स्ट्राॅबेरी की खेती से प्रति माह अर्जित कर रहे 45 से 50 हज़ार रूपये : विवेक जोशी प्राकृतिक विधि से तैयार कर रहे विंटरडाॅन व कामारौसा किस्म की स्ट्राॅबेरी

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स्ट्राॅबेरी की खेती से विवेक को मिल रही एक अलग पहचान
ऊना – केंद्र व प्रदेश सरकार द्वारा अनेकों योजनाएं संचालित की जा रही है। इन योजनाओं का लाभ लेकर बेराजगार युवा आत्मनिर्भर होकर अपनी आर्थिकी को सुदृढ़ कर सकते हैं। जिला ऊना के गांव बदोली के रहने वाले किसान विवेक जोशी को अब गांव में एक नई पहचान मिली है, उन्होंने एक अलग हटकर स्ट्राॅबेरी की फसल की खेती करके नया मुकाम हासिल किया है, बल्कि अन्य किसानों-बागवानों के लिए भी एक प्रेरणा का स्रोत बने हुए हैं। वर्तमान में वह स्ट्राॅबेरी की फसल की पैदावार 2 कनाल जमीन पर कर रहे हैं तथा तैयार स्ट्राॅबेरी को वह डिब्बों में पैक करके ऊना में बेचते हैं जहां उन्हें अच्छे दाम मिल रहे हैं।
जिला ऊना के गांव बदोली के किसान विवेक जोशी प्राकृतिक तकनीकी से स्ट्राॅबेरी की खेती करके लाभान्वित हो रहे हैं। विवेक जोशी बताते हैं कि भारतीय थल सेना से सेवानिवृत्ति होने के उपरांत उन्होंने तय किया कि आय के साधन बढ़ाने के लिए घर में ही कुछ कार्य किया जाए। उन्होंने अपनी ज़मीन पर प्राकृतिक विधि से स्ट्राॅबेरी की खेती करने के बारे में सोचा तथा बागवानी विभाग विभाग के अधिकारियो ंसे मिले और उनके सहयोग से स्ट्राॅबेरी की खेती करना आरंभ किया। विवेक जोशी स्ट्राॅबेरी के अलावा अन्य सब ट्राॅपिक्ल फसलों जिसमें सेब, पलम, चैरी, बादाम, नाशपती, डैªगन फू्रट सहित अन्य सब ट्राॅपिक्ल फसलों की खेती भी कर रहे हैं।
विवेक जोशी ने बताया कि वह विंटरडाॅन और कामारौसा दो अच्छी किस्म की स्ट्राॅबेरी की प्राकृतिक विधि से खेती कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि स्ट्राॅबेरी की दोनों किस्में स्वास्थ्य के लिए काफी पोष्टिक भी है और स्वाद में मीठी है। स्ट्राॅबेरी की फसल सितंबर माह में लगाई जाती है और अक्तूबर के अंत तक फल देना आरंभ कर देती है। स्ट्राॅबेरी की ये दोनों किस्में काफी लंबे समय तक यानि अक्तूबर माह के अंत से जून तक फल देती हंै।
विवेक जोशी बताते हैं कि अप्रैल से जून माह में मार्किट में स्ट्राॅबेरी काफी कम होती है जिससे इस फल की मांग बढ़ने के कारण मार्किंट में अच्छे दाम मिलते हैं। विवेक ने बताया कि उद्यान विभाग की ओर से प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत अनुदान पर ड्रिप सिंचाई सिस्टम तकनीक से पानी की सुविधा उपलब्ध करवाई गई है। ड्रिप सिंचाई सिस्टम विधि से लेबर की बचत भी हो रही है और पानी की बर्वादी भी न के बराबर है।
