श्री आनंदपुर साहिब सराय मामले में बलतेज पन्नू ने SGPC से मांगे जवाब : सराय रजिस्टर, ₹1 लाख की मदद और महिला के लंबे समय तक ठहरने पर उठाए सवाल

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चंडीगढ़: आम आदमी पार्टी पंजाब के मीडिया इंचार्ज बलतेज पन्नू ने श्री आनंदपुर साहिब सराय मामले को लेकर शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने SGPC प्रधान हरजिंदर सिंह धामी और सुखबीर सिंह बादल से मामले से जुड़े विभिन्न सवालों पर जवाब मांगा।

चंडीगढ़ में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बलतेज पन्नू ने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत मान ने श्री आनंदपुर साहिब मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय एसआईटी गठित की है। उनके अनुसार पंजाब पुलिस अधिकारी गुरबंस सिंह बैंस की अगुवाई वाली एसआईटी में सिमरनजीत सिंह लंग और करण सिंह संधू सदस्य हैं।

पन्नू ने कहा कि जांच से यह स्पष्ट हो सकेगा कि महिला बहरीन से पंजाब कैसे पहुंची, श्री आनंदपुर साहिब स्थित SGPC सराय में उसके रहने की व्यवस्था किसने की, उसे कौन-कौन सी सुविधाएं दी गईं और इन सुविधाओं की मंजूरी किस स्तर पर हुई। उन्होंने महिला के लंबे समय तक सराय में रहने को लेकर भी सवाल उठाए।

सराय के रजिस्टर को लेकर सवाल

बलतेज पन्नू ने SGPC प्रधान हरजिंदर सिंह धामी द्वारा दिखाई गई सराय की एंट्री का हवाला देते हुए कहा कि रजिस्टर में कमरे के सामने ‘अमरजीत सिंह चावला ने सिफारिश किया’ और ‘फ्री’ लिखा दिखाई देता है। उन्होंने सवाल किया कि ऐसी एंट्री के बावजूद कमरे की बुकिंग ₹1,000 में किए जाने का दावा कैसे किया गया।

₹1 लाख की आर्थिक मदद पर उठाए सवाल

पन्नू ने महिला को इलाज के लिए कथित तौर पर दी गई ₹1 लाख की राशि को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि SGPC को स्पष्ट करना चाहिए कि हरजिंदर सिंह धामी के कार्यकाल में मानसिक रूप से बीमार मरीजों के इलाज के लिए कितने लोगों को ₹1 लाख की आर्थिक सहायता दी गई और ऐसे मामलों में भुगतान किसकी सिफारिश पर किया गया।

उन्होंने उस आवेदन पर भी सवाल उठाया, जिसके आधार पर राशि मंजूर किए जाने की बात कही गई। पन्नू ने पूछा कि यदि आवेदन में महिला के कई महीनों से श्री आनंदपुर साहिब की सराय में रहने का उल्लेख था, तो इस पर पहले ध्यान क्यों नहीं दिया गया। उन्होंने इलाज की जगह, डॉक्टरों की सिफारिश और अमृतसर में चेक भुगतान किए जाने को लेकर भी स्पष्टीकरण मांगा।

रजिस्टर में कथित छेड़छाड़ पर जवाब मांगा

पन्नू ने सराय के रजिस्टर में कथित छेड़छाड़ का मुद्दा उठाते हुए पूछा कि इसका पता कब चला और यदि इसकी जानकारी पहले से थी तो इसे SGPC की नियमित कार्रवाई में क्यों नहीं लाया गया। उन्होंने कहा कि SGPC एक सम्मानित धार्मिक संस्था है, लेकिन उसके प्रबंधन से जुड़े सवालों पर जवाब मिलना जरूरी है।

ड्राइवर के निलंबन पर भी सवाल

उन्होंने ड्राइवर मोहन सिंह के निलंबन को लेकर भी सवाल उठाया। पन्नू ने कहा कि यदि SGPC प्रधान के अनुसार महिला को कोई वाहन उपलब्ध नहीं कराया गया था, तो ड्राइवर को निलंबित करने का आधार क्या था और वह किस वाहन को चला रहा था।

उन्होंने मामले से जुड़े कुछ लोगों के बयानों का हवाला देते हुए महिला के लंबे समय तक सराय में ठहरने को लेकर भी सवाल उठाए।

328 लापता स्वरूपों के मुद्दे का भी जिक्र

बलतेज पन्नू ने 328 लापता स्वरूपों के पुराने विवाद का उल्लेख करते हुए SGPC द्वारा सीबीआई जांच की मांग पर भी सवाल उठाया। उन्होंने दावा किया कि उस समय SGPC ने सीबीआई जांच का विरोध किया था और अपनी जांच खुद करने की बात कही थी। उन्होंने सवाल किया कि अब सीबीआई जांच की मांग किस आधार पर की जा रही है।

‘सवालों का जवाब दिया जाना जरूरी’

पन्नू ने कहा कि उनके सवाल SGPC को बदनाम करने के उद्देश्य से नहीं हैं। उनके अनुसार, यदि संस्था के प्रबंधन से जुड़े सवाल उठ रहे हैं तो उनका जवाब दिया जाना चाहिए। उन्होंने हरजिंदर सिंह धामी और सुखबीर सिंह बादल से मामले से जुड़े सवालों पर स्पष्ट जवाब देने की अपील की।

उन्होंने कहा कि जब तक सवालों के जवाब नहीं मिलते, इस मामले को लेकर उठ रहे सवाल बने रहेंगे। उन्होंने SGPC की प्रस्तावित पांच घंटे की प्रेस कॉन्फ्रेंस का जिक्र करते हुए कहा कि वहां उन लोगों को भी सवाल पूछने का अवसर दिया जाना चाहिए जो मामले को लेकर सवाल उठा रहे हैं।

वहीं, श्री आनंदपुर साहिब सराय मामले की वास्तविक स्थिति जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी। फिलहाल पन्नू द्वारा लगाए गए आरोप और उठाए गए सवाल राजनीतिक बयानबाजी का हिस्सा हैं।

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