सत्ता बदले के लिए नहीं, बदलाव के लिए होती है : जयराम ठाकुर

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सदन में हमने स्पीकर से विधानसभा की गरिमा बचाने की गुहार लगाई थी

अपनी कुर्सी को अपने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों को प्रताड़ित करने का साधन न बनाएँ मुख्यमंत्री

एएम नाथ। कुल्लू : पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने व्यवस्था परिवर्तन वाली सुक्खू सरकार के कानून को असंवैधानिक बताते हुए कांग्रेस के बागी विधायकों की पेंशन की बहाली के आदेश का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि यह न्याय की जीत है और बदले की भावना से की जा रही कार्रवाई और तानाशाही की हार है। सरकार व्यवस्था परिवर्तन के नाम पर लगातार असंवैधानिक कार्य करती जा रही है, जिसके कारण आए दिन माननीय न्यायालय में सरकार की फजीहत होती है।
आज अपने फैसले में माननीय न्यायालय द्वारा सरकार पर की गई टिप्पणी ‘कानून बदले के लिए नहीं, भविष्य के लिए होते हैं’ सरकार की हर असंवैधानिक गतिविधि पर एक तमाचा है। मुख्यमंत्री को समझना चाहिए कि सत्ता उनके अहं की संतुष्टि और राजनीतिक प्रतिशोध का साधन नहीं है।
जयराम ठाकुर ने कहा कि प्रदेश की विधानसभा को मुख्यमंत्री के राजनीतिक प्रतिशोध का मंच बनने से रोकने के लिए हमने स्पीकर से गुहार भी लगाई थी। विधानसभा में यह बात हमने लगातार कही, बार-बार कही कि ऐसे कानून मत बनाओ जो कानून की कसौटी पर एक मिनट भी न टिक पाएँ। इस माननीय सदन में बनाया गया कानून अगर अदालत में संविधान की कसौटी पर खरा नहीं उतरता है, तो इससे इस माननीय सदन की गरिमा गिरती है। इस सदन की एक गरिमा है, उसका ध्यान रखा जाए। हमने विधानसभा के भीतर भी माननीय विधानसभा अध्यक्ष को आगाह किया था कि राजनीतिक प्रतिशोध की भावना में ऐसे कानून बनाने की इजाजत न दें, जो कानून की कसौटी पर एक मिनट भी न टिक पाएँ।
जयराम ठाकुर ने कहा कि एक नहीं, दर्जनों बार इस सरकार के नीतिगत फैसले माननीय उच्च न्यायालय द्वारा असंवैधानिक ठहराते हुए खारिज किए गए हैं। हर दिन मुख्यमंत्री के असंवैधानिक कार्यों की वजह से हिमाचल प्रदेश चर्चा में होता है और पूरे प्रदेश की किरकिरी होती है। यह सरकार व्यवस्था परिवर्तन के नाम पर संविधान की धज्जियाँ उड़ाने से बाज नहीं आ रही है। सलाहकारों और वकीलों की फौज के बावजूद भी मुख्यमंत्री हर दिन असंवैधानिक फैसले क्यों लेते हैं, जिससे प्रदेश के संसाधन और सरकार की ऊर्जा न्यायालय में खर्च होती है।
सिर्फ पंचायत चुनाव में ही मुख्यमंत्री को पांच बार माननीय उच्च न्यायालय की फटकार पड़ चुकी है। व्यवस्था परिवर्तन वाली सुक्खू सरकार का शायद ही कोई नीतिगत फैसला होगा, जो कानून की कसौटी पर खरा उतर पाया हो। मुख्यमंत्री से निवेदन है कि राजनीतिक प्रतिशोध के बजाय बड़े दिल से, खुले मन से प्रदेशवासियों के हितों के लिए काम करें।

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