सुखबीर बादल को लगा बड़ा झटका, रंजीत सिंह गिल ने छोड़ी पार्टी; गंभीर आरोप भी लगा दिए

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चंडीगढ़ । खरड़ विधानसभा सीट से शिरोमणि अकाली दल के मजबूत स्तंभ और बड़े कारोबारी रंजीत सिंह गिल भी आज पार्टी को अलविदा कह गए हैं। जाते-जाते हुए उन्होंने भी यही कहा है कि अब शिरोमणि अकाली दल में काम करने वाले नेताओं को कोई नहीं पूछ रहा।

रंजीत सिंह गिल, जिन्होंने 2022 का विधानसभा चुनाव भी लड़ा था और आम आदमी पार्टी को कड़ी टक्कर दी थी, के चले जाने से शिअद को तो जहां झटका लगा ही और इससे पार्टी प्रधान सुखबीर बादल को निजी तौर पर नुकसान हुआ है। गिल, सुखबीर बादल के करीबी नेताओं में माने जाते हैं।

एक तरफ 20 जुलाई से शिरोमणि अकाली दल जहां तरनतारन विधानसभा उपचुनाव को देखते हुए गांव झबाल में बड़ी रैली करके अपने पैर जमाने की काेशिश कर रहा है। वहीं, एक ही हफ्ते में गिल ऐसे दूसरे बड़े नेता हैं, जो पार्टी को अलविदा कह गए हैं।

किस पार्टी का थामेंगे दामन, नहीं किया क्लियर

गिल ने अभी यह नहीं बताया कि वह किस पार्टी में जाएंगे, लेकिन तरनतारन में पार्टी के एक और मजबूत स्तंभ और सुखबीर के करीबियों में माने जाने वाले तीन बार के पूर्व विधायक हरमीत सिंह संधू आम आदमी पार्टी में शामिल हो गए।

इससे सुखबीर बादल की लीडरशिप पर एक बार फिर से दबाव बढ़ने लगा है। श्री अकाल तख्त साहिब से बनाई गई पांच सदस्यीय भर्ती कमेटी ने भी 22 जुलाई से जिला और प्रांतीय डेलीगेट बनाने की घोषणा कर दी है।

हलका चमकौर साहिब के प्रभारी करण सिंह डीटीओ भी इस पांच सदस्यीय कमेटी के साथ हो गए हैं। उनकी पत्नी वरिंदर कौर लूंबा भी शतुराणा हलके से पार्टी की विधायक रह चुकी हैं।

ऐसा नहीं है कि सुखबीर बादल को केवल दूसरे हलकों में ही नुकसान हो रहा है बल्कि उनके गृह जिले मुक्तसर में उनके सबसे करीबी माने जाने वाले हरदीप सिंह डिंपी डिल्लों भी आम आदमी पार्टी में शामिल हो गए। वह उपचुनाव जीतकर गिदड़बाहा हलके से विधायक बन गए हैं।

विधानसभा में पार्टी के ग्रुप लीडर मनप्रीत अयाली पहले ही उनसे अलग हो चुके हैं और इस समय भर्ती कमेटी के एक प्रमुख सदस्य हैं। इसी तरह एक और विधायक डॉ. सुखविंद कुमार सुक्खी भी पार्टी को छोड़कर आप में शामिल हो चुके हैं। पूर्व विधायक पवन टीनू भी आप में शामिल हो गए हैं।

पार्टी लीडरशिप नाराज होकर पूर्व मंत्री बीबी जगीर कौर, परमिंदर सिंह ढींडसा, सुरजीत सिंह रखड़ा, प्रो प्रेम सिंह चंदूमाजरा, पूर्व हरिंदर सिंह चंदूमाजरा, पूर्व विधायक इकबाल सिंह झूंदा, गुरप्रताप सिंह वडाला पहले ही पार्टी को अलविदा कह चुके हैं।

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