सराज के आपदा प्रभावित क्षेत्रों में प्रभावितों से राजस्व मंत्री ने की मुलाकात, नुकसान का जायजा लिया

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कृषि व बागवानी फसलों को हुए नुकसान का संयुक्त तौर पर मूल्यांकन करेंगे विभागीय अधिकारी- जगत सिंह नेगी
एएम नाथ।  मंडी, 25 जुलाई।  राजस्व, बागवानी, जनजातीय विकास एवं जन शिकायत निवारण मंत्री जगत सिंह नेगी ने आज सराज विधानसभा क्षेत्र में आपदा से प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया और नुकसान का जायजा लिया। इस दौरान वे प्रभावितों से मिले और उनके दुःख-दर्द साझा किए।
उन्होंने ग्राम पंचायत पखरैर के देज़ी, थुनाग बाजार, लंबाथाच, जरोल, पांडव शिला तथा ग्राम पंचायत धारजरोल, बायोड, बुंग रैलचौक, शोढाधार, जंजैहली और ढीमकटारू व ग्राम पंचायत संगलवाड़ा में प्रभावित गांवों का दौरा कर लोगों का हाल जाना। राजस्व मंत्री ने लोक निर्माण विभाग, जल शक्ति विभाग और राज्य विद्युत बोर्ड द्वारा चलाए जा रहे पुनर्निर्माण कार्यों की स्थल पर जाकर जानकारी ली तथा अधिकारियों को इसमें और तेजी लाने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि आपदा की इस घड़ी में प्रदेश सरकार प्रभावितों के साथ मजबूती के साथ खड़ी है। प्राकृतिक आपदा के उपरांत मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू स्वयं यहां पहुंचे और ग्राऊंड जीरो पर रहकर राहत एवं पुनर्वास कार्यों को गति प्रदान की। मंत्रिमंडल के सहयोगी भी निरंतर यहां दौरा कर रहे हैं। प्रशासनिक व विभागीय अधिकारी यहां सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए दिन-रात कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सम्पर्क सड़कों की बहाली के लिए युद्ध स्तर पर कार्य किया जा रहा है। जल शक्ति विभाग द्वारा अधिकांश पेयजल योजनाएं आंशिक तौर पर बहाल कर ली गई हैं।
राजस्व मंत्री ने कहा कि जिन लोगों के मकान इस आपदा में पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हुए हैं, उन्हें पुनः घर बनाने के लिए सात-सात लाख रुपए प्रदान करने की घोषणा मुख्यमंत्री ने की है। देश में प्रभावितों को मिलने वाली यह सर्वाधिक मुआवजा राशि है। उन्होंने कहा कि मकान बनाने के लिए भूमि उपलब्ध करवाना सबसे बड़ी चुनौती है। चूंकि हिमाचल में खाली पड़ी जमीन वन भूमि के अंतर्गत आती है और वन संरक्षण अधिनियम (एफसीए) के तहत यह भूमि बदले में देने का प्रावधान नहीं है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2023 की आपदा के उपरांत प्रदेश विधानसभा से एक प्रस्ताव पारित कर केंद्र को भेजा गया था जिसमें इस नियम में छूट देने के लिए एक्ट में संशोधन का आग्रह किया गया है। हालांकि अभी यह प्रस्ताव केंद्र सरकार के पास लंबित है। उन्होंने कहा कि यहां प्रभावित हुए ऐसे लोग जिनकी वन भूमि पर जीवनचर्या निर्भर करती है, वे पात्रता अनुसार वन अधिकार अधिनियम (एफआरए) के तहत भी भूमि ले सकते हैं।
जगत सिंह नेगी ने कहा कि प्रभावित क्षेत्रों में लोगों की कृषि व बागवानी फसलों को हुए नुकसान का मूल्यांकन बागवानी, कृषि व राजस्व विभाग के अधिकारी संयुक्त रूप से करेंगे। खेती योग्य व बागवानी भूमि को हुए नुकसान पर मिलने वाले मुआवजे में भी प्रदेश सरकार ने वर्ष 2023 के राहत पैकेज के तहत बढ़ोतरी की है। इसके अतिरिक्त पशु धन को हानि पर भी मुआवजा राशि बढ़ाई गई है।
इसके उपरांत राजस्व मंत्री ने राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला निहरी सुनाह तथा राजकीय महाविद्यालय लंबाथाच का निरीक्षण भी किया। महाविद्यालय के प्रिंसिपल विक्रम ठाकुर ने अवगत करवाया कि कॉलेज में अभी तक 395 छात्र-छात्राओं ने प्रवेश लिया है।
इस अवसर पर मिल्क फेड के पूर्व अध्यक्ष चेत राम ठाकुर, एचपीएमसी के निदेशक जोगिंदर गुलेरिया, हिमाचल प्रदेश निजी शिक्षण संस्थान नियामक आयोग के सदस्य विजय पाल, वरिष्ठ कांग्रेस सदस्य जगदीश रेड्डी, पूर्व युवा जिला अध्यक्ष तरुण ठाकुर, एसडीएम थुनाग रमेश कुमार सहित चुने हुए जनप्रतिनिधि और संबंधित विभागों के उच्चाधिकारी भी उपस्थित थे।
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