सवा 5 साल बाद सजा ए मौत …पत्नी लाती थी बच्चे….JE पति करता कुकर्म, फिर डार्क वेब पर बिकती थीं चीखें

by

चित्रकूट: उत्तर प्रदेश के सूखे, शांत और आधे-अधूरे सपनों से भरे बुंदेलखंड में बसे शहर बांदा, चित्रकूट और हमीरपुर ने बहुत कुछ देखा है. गरीबी, पलायन, सूखा और संघर्ष… लेकिन जो सच साल 2020 के बाद धीरे-धीरे सामने आया, उसने इन शहरों की आत्मा तक को झकझोर दिया।

यह कहानी सिर्फ एक अपराध की नहीं, बल्कि उस अंधेरे की है, जो इंसान के भीतर पलता है और मौका मिलते ही राक्षस बनकर बाहर आ जाता है. यह कहानी है सिंचाई विभाग के एक निलंबित जूनियर इंजीनियर रामभवन और उसकी पत्नी दुर्गावती की, एक ऐसा दंपती जिसने भरोसे को हथियार बनाया, मासूमियत को जाल में फंसाया और इंसानियत को शर्मसार कर दिया।

यह है मामला
हम बात कर रहे हैं चित्रकूट में सिंचाई विभाग के निलंबित जूनियर इंजीनियर (जेई) रामभवन और उसकी पत्नी दुर्गावती की. इस दंपति ने सबसे भयानक मिसाल पेश की है. 50 से ज्यादा मासूम बच्चों का यौन शोषण कर उनके वीडियो डार्क वेब और विदेशी पोर्न साइट्स पर बेचने वाले इस दरिंदे दंपती को आखिरकार अदालत ने फांसी की सजा सुना दी है. सीबीआई की जांच में सामने आया यह मामला सिर्फ बाल यौन शोषण का नहीं था, बल्कि मासूमों की आड़ में चल रहे एक बड़े अंतरराष्ट्रीय साइबर क्राइम का भी पर्दाफाश था।

आइए जानते हैं सबकुछ..

रामभवन बाहर से बिल्कुल साधारण आदमी लगता था. सरकारी नौकरी, पढ़ा-लिखा चेहरा, कम बोलने वाला स्वभाव. उसने कभी विभागीय आवास की मांग नहीं की. हमेशा किराए के मकान में रहा. मोहल्ले वाले कहते थे- अलग-थलग रहता है, ज्यादा मेलजोल नहीं. वहीं, उसकी पत्नी दुर्गावती भी चुपचाप रहने वाली महिला के रूप में जानी जाती थी. शादी को कई साल बीत चुके थे, लेकिन उनकी कोई संतान नहीं थी. बाहर से देखने पर वे एक सामान्य, निःसंतान दंपती लगते थे, जो अपनी दुनिया में सिमटा हुआ था. मगर, इस चुप्पी के पीछे एक खौफनाक योजना धीरे-धीरे आकार ले रही थी।

बच्चों के सामने बिछाया लालसा का जाल
दुर्गावती ने अपने आसपास के गरीब परिवारों के बच्चों को निशाना बनाना शुरू किया. 5 से 16 साल उम्र के बच्चों को महंगा मोबाइल, घड़ी या चॉकलेट का लालच देती. बेचारे बच्चे समझते कितनी अच्छी आंटी हैं. उनके लिए ये सामान किसी खजाने से कम नहीं था. वह बच्चों से अपनापन जताती. कभी मिठाई देती, कभी पेन, कभी कपड़े. धीरे-धीरे बच्चे उसके घर आने लगे. पड़ोसियों को यह सब कुछ सामान्य लगता था. मगर, हर बार जब घर का दरवाजा बंद होता, तो एक बच्चे की मासूमियत छीन ली जाती थी।

