथा विद्यार्थियों को बेहतर सुविधाएं देने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
कुलपति नियुक्तियों पर पहले भी उठे सवाल
जमवाल ने कृषि और बागवानी विश्वविद्यालयों में कुलपति नियुक्तियों से जुड़े विवादों का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रदेश में विश्वविद्यालयों के संचालन और नियुक्तियों की प्रक्रिया को लेकर पहले भी सरकार तथा राजभवन के बीच मतभेद सामने आ चुके हैं। उन्होंने दावा किया कि इन घटनाक्रमों से विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता और वैधानिक अधिकारों को लेकर गंभीर प्रश्न खड़े हुए हैं।
उन्होंने अगस्त 2026 में हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय द्वारा कृषि एवं बागवानी विश्वविद्यालयों में कुलपति नियुक्तियों से संबंधित राज्य सरकार के संशोधित प्रावधानों को निरस्त किए जाने का भी हवाला दिया। जमवाल के मुताबिक, नियुक्तियों की प्रक्रिया विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नियमों के अनुरूप होनी चाहिए।
‘विश्वविद्यालयों के प्रशासनिक फैसले बार-बार विवादों में क्यों?’
भाजपा विधायक ने कहा कि हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के कुलपति का कार्यभार डीन और रजिस्ट्रार को सौंपने संबंधी आदेश पर अंतरिम रोक लगने के बाद सरकार को अपनी प्रक्रिया स्पष्ट करनी चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि जब विश्वविद्यालयों के संचालन के लिए अधिनियम और नियम पहले से मौजूद हैं, तो प्रशासनिक निर्णयों को लेकर बार-बार विवाद क्यों पैदा हो रहे हैं।
उन्होंने अगस्त 2026 में विधानसभा से पारित हिमाचल प्रदेश राज्य विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक, 2026 का उल्लेख करते हुए कहा कि भाजपा ने उस समय भी विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता और सरकारी नियंत्रण बढ़ने की आशंकाएं जताई थीं। हालांकि, इस संबंध में सरकार का पक्ष और विधेयक के प्रावधानों का स्वतंत्र परीक्षण जरूरी है।
सरकार से पांच सवालों के जवाब मांगे
राकेश जमवाल ने कांग्रेस सरकार से पांच प्रमुख सवालों पर जवाब मांगा। इनमें कुलपति नियुक्तियों से जुड़े न्यायिक फैसलों के बाद उठाए गए सुधारात्मक कदम, सरकार और राजभवन के बीच मतभेदों के कारण, विश्वविद्यालयों की प्रशासनिक स्वायत्तता सुनिश्चित करने की नीति, शिक्षकों के रिक्त पद भरने की योजना तथा विवादों का विद्यार्थियों और शैक्षणिक गतिविधियों पर असर रोकने के उपाय शामिल हैं।
स्कूलों में शिक्षकों की कमी का मुद्दा भी उठाया
जमवाल ने स्कूली शिक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि कई विद्यालयों में शिक्षकों की कमी और दूरदराज क्षेत्रों में शैक्षणिक सुविधाओं की उपलब्धता जैसे मुद्दों पर गंभीरता से काम करने की जरूरत है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार शिक्षा व्यवस्था की बुनियादी समस्याओं का स्थायी समाधान करने में नाकाम रही है।
उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश ने शिक्षा के क्षेत्र में लंबे समय की मेहनत से पहचान बनाई है। इसे कायम रखने के लिए शिक्षण संस्थानों में पर्याप्त संसाधन, स्थिर प्रशासन और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा जरूरी है।
भाजपा विधायक ने स्पष्ट किया कि उच्च न्यायालय का अंतरिम आदेश अंतिम फैसला नहीं है, लेकिन इससे उठने वाले प्रक्रियागत सवालों पर सरकार को जवाब देना चाहिए। उन्होंने कहा कि भाजपा विद्यार्थियों, शिक्षकों और अभिभावकों से जुड़े मुद्दों को उठाती रहेगी।
