सांसद मनीष तिवारी ने लोकसभा में उठाया सुखना झील का मुद्दा : झील को उसकी मूल स्थिति में बहाल करने की मांग

by

नई दिल्ली/चंडीगढ़, 20 मार्च: चंडीगढ़ से सांसद मनीष तिवारी ने लोकसभा में चंडीगढ़ की असली विरासत मानी जाने वाली सुखना झील की बहाली का मुद्दा जोरदार तरीके से उठाया है। उन्होंने लोकसभा में नियम 377 के तहत बोलते हुए, झील के तेजी से घटते आकार पर चिंता व्यक्त की है और कहा है कि इसका एक बड़ा कारण इसके कैचमेंट क्षेत्र में हो रहे अवैध कब्जे हैं।

इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाते हुए, तिवारी ने कहा कि वह जनहित से जुड़े एक महत्वपूर्ण विषय की ओर सदन का ध्यान आकर्षित करना चाहते हैं, जो कि सुखना झील की चिंताजनक स्थिति से संबंधित है। उन्होंने कहा कि जब इस झील का निर्माण किया गया था, तब इसका जल फैलाव क्षेत्र और गहराई काफी अधिक थी और इसे एक महत्वपूर्ण वर्षा जल संचयन प्रणाली के रूप में डिजाइन किया गया था, जो क्षेत्र में जल रिचार्ज, बाढ़ नियंत्रण और पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में सहायक थी। उन्होंने कहा कि समय के साथ झील का आकार, गहराई और जल भंडारण क्षमता लगातार जमा हो रही गाद और उस पर पर्याप्त ध्यान न दिए जाने के कारण काफी कम हो गई है।

तिवारी ने कहा कि विशेषज्ञों द्वारा कई बार चेतावनी देने के बावजूद झील की वैज्ञानिक तरीके से निरंतर डी-सिल्टिंग नहीं की गई। उन्होंने खुलासा किया कि 1980 के दशक के अंत के बाद कोई गंभीर डी-सिल्टिंग नहीं हुई, जब तत्कालीन राज्यपाल सिद्धार्थ शंकर रे ने लोगों, खासकर स्कूली विद्यार्थियों की भागीदारी से श्रमदान अभियान चलाकर झील की सफाई करवाई थी। इसके परिणामस्वरूप झील के कई हिस्से, जो थोड़े बहुत गहरे रह गए थे, अब सूखने की कगार पर पहुंच गए हैं।

उन्होंने कहा कि झील के कैचमेंट क्षेत्र में अवैध निर्माण और कब्जे भी तेजी से बढ़े हैं, जिससे प्राकृतिक जल निकासी के रास्ते बाधित हो रहे हैं और झील में गाद आने की गति तेज हो रही है। उन्होंने यह भी बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने भी सुखना झील की खराब होती स्थिति और घटते जल स्तर पर गंभीर चिंता व्यक्त की है।

तिवारी ने याद किया कि जब वह 1970 के दशक के अंत में स्कूल के छात्र थे और झील में बोटिंग करते थे, तब लेक क्लब की ओर कुछ स्थानों पर केवल तीन फुट पानी हुआ करता था। उन्होंने कहा कि यह समस्या पिछले पांच दशकों से जारी है।

इस संदर्भ में उन्होंने नियम 377 के माध्यम से भारत सरकार से मांग की कि अवैध निर्माणों को हटाया जाए, कैचमेंट क्षेत्र की बहाली और संरक्षण सुनिश्चित किया जाए, झील की व्यापक डी-सिल्टिंग कराई जाए तथा दीर्घकालिक पर्यावरणीय पुनर्स्थापन के उपाय तत्काल, व्यापक और समयबद्ध तरीके से लागू किए जाएं, ताकि इस महत्वपूर्ण शहरी जल स्रोत को सुरक्षित रखा जा सके।

Share
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  

You may also like

पंजाब , हिमाचल प्रदेश

 21 से 31 मार्च तक लगने वाली मैड़ी मेले की सफलता के लिए डिप्टी कमिश्नर ऊना ने की बैठक, पंजाब के अधिकारियों के साथ चर्चा

मैड़ी होली मेले में 28 मार्च को चढ़ेगा झंडा, ओवर लोडिंग रोकने के लिए पंजाब से सहयोग की मांग ऊना/होशियारपुर, 23 फरवरी हिमाचल प्रदेश के जिला ऊना में 21 से 31 मार्च तक लगने...
article-image
पंजाब

सोशल वेलफेयर सोसायटी गढ़शंकर द्वारा बिभिन्न स्कूलों में आयोजित ‘धार्मिक और नैतिक परीक्षा-2025’ की लिखित परीक्षा में 351 विधार्थियों ने लिया हिस्सा

गढ़शंकर ।  सोशल वेलफेयर सोसायटी रजि. गढ़शंकर ने अलग-अलग स्कूलों में ‘धार्मिक और नैतिक परीक्षा-2025’ की लिखित परीक्षा करवाई, जिसका विषय छोटे साहिबज़ादे, बाबा ज़ोरावर सिंह, बाबा फ़तेह सिंह और माता गूजर कौर जी...
article-image
पंजाब , समाचार

2 किलो हेरोइन, 5 पिस्टल समेत 9 तस्कर गिरफ्तार ….पाक से मंगवाते थे ड्रग्स

अमृतसर  :  अमृतसर पुलिस ने ड्रग्स और हथियार तस्करों को गिरफ्तार किया है। नशा व अवैध हथियारों की सप्लाई करने वाले नौ तस्करों को जिला शहरी पुलिस ने तीन अलग-अलग मामलों में गिरफ्तार किया...
Translate »
error: Content is protected !!