सरकारी और निजी अस्पतालों के डॉक्टर 24 घंटे की पेन डाउन स्ट्राइक : हिमाचल प्रदेश में रही शनिवार को चिकित्सा सेवाएं बाधित

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एएम नाथ। शिमला : हिमाचल प्रदेश के डाक्टर सरकार से नाराज हैं। उनकी नाराजगी न केवल चिकित्सकों को सही प्रोटेक्शन न ं मिल पाने से है, बल्कि कई और मुद्दे हैं, जिनको बार-बार सरकार से उठाने पर केवल आश्वासन मिल रहे हैं। अब जल्द ही उनकी मांगों को सरकार ने पूरा नहीं किया, तो आने वाले समय में यह लोग दोबारा से संघर्ष पर उतरेंगे, जिससे आम जनता को सबसे अधिक परेशानी होगी। इन दिनों देश भर के चिकित्सक संघर्ष कर रहे हैं, क्योंकि कोलकाता में एक महिला डाक्टर के साथ अमानवीय व्यवहार हुआ है।

हिमाचल प्रदेश में भी चिकित्सक विरोध में उतरे हैं, जिन्होंने शनिवार को चिकित्सा सेवाएं बाधित कीं। शनिवार सुबह से सरकारी और निजी अस्पतालों के डॉक्टर 24 घंटे की पेन डाउन स्ट्राइक पर चले गए। हड़ताल से प्रदेश भर में ओपीडी सेवाएं प्रभावित हैं। हालांकि, आपातकालीन सेवाएं जारी हैं। हिमाचल चिकित्सा अधिकारी संघ के महासचिव डा. विकास ठाकुर ने कहा कि प्रदेश के स्वास्थ्य संस्थानों में सुरक्षा व्यवस्था स्टेट हेल्थ प्रोटेक्शन एक्ट जो कि केंद्रीय हेल्थ प्रोटेक्शन एक्ट के तहत है, को शीघ्र अति शीघ्र लागू किया जाए, क्योंकि यहां पर डाक्टरों के साथ अनैतिक व्यवहार की घटनाएं पूर्व में पेश आ चुकी हैं। इस संदर्भ में भी संघ ने चिकित्सकों की सुरक्षा के साथ-साथ हेल्थ इंस्टीट्यूशन में हैल्थ केयर पर्सन फॉर हैल्थ केयर प्रोफेशनल्स और इंस्टीट्यूशन प्रॉपर्टी प्रोटेक्शन एक्ट के तहत नियम लागू करने की मांग कर रखी है, लेकिन वर्षों बीत जाने के बाद भी इस समस्या को स्वास्थ्य विभाग के द्वारा दरकिनार कर दिया गया। आज भी हिमाचल प्रदेश स्वास्थ्य संस्थानों में सुरक्षा व्यवस्था स्टेट हैल्थ प्रोटेक्शन एक्ट के तहत नहीं है, जिससे उनमें नाराजगी है। उन्होंने कहा कि चिकित्सकों की ड्यूटी करने की अवधि निर्धारित की जाए क्योंकि वर्तमान में इसकी कोई समयावधि नहीं है। कई जगहों पर राजकीय सेवाएं देने के लिए स्टाफ नर्सों और महिला चिकित्सकों एवं चिकित्सकों की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम न होने के कारण एक खौफ का माहौल बन गया है। इससे उन्हें मानसिक प्रताडऩा का सामना करना पड़ रहा है।

संघ की सरकार से मांग है कि प्रदेश के समस्त हेल्थ प्रोफेशनल्स की सुरक्षा व्यवस्था और हेल्थ प्रोटेक्शन नियम शीघ्र लागू किए जाएं। हिमाचल में भी चिकित्सक कई संस्थानों पर दिन-रात सेवाएं दे रहे हैं। स्वास्थ्य संस्थान जहां रात्रि सेवाएं दी जाती हैं, वहां कोई भी चिकित्सक तैनात नहीं है तो इधर-उधर से डेपुटेशन करके जुगाड़ के सहारे स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान की जा रही है। वहीं कई जगह पर एक या दो चिकित्सक हैं। वहां यह तो एक.एक माह तक दिन.रात सेवाएं देनी पड़ रही है या 15-15 दिन दैनिक और 15 दिन रात्रि सेवाएं देनी पड़ रही है। संघ ने मांग की है कि चिकित्सकों की ड्यूटी करने की अवधि निर्धारित की जाए और ऐसे संस्थानों को सुदृढ़ किया जाए। डा. विकास ठाकुर ने कहा कि सरकार आदर्श स्वास्थ्य केंद्र समर्पित कर रही है लेकिन चिकित्सकों को पहले 1 साल के बाद ही पीजी करने के लिए भेज दिया जाता था, लेकिन अब उन्हें 1 से 4 साल के बाद पीजी करने के लिए भेजा जा रहा है और उनके इंसेंटिव माक्र्स भी इस अवधि को पूरा करने के बाद दिए जा रहे हैं। इसे पहले की तर्ज पर उनके डेट ऑफ ज्वाइनिंग से जोड़ा जाए। इस संदर्भ में पहले भी संघ कई बार संशोधन करने की मांग उठा चुका है लेकिन कोई भी ठोस कदम इस संदर्भ में विभाग ने नहीं उठाया है। उन्होंने कहा कि संघ ने अपनी मांगें कई बार स्वास्थ्य विभाग के सामने रखी। इस संदर्भ में 56 दिन संघर्ष का रास्ता भी अपनाया। हर बार संघ को आश्वासन दिया जाता है और विभाग उनकी मांगों को लेकर कोई भी सुनवाई नहीं करता है। इतना ही नहीं संघ के पदाधिकारियों को ट्रांसफर करके प्रताडि़त किया जा रहा है जिसे किसी भी सूरत में सहन नहीं किया जाएगा।

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