हवस से बड़ा था लालच
रामभवन का मकसद केवल हवस को मिटाना नहीं था. बल्कि वह पैसे का भूखा था. उसने अपराध को कारोबार बना दिया था. घर के अंदर बच्चों की अश्लील तस्वीरें और वीडियो बनाए जाते. फिर वे फाइलें इंटरनेट के उस अंधेरे हिस्से में पहुंचाई जातीं, जहां पहचान छुपाकर गुनाह खरीदे-बेचे जाते हैं. वह डार्क वेब और विदेशी पोर्न साइट्स के जरिए इन वीडियो को बेचता था. ईमेल की जांच की गई तो सामने आया कि वह देश-विदेश के कई गिरोहों के संपर्क में था. यह कोई अकेला अपराध नहीं था- यह एक अंतरराष्ट्रीय साइबर नेटवर्क से जुड़ा संगठित अपराध था. अगर कोई बच्चा किसी तरह का विरोध करता तो उसे उन्हीं तस्वीरों के जरिए ब्लैकमेल किया जाता. साथ ही परिवारों को भी धमकी दी जाती. इस पर गरीब परिवार, जिनके पास इज्जत ही सबसे बड़ी पूंजी थी, खामोश हो जाते और इसी खामोशी में कई साल बीत गए।

इंटरपोल से आया पहला संकेत
17 अक्टूबर 2020 को भारत की प्रमुख जांच एजेंसी केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को एक चौंकाने वाली सूचना मिली. यह सूचना अंतरराष्ट्रीय पुलिस संगठन इंटरपोल से आई थी. एक पेन ड्राइव में 34 बच्चों से जुड़े वीडियो और 679 तस्वीरें थीं. डिजिटल ट्रैकिंग से पता चला कि इनका स्रोत बुंदेलखंड का एक सरकारी इंजीनियर है. 31 अक्टूबर 2020 को नई दिल्ली में केस दर्ज हुआ. जांच की कमान डीएसपी अमित कुमार को सौंपी गई. अब तक जो अंधेरा घर की चारदीवारी में छुपा था, वह जांच की रोशनी में आने लगा।

इस दिन हुआ था गिरफ्तार
16 नवंबर 2020 को इस पूरे मामले से परदा हट गया. चित्रकूट की एसडीएम कॉलोनी को सीबीआई की 10 सदस्यीय टीम ने चुपचाप घेर लिया. दरवाजा खुला तो अंदर जो मिला, उसने जांच अधिकारियों तक को हिला दिया. 8 मोबाइल फोन, एक लैपटॉप, पेन ड्राइव, मेमोरी कार्ड, सेक्स टॉयज, 8 लाख रुपये नकद और डिजिटल फोल्डरों में छुपी 66 वीडियो और 600 से ज्यादा तस्वीरें. कुछ ही दिनों बाद दुर्गावती भी गिरफ्तार कर ली गई।

गवाही ऐसी कि कांप गई रूह
अब यह मामला केवल स्थानीय पुलिस का नहीं रहा था. यह राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय अपराध का केस बन चुका था. जांच के दौरान कई बच्चों को मेडिकल जांच के लिए एम्स दिल्ली भेजा गया. डॉक्टरों की टीम ने जो देखा, उसने उन्हें अंदर तक हिला दिया. कोर्ट में जब उन्होंने गवाही दी, तो शब्द कांप रहे थे. कुछ बच्चों की आंखों में स्थायी डर था. कुछ शारीरिक रूप से गंभीर रूप से आहत थे. मगर, सबसे गहरा घाव उनके मन पर था. कई बच्चे अब भी अंधेरे कमरे से डरते थे. किसी अजनबी की मुस्कान उन्हें सिहरन दे जाती थी. कोर्ट में पेश हुए 25 पीड़ित बच्चों ने जब बयान दिए, तो पूरा माहौल भारी हो गया. यह केवल कानूनी प्रक्रिया नहीं थी, यह मासूमियत की चीख थी।

  • 24 फरवरी 2021 को बांदा कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की गई.
  • 2023 में आरोप तय हुए. रामभवन और दुर्गावती ने खुद को निर्दोष बताया.
  • 5 जून 2023 से विशेष पॉक्सो कोर्ट में सुनवाई शुरू हुई.
  • 74 गवाह पेश हुए. बच्चे, डॉक्टर, शिक्षक, डिजिटल विशेषज्ञ सब शामिल थे.