विवेक जोशी वर्तमान में पांच कनाल भूमि पर प्राकृतिक तकनीक से विभिन्न सब ट्राॅपिक्ल क्रोप की खेती कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि अक्तूबर, 2022 से 2 कनाल भूमि पर स्ट्राॅबेरी की खेती करनी आरंभ की थी जिसके लिए उन्होंने 4 हज़ार स्ट्राॅबेरी के पौधे सोलन से लाए गए थे। जोकि वर्तमान में फल दे रहे हैं। उन्होंने बताया कि स्ट्राॅबेरी का एक पौधा पूरे सीज़न में कम से कम 1 किलोग्राम तक फल देता है। विवेक जोशी ने बताया कि तैयार स्ट्राॅबेरी की विक्री हेतू उन्होंने ऊना में नेचुरल पेराडाइज़ के नाम से विक्रय केंद्र खोला है जिसमें स्ट्राॅबेरी के एक बाॅक्स को मूल्य 70 रूपये की दर से बेच रहे हैं। उन्होंने बताया कि मार्किट में स्ट्राॅबेरी का मूल्य लगभग 300 रूपये प्रति किलोग्राम मिल जाता है। विवेक जोशी प्रतिमाह 45 से 50 हज़ार रूपये की स्ट्राॅबेरी बेच रहे हैं। इसके अतिरिक्त उन्होंने दो लोगों को रोजगार भी दे रखा है जोकि स्ट्राॅबेरी फसल की देखभाल करते हैं।
इसके अतिरिक्त विवेक जोशी ने अपने बगीचे में सेब, पलम, आडू, आम(पूसा, लखनऊ), चैरी, नाशपती, जापानी फल सहित अन्य सब ट्राॅपिक्ल फसलों की नर्सरी तैयार कर रहे हैं ताकि यदि कोई किसान/बागवान सब ट्राॅपिक्ल फसलों की खेती करना चाहते हंै तो उन्हें आसानी से सब ट्राॅपिक्ल फसलों की अच्छी किस्में उपलब्ध हो सके।
विवेक जोशी ने बेरोज़गार युवाओं से आहवान किया वे स्ट्राॅबेरी क्रोप को स्वरोजगार के रूप में अपना सकते हैं। क्योंकि मार्किट में इसके दाम भी अच्छे मिलते हंै और इसको तैयार करने में बहुत कम लागत आती है। उन्होंने युवाओं से अपील की है कि ज्यादा से ज्यादा स्ट्राॅबेरी की खेती अपनाकर अच्छी आमदनी अर्जित कर आत्मनिर्भर बन सकते हैं।
विषय विशेषज्ञ बागवानी विभाग केके भारद्वाज ने बताया कि बदोली गांव के विवेक जोशी स्ट्राॅबेरी की खेती नेचुरल तरीके से कर रहे हैं। नेचुरल तरीके से स्ट्राॅबेरी को तैयार करने के लिए विवेक जोशी मल्चिंग और ड्रिप सिंचाई सिस्टम का प्रयोग कर रहे हैं। केके भारद्वाज ने बताया कि निचले गर्म इलाकों में स्ट्राॅबेरी की खेती काफी अच्छी है और थोडे समय में ही फल देना आरंभ कर देती हैं जिसकी लंबे समय तक पैदावार होती है। स्ट्राॅबेरी बहुत ही पोष्टिक फल है जिसमें कैलोरी कम होती है तथा विटामिन प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। स्ट्राॅबेरी की खेती से काफी अच्छी आमदनी अर्जित की जा सकती है।
उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत 55 प्रतिशत हिस्सा केंद्र सरकार का होता है जबकि अतिरिक्त 25 प्रतिशत शेयर प्रदेश सरकार का होता है। उन्होंने बताया कि इस योजना के अंतर्गत विवेक जोशी को पांच कनाल भूमि के लिए विभाग द्वारा 20 हज़ार 500 रूपये का अनुदान दिया गया है।
केके भारद्वाज ने जिला ऊना के युवाओं से अपील की है कि वे घर बैठकर ही अपनी भूमि पर स्ट्राॅबेरी की खेती के साथ-साथ अन्य फलों की खेती करके बागवानी क्षेत्र में अच्छी आमदनी अर्जित कर सकते हैं।

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