हिमाचल हाईकोर्ट का बड़ा फैसला : सलूणी की संघनी पंचायत के 41 फर्जी मतदाताओं के वोट देने पर लगी रोक

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एएम नाथ। ​सलूणी (चंबा) : हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने निर्वाचन प्रक्रिया की शुद्धता को बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है। कोर्ट ने चंबा जिले के उपमंडल सलूणी की ग्राम पंचायत संघनी के 41 मतदाताओं के चुनाव लड़ने या मतदान करने पर तब तक के लिए रोक लगा दी है, जब तक वे सहायक निर्वाचन अधिकारी (ARO) के समक्ष अपनी रिहायश का ठोस प्रमाण प्रस्तुत नहीं कर देते।

​यह मामला संघनी निवासी हेम राज चंदेल द्वारा माननीय उच्च न्यायालय में दायर एक याचिका के बाद सामने आया। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया था कि 122 लोग ऐसे हैं जो मूलतः पंजाब, हरियाणा और जम्मू-कश्मीर में रहते हैं, लेकिन उन्होंने संघनी पंचायत की मतदाता सूची में अपने नाम दर्ज करवा रखे हैं। आरोप था कि ये लोग स्थानीय पंचायत, विधानसभा और लोकसभा चुनावों को अवैध रूप से प्रभावित करने के लिए बाहरी राज्यों से आकर मतदान करते हैं।
​SDM की अध्यक्षता में बनी जांच कमेटी
​हाईकोर्ट के कड़े संज्ञान के बाद, एसडीएम सलूणी श्री चंदरवीर सिंह ने मामले की गहनता से जांच के लिए एक 8 सदस्यीय ‘तथ्य खोज समिति’ का गठन किया। इस कमेटी की कमान नायब तहसीलदार सलूणी डी.सी. राणा को सौंपी गई।
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​कमेटी में शामिल मुख्य सदस्य
​अध्यक्ष: डी.सी. राणा (नायब तहसीलदार)
​सदस्य: दर्शन सिंह (पंचायत निरीक्षक), एसएचओ किहार, खाद्य आपूर्ति निरीक्षक, चुनाव प्रभारी (एसडीएम कार्यालय), संबंधित पंचायत सचिव और दो बूथ लेवल ऑफिसर (BLO)।
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​3 दिन में तैयार हुई विस्तृत रिपोर्ट
​जांच कमेटी ने युद्ध स्तर पर कार्य करते हुए मात्र 3 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट तैयार की। जांच के दौरान कमेटी ने निम्नलिखित दस्तावेजों की बारीकी से पड़ताल की।
​परिवार रजिस्टर की नकल और राशन कार्ड।
​स्थानीय भूमि जोत के रिकॉर्ड।
​पंजाब, हरियाणा और जम्मू-कश्मीर के संबंधित एसडीएम कार्यालयों से क्रॉस-वेरिफिकेशन।

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​कोर्ट का फैसला और सख्त निर्देश
​कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर यह पाया गया कि 122 में से 41 मतदाता नियमों के विरुद्ध पाए गए हैं। एसडीएम चंदरवीर सिंह के बयान और रिपोर्ट के आधार पर हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि ये 41 लोग तब तक चुनावी प्रक्रिया में भाग नहीं ले सकेंगे, जब तक वे संघनी पंचायत के एआरओ को अपना वैध निवास प्रमाण पत्र नहीं दिखाते।
​इस फैसले से उन लोगों को कड़ा संदेश गया है जो दोहरे राज्यों में मतदाता पहचान पत्र बनाकर लोकतांत्रिक प्रक्रिया का दुरुपयोग करने की कोशिश करते हैं।

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