हर गवाही के साथ अपराध का एक नया पहलू सामने आता. हर डिजिटल सबूत अदालत के सामने एक और दरवाजा खोलता, जिसके पीछे घिनौनी सच्चाई छुपी थी।

अब मिला न्याय
20 फरवरी 2026 का सबसे ज्यादा दिन अहम था. इसी दिन इन मासूमों को न्याय मिला. बांदा की विशेष पॉक्सो अदालत में 163 पन्नों का फैसला पढ़ा गया. जज प्रदीप कुमार मिश्रा ने कहा कि यह अपराध विरल से विरलतम की श्रेणी में आता है. कोर्ट ने दोनों दोषियों को मौत होने तक फांसी पर लटकाए जाने की सजा सुनाई. वहीं, हर पीड़ित बच्चे को एक-एक लाख रुपये की क्षतिपूर्ति दिए जाने को कहा. राज्य और केंद्र सरकार को 10-10 लाख रुपये सहायता देने का आदेश दिया. फैसले के समय कोर्ट में सन्नाटा था. यह केवल सजा नहीं थी. यह समाज की ओर से एक संदेश था कि मासूमियत के खिलाफ अपराध को बख्शा नहीं जाएगा।

समाज के लिए सवाल

  1. क्या हम अपने आसपास के बच्चों की सुरक्षा के प्रति सचेत हैं?
  2. क्या डिजिटल दुनिया के अंधेरे को हम समझते हैं?
  3. क्या गरीबी बच्चों को सबसे आसान शिकार बना देती है?
  4. जिन बच्चों की हंसी छिन गई, उनका बचपन कौन लौटाएगा?

बुंदेलखंड की सूखी हवा अब भी वैसी ही चलती है. मंदिरों की घंटियां अब भी बजती हैं. स्कूलों में बच्चे अब भी खेलते हैं. मगर, इस घटना ने सिखाया है कि राक्षस कभी-कभी साधारण चेहरे के पीछे छुपा होता है. यह कहानी डराती है, क्योंकि यह किसी भूत की नहीं, बल्कि इंसान के भीतर के अंधेरे की है और शायद यही सबसे बड़ा खौफ है कि कभी-कभी खतरा बाहर नहीं, हमारे बीच ही रहता है।

Share
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  

You may also like

article-image
पंजाब

Vastu Expert Warns: Debris in

Hoshiarpur/Daljeet Ajnoha/Dec.17 : Violating Vastu principles—from laying the foundation to painting—can lead to various problems in building construction, says internationally renowned Vastu expert and author Dr. Bhupendra Vastu Shastri.In today’s urban landscape, high-rise buildings...
article-image
हिमाचल प्रदेश

दुष्कर्म पीड़िता का किया था गलत ढंग से मेडिकल टेस्‍ट : हाईकोर्ट ने डॉक्‍टरों पर लगाया पांच लाख का जुर्माना

शिमला :    दुष्कर्म पीड़िता की चिकित्सा जांच कानून के विपरीत किए जाने पर प्रदेश हाईकोर्ट ने सिविल हॉस्पिटल पालमपुर के डॉक्टरों पर पांच लाख रुपए का हर्जाना लगाया है। हाईकोर्ट ने इस राशि...
article-image
दिल्ली , पंजाब , राष्ट्रीय , हरियाणा , हिमाचल प्रदेश

पीएम मोदी के दौरे से एक दिन पहले जालंधर में बम धमाके की धमकी… सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट

जालंधर :   प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पंजाब दौरे से ठीक एक दिन पहले जालंधर में एक बार फिर सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ गई है। शहर के चार प्रमुख स्कूलों को बम धमाके से...
article-image
पंजाब , हिमाचल प्रदेश

सांसद श्री हर्ष महाजन की पंजाब के राज्यपाल श्री गुलाब चंद कटारिया जी से शिष्टाचार भेंट

एएम नाथ। चंडीगढ़ : पंजाब राज भवन, चंडीगढ़ में शुक्रवार को हिमाचल प्रदेश से राज्यसभा सांसद श्री हर्ष महाजन ने पंजाब के माननीय राज्यपाल श्री गुलाब चंद कटारिया जी से शिष्टाचार भेंट की। इस...
Translate »
error: Content is protected